एसिडिटी क्या है और इसके घरेलू उपचार, acidity and its home remedies………

एसिडिटी क्या है और इसके घरेलू उपचार, acidity and its home remedies………………

 

दुष्ट, अम्ल विदाही तथा तीक्ष्ण पदार्थो के सेवन से, चबी वाली खाद्य वस्तुएँ अधिक खाने से, अधपका माँस खाने से, दाँत खराब होने के कारण तथा भोजन का ठीक प्रकार पाचन न होने आदि कारणों से यह रोग हो जाता है संक्षेप में यह रोग बदहज्मी का साधारण सा लक्षण है खाई हुए खुराक में खटास उत्पन्न होकर यह रोग होता है। कौड़ी प्रदेश में पीड़ा, जलन और शोध होती है भोजन के 1-2 घन्टे बाद यह लक्षण दिखलायी देता है। खाना (मीटा) सोड़ा लेने से वेदना थोड़ी देर के लिए शान्त हो जाती है खट्टी डकारें तो कभी -कभी तो इतनी आती है कि मुख खट्टा पानी सा आने लग जाता है जिससे स्वाद बिगड़ जाता है अधपचा भोजन मल में निकलता है कभी-कभी रोगी को अतिसार (दस्त ) भी हो जाते हैं।

रोग बढ़ने पर अरुचि, शिर :शूल, उबकाई, उदरशूल ( आमाशयिक पीडा) तथा चमड़ी पर चकत्ते निकलना आदि लक्षण भी हो जाते है ।

उपचार- Treatment:- 

भोजन की ओर विशेष ध्यान दें। शराब, माँस, मिर्च, मसाले, चाय, काफी, तम्बाकू छुड़वा दें। आँवला या अनार को छोड़कर कोई अन्य खट्टा फल खाने को न दें। मैदायुक्त भोजन, आलु, गरिष्ठ भोजन, बासी भोजन तथा अधिक मात्रा में शंक्कर या इससे बनी मिठांइयाँ न दें। नये रोग में अण्डे, मछली, दूध पनीर आदि केवल प्रोटीन वाली वस्तुएँ दें। कुछ दिन बाद आराम होने पर मक्खन, मलाई आदि की चिकनी वस्तुएँ देना आरम्भ करें। सुबह अन्डा, में हल्का भोजन, दोपहर में दूध तीसरे पहर मक्खन लगे टोस्ट, और शाम को हल्का खाना दें। खाने के बाद खाना सोड़ा (सोड़ा बाई कार्ब) या जैतून का तेल (ओलिव आयल) या चूने का पानी नित्य 10 ग्राम तक थोड़ा-थोड़ा करके पिलायें। इससे अम्ल रस कम बनेगा खाना (मीठा) सोड़ा शहद में मिलाकर 4-4 घन्टे बाद चटाने से भी लाभ मिलता है।

पथ्य-Diet:- मूँग, पुराना चावल, करेला, पटोल-घृत, गेहूँ करेज तिस एवं लघु शाक, पिप्पली हरड अकिदाही आहार लहसुन, मधु आदि।

अपध्य-Irreplaceable:- वमन सम्बन्धी सभी वेगों की रोकथाम तिल, तेल, लवण. दही, मध्यपान, गुरूपाकी, अन्न, अम्लयुक्त पदार्थ, पित्त-प्रकोपी आहार आदि।

अम्लपित्त जाशक प्रमुख शास्त्रीय योग-Acetic acid

रस-Juice- काम दुधारस ( मुक्तायुक्त) लीलाविलास रस सूतशेखर रस, अम्लपित्तान्तक रस, सर्वतोभ्रद रस, प्रवाल पंचामृत 125 से 250 मि.ग्रा. वयस्कों को दिन में दो बार । आमलकी घृत अथवा मधु ।

लौह-Iron-

धात्री लौह, अम्लपित्तान्तक लौह अभ्रलौह, चतुः सम मान्डूर सिता-मान्डूर 250 मि.ग्रा. से 500 मि.ग्रा. दिन में 2 3 बार भोजनोपरान्त, मधु+ घृत अथवा सिता+त्रिफलातिक्ता क्वाथ या ताजे जल आदि अनुपान के साथ ।

भस्म-Incinerated प्रवाल भस्म 15 से 25 मि.ग्रा. ताम्रभस्म 60 मि.ग्रा., शंख भस्म 125 मि.ग्रा. कपर्द भस्म 250 मि.ग्रा. से 1 ग्राम तक मधु अथवा जल या मधु के साथ प्रयोग करायें।

पिष्टी-Pishtiमुक्ता पिष्टी 125 मि.ग्रा. दिन में 2 बार, मुक्ता-शुक्त पिष्टी 250 से 500 मि.ग्रा. दिन में 2 3 बार मधु से सेवनीय ।

वटी-Banyan द्राक्षादि वटी, 1 गोली रात्रि में सोते समय, उष्ण जल से संशमनी वटी 2 गोली शीतल जल से। पानीय भक्त वटी 1 गोली दिन में 2 बार काँजी से ।

आसव-Infusion- कुमार्यासव पुनर्नवारिष्ट, सारिवाद्यासव 15-से 25 मि. ली. समान भाग जल मिलाकर भोजनोपरान्त सेवनीय।

चूर्ण-Powder- अविपत्तिकर चूर्ण, 3 से 5 ग्राम। पंचनिम्बादि चूर्ण 3 ग्राम। एलादि चूर्ण, दशक्षार चूर्ण (मात्रा उपर्युक्त) त्रिकट्वादि चूर्ण 1 ग्राम शीतल जल नारियल के जल अथवा मधु या ताजे जल से प्रात: सायं अथवा भोजन के बाद दें।

धृत-Dhrita-

शतावरी धृत, जीरकाद्य धृत, द्राक्षादि धृत में से कोई एक से तीन ग्राम तक सेवन करवायें। नारिकेल खन्ड पाक, आग्रपाक, कुष्माण्डावलेह, जीरकावलेह, द्राक्षावलेह, हरीतकी खण्ड, पिप्पली खण्ड, शुण्ठी खण्ड 5 से 10 ग्राम सायंकाल दुग्ध से दिलवायें। सर्जिक्षार, नारिकेल लवण, ऊर्ध्वांग 500 मि.ग्रा. से 2 ग्राम तक तथा चूर्णोदक 10 ग्राम तक शीतल जल से दिन में 2-3 बार तक दें। पोटलादि क्वाथ 10 मि.ली. सिता मिलाकर प्रयोग कराया जा सकता है।

अम्लपित्त चिकित्सा सूत्र- Acidity medicine formula:-

सामान्यतः अम्लपित्त में कफ, पित्त नाशक चिकित्सा करनी चाहिए। इसके लिए वमन तथा विरेचन चिकित्सा श्रेष्ठ है। विशेषतः ऊर्ध्वाङ्ग अम्लपित्त में वमन तथा निम्नांग अम्लपित्त में रेचन कराया जाना चाहिए। इसके पश्चात् भी यदि दोषों की शान्ति न हो तो युक्तिपूर शिराच्छेद करके रक्त मोक्षण भी कराना चाहिए प्रधान दोष की शामक चिकित्सा तथा तदनुसार आहार का उपयोग कराना चाहिए ।

शुक्ति टेबलेट (अलारसिन)-Shukti Tablet (Alarsin)-

भोजन के मध्य या पश्चात 2-2 टिकिया 3 बार तथा लक्षणों की उग्रता में दिन में 3-4 बार 3 से 6 गोलियाँ एक साथ दें। बच्चों को % गोली दिन में 3 बार अम्लपित्त की सभी अवस्थाओं में श्रेष्ठ लाभकर है। आमाशय शोथ परिणाम शूल, अन्नद्रव शूल, पेप्टिक अल्सर आदि सभी अवस्थाओं में अत्यन्त निरापद औषधि है।

मैनोल टेबलेट (चरक)-Manol Tablet (Charak)- 2 गोली दिन में 2-3 बार जल या दूध के साथ बच्चों को % से 1 गोली दें छाती की जलन में शीघ्र प्रभावकारी तथा अम्लपित्त नाशक अति उत्तम सिद्ध हुई है।

अभयासिन गोली (झण्ड)-Exercise pill (flag)-

2 से 4 गोली गर्म जल या दूध के साथ दिन में 3 बार दें। अम्लपित्त नाशक तथा मलावरोध में भी प्रभावकारी है।

जाइम टेबलेट (झण्डु)- Zyme Tablet (Zandu)- अजीर्ण तथा अम्लपित्त में लाभकर है। डाइमैक्स सीरप ( प्रताप फार्मा)-2 चम्मच दिन 2/3 बार अम्लपित्त की समस्त अवस्थाओं में निरापद औषधि है।

इथीइन्जाइम गोली व सीरप (मेडिकल इथिक्स)-

Ethinzyme Tablet & Syrup (Medical Ethics)- 1/2 गोली दिन में 2-3 बार दें तथा सीरप आधा चम्मच दिन में 2 या 3 बार दें। पित्तशामक है।

अम्लपित्तान्तक योग (वैद्यनाथ)- Acidic yoga (Vaidyanath)-Ethinzyme Tablet & Syrup (Medical Ethics)- आधा चम्मच दिन में 2-3 बार अम्लपित्त में निश्चित लाभकारी है।

अग्नि-ब्ल्लभ क्षार (धन्वन्तरि अलीगढ़, ज्वाला फार्मेसी)- Agni-Ballabh Kshar (Dhanvantari Aligarh, Jwala Pharmacy)- आधा चम्मच दिन में 2-3 बार दें। अम्लपित्त में निश्चित लाभकारी है।

मुत्रल पाउडर (वैद्यनाथ)-

Mutral Powder (Vaidyanath)- 2 से 10 ग्राम तक पाउडर जल के साथ प्रयोग करायें । अम्ल पित्त में आशातींत लाभ होगा यह औषधि रुका हुआ मूत्र बाहर निकाल देती है।

अग्नि संदीपन कैपसूल (जी.ए.मिश्रा)- Agni Sandipan Capsul (GA Mishra)- आधा कैपसूल दिन में 2 बार या आवश्यकतानुसार।

अमृतत रसायन (त्रिमूर्ति)- Amritat Rasayan (Trimurti)- 5 से 10 ग्राम 2-3 बार दें । स्वादिष्ट तथा अम्लपित नाशक रसायन है।

घरेलू योग-Domestic yoga एसिडिटी घरेलू उपाय

करेले के फूल या पत्तों को घी में भूनकर उनका चूर्ण बनाले। 1-2 ग्राम चूर्ण दिन में 2/3 बार खाने से अम्ल पित्त में लाभ होता है।

जीरा (श्वेत) तथा धनिया को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर खिलायें, अम्लपित्त में लाभप्रद है।

सन्तरे के रस में थोड़ा जीरा (भुना हुआ) और थोड़ी मात्रा में सैंधा नमक मिलाकर पिलाने से अम्लपित्त में लाभ होता है।

बच के चुर्ण को 2-4 रक्ती की मात्रा में शहद या गुड़ के साथ सेवन करने से अम्लपित्त में लाभ होता है।

নিत्य 1 तोला चूने का निधरा हुआ पानी पीने से अम्लपित्त में आशातीत लाभ होता है।
पिप्पलो चुर्ण 3 ग्राम की मात्रा में मिश्री के साथ नित्य सेवन करने से अम्लपित्त में लाभ होता है। एक माह प्रयोग करें।

मुलहठी के चूर्ण को मधु तथा धृत की असमान मात्रा में मिलाकर चटाने से अम्लपित्त में लाभ होता है। यदि शहद 5 ग्राम लें तो घृत 10 ग्राम।

मुनक्का 50 ग्राम तथा सोफ 25 ग्राम दोनों को जौ कूट कर 200 ग्राम पानी में रात को भिगों दें। प्रात:काल मसल, छान कर उसमें दस ग्नराम मिश्री मिलाकर पिलायें। अम्लपित्त में लाभ होता है।

शंख भस्म 1 ग्राम तथा सोंठ का चूर्ण आधा ग्राम दोनों को मिलाकर शहद के साथ चटावें । अम्ल पित्त दूर भाग जाता है।

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