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महिलाओं के लिए वरदान है ये पेड़, सब बिमारियों का करेगा सफाया

महिलाओं के लिए वरदान है ये पेड़, सब बिमारियों का करेगा सफाया………….

 

मासिक धर्म लड़कियों की एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है, इसके बारे में हर लड़की / स्त्री को जानकारी रखनी चाहिए. माहवारी या पीरियड 10-16 वर्ष की लड़कियों के शरीर में होने वाला एक हार्मोनल बदलाव है. स्त्री के शरीर में दो अंडाशय और एक गर्भाशय होता है.

स्त्री के अंडाशय से हर माह एक विकसित अण्डा उत्पन्न होता है. जब अण्डा गर्भाशय में पहुंचता है, उसका स्तर खून और तरल पदार्थ से गाढ़ा हो जाता है. यदि उस अंडे का पुरूष के शुक्राणु से मिलन नहीं होता है, तो यह स्राव बन जाता है जो कि योनि से निकल जाता है. इसी स्राव को मासिक धर्म, रजोधर्म या माहवारी, पीरियड, या मासिक कहते हैं

मासिक धर्म कब होता है :-

मासिक हर महीने 28-35 दिन के बीच में होता है मासिक का समय 2 से 7 दिन के बीच का हो सकता है अलग-अलग स्त्रियों की पीरियड की अवधि अलग-अलग होती है. एक स्त्री के पीरियड की अवधि भी कम या ज्यादा होती रहती है

मासिक धर्म के लक्षण :-

मासिक धर्म में पेट के निचले हिस्से में दर्द होने के अलावा और भी अन्य लक्षण हैं जो इस समय अनुभव होते हैं जैसे पीठ के निचले हिस्से में दर्द, पैरों में दर्द, इचिंग, खुजली,जी मिचलाना, उल्टी, दस्त ,सिर दर्द, चिड़चिड़ापन, कमज़ोरी, बेहोशी आना (यह बहुत कम परिस्थितियों में होता है आयुर्वेदिक की भाषा में अगर कहें तो इसमें वायु और पित बढे हुवे होते है

मासिक धर्म होने में दर्द के कारण :-

कम उम्र (11 वर्ष से कम) में मासिक धर्म होना, अत्यधिक मासिक धर्म होना, शरीर का वज़न अधिक होना, धूम्रपान और शराब का सेवन

समस्याओं से बचने के लिए उपाय :-

बागबट जी कहतें हैं की मासिक धर्म में सब कुछ ठीक रखने के लिए यानी सही समय पर मासिक धर्म हो रक्त भी अधिक न बहे तो गरम गरम पानी (आधा कप) में घी (गाय या भैंस का) मिला कर पीयें दिन में इसे 3-4 बार तक पी सकतें हैं इस चीज से कोई फर्क नही पड़ता की आपका मासिक धर्म 3 दिन चले, 4 दिन या 7 दिन मात्रा सभी के लिए उतनी ही रखें इस प्रकिया से मासिक धर्म सम्बंधित सब कुछ ठीक होगा चाहे मनुरेजिया हो या मेटरेजिया यह पानी और घी मासिक धर्म के दौरान ही पीयें.

माताओ-बहनो को मासिक धर्म (Periods) से सबन्धित समस्याएँ होना साधारण बात है अक्सर माहवारी की अनियमिता हो जाती है, अर्थात कई बार रक्तस्त्राव बहुत अधिक हो जाता है और कई बार क्या होता है बिलकुल ही नहीं होता ! और कभी कभी ऐसा भी होता है की ये 2-3 दिन होना चाहिए लेकिन 1 ही दिन होता है ,और कई बार 15 दिन ही दुबारा आ जाता है, और कई बार 2 महीने तक नहीं आता !

मासिक धर्म चक्र की अनियमिता की जितनी सभी समस्याएँ है इसकी हमारे आयुर्वेद मे बहुत ही अच्छी और लाभकारी औषधि है वो है अशोक के पेड़ के पत्तों की चटनी ! हाँ एक बात याद रखे आशोक का पेड़ दो तरह का है एक तो सीधा है बिलकुल लंबा ज़्यादातर लोग उसे ही अशोक समझते है जबकि वो नहीं है एक और होता है पूरा गोल होता है और फैला हुआ होता है वही असली अशोक का पेड़ है जिसकी छाया मे माता सीता ठहरी थी

इस असली अशोक के 5-6 पत्ते तोड़िए उसे पीस कर चटनी बनाओ अब इसे एक से डेढ़ गिलास पानी मे कुछ देर तक उबाले. इतना उबाले की पानी आधा से पौन गिलास रह जाए ! फिर उसे बिलकुल ठंडा होने के लिए छोड़ दीजिये और फिर उसको बिना छाने हुए पीये ! सबसे अच्छा है सुबह खाली पेट पीना ! कितने दिन तक पीना ?? 30 दिन तक लगातार पीना उससे मासिक धर्म (periods ) से सबन्धित सभी तरह की बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं ! ये सबसे अधिक अकेली बहुत ही लाभकारी दवा है ! जिसका नुकसान कोई नहीं है ! और अगर कुछ माताओ-बहनो को 30 दिन लेने से थोड़ा आराम ही मिलता है ज्यादा नहीं मिलता तो वो और अगले 30 दिन तक ले सकती है वैसे लगभग मात्र 30 दिन लेने से ही समस्या ठीक हो जाती है !

ये तो हुई महवारी मे अनियमिता की बात ! अब बात करते पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द की. बहुत बार माताओ -बहनो को ऐसे समय मे बहुत अधिक शरीर मे अलग अलग जगह दर्द होता है कई बार कमर दर्द होना ,सिर दर्द होना ,पेट दर्द पीठ मे दर्द होना जंघों मे दर्द होना ,स्तनो मे दर्द, चक्कर आना ,नींद ना आना बेचैनी होना आदि तो ऐसे मे तेज pain killer लेने से बचे क्योंकि इनके बहुत अधिक side effects है , एक बीमारी ठीक करेंगे 10 साथ हो जाएगी और बहुत से pain killer तो विदेशो मे 20 वर्षो से ban है जो भारत मे बिकती है !

वाइट डिस्चार्ज में क्या करें :-

अगर आपको वाइट डिस्चार्ज है तो गर्म दूध में सतावारी मिलकर रोज रात को सेवन करें

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