Ayurvedic treatment for piles ,बवासीर या पाइल्स का आयुर्वेदिक इलाज

Ayurvedic treatment for piles ,बवासीर या पाइल्स का आयुर्वेदिक इलाज………..

 

बवासीर या पाइल्स एक ऐसी समस्या है जिसमें गुदामार्ग मैं और बाहरी हिस्से की नसों में सूजन आ जाती है। इसकी वजह से गुदा के अंदरूनी हिस्से में या बाहर के हिस्से में कुछ मस्से जैसी आकृति बन जाती हैं, जिनमें से कई बार खून / रक्त निकलता है और दर्द भी होता है। कभी-कभी माल त्याग करते समय जोर लगाने पर ये मस्से बाहर की ओर आ जाते है। यदि परिवार में किसी को ऐसी समस्या रही है तो आगे की पीढ़ी में इसके पाए जाने की आशंका बनी रहती है। बवासीर या पाइल्स का आयुर्वेदिक इलाज |

पाइल्स और फिशर में अंतर | Difference between piles and fissure :

कई बार पाइल्स और फिशर में लोग कंफ्यूज हो जाते हैं। फिशर भी गुदा का ही रोग है, लेकिन इसमें गुदा में क्रैक हो जाता है। यह क्रैक छोटा सा भी हो सकता है और इतना बड़ा भी कि इससे खून आने लगता है।

पाइल्स की स्टेज: पाइल्स की चार स्टेज होती हैं जो क्रमशः हैं

1 : यह शुरुआती स्टेज होती है। इसमें कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते। कई बार मरीज को पता भी नहीं चलता कि उसे पाइल्स हैं। मरीज को कोई खास दर्द महसूस नहीं होता। बस हल्की सी खारिश महसूस होती है और जोर लगाने पर कई बार हल्का खून आ जाता है। इसमें पाइल्स अंदर ही होते हैं।

2: दूसरी स्टेज में मल त्याग के वक्त मस्से बाहर की ओर आने लगते हैं, लेकिन हाथ से भीतर करने पर वे अंदर चले जाते हैं। पहली स्टेज की तुलना में इसमें थोड़ा ज्यादा दर्द महसूस होता है और जोर लगाने पर खून भी आने लगता है।

3 : यह स्थिति थोड़ी गंभीर हो जाती है क्योंकि इसमें मस्से बाहर की ओर ही रहते हैं। हाथ से भी इन्हें अंदर नहीं किया जा सकता है। इस स्थिति में मरीज को तेज दर्द महसूस होता है और मल त्याग के साथ खून भी ज्यादा आता है।

4 : ग्रेड 3 की बिगड़ी हुई स्थिति होती है। इसमें मस्से बाहर की ओर लटके रहते हैं। जबर्दस्त दर्द और खून आने की शिकायत मरीज को होती है। इंफेक्शन के चांस बने रहते हैं।

बवासीर के लक्षण | Symptoms of piles  :

मल त्याग करते वक्त तेज चमकदार रक्त का आना या म्यूकस का आना।
एनस के आसपास सूजन या गांठ सी महसूस होना।

एनस के आसपास खुजली का होना।
मल त्याग करने के बाद भी ऐसा लगते रहना जैसे पेट साफ न हुआ हो।
पाइल्स के मस्सों में सिर्फ खून आता है, दर्द नहीं होता। अगर दर्द है तो इसकी वजह है इंफेक्शन।

पाइल्स के कारण | Causes of piles  :

कब्ज पाइल्स की सबसे बड़ी वजह होती है। कब्ज होने की वजह से कई बार मल त्याग करते समय जोर लगाना पड़ता है और इसकी वजह से पाइल्स की शिकायत हो जाती है।
ऐसे लोग जिनका काम बहुत ज्यादा देर तक खड़े रहने का होता है, उन्हें पाइल्स की समस्या हो सकती है।

गुदा मैथुन करने से भी पाइल्स की समस्या हो सकती है।
मोटापा इसकी एक और अहम वजह है।

कई बार प्रेग्नेंसी के दौरान भी पाइल्स की समस्या हो सकती है।
नॉर्मल डिलिवरी के बाद भी पाइल्स की समस्या हो सकती है।

1: आयुर्वेदिक दवाओं से :

नीचे दी गई दवाओं में से कोई एक ली जा सकती है।

रोज रात को एक चम्मच त्रिफला गर्म पानी से लें। इसे लेने के बाद कोई और चीज न खाएं।
रोज रात को ईसबगोल की भुस्सी एक चम्मच गर्म दूध से लें।

अभयारिष्ट या कुमारी आसव खाने के बाद चार चम्मच आधा कप सादा पानी में मिलाकर लें।
मस्सों पर लगाने के लिए सुश्रुत तेल आता है। इसे मस्सों पर लगा सकते हैं।

सूजन और दर्द है तो सिकाई की मदद से सकते हैं। इसके लिए एक टब में गर्म पानी ले लें और उसमें एक चुटकी पौटेशियम परमेंगनेट डाल दें। यह सिकाई हर मल त्याग के बाद करें।

2: क्षारसूत्र द्वारा :

स्टेज 2, 3 या 4 के पाइल्स के लिए आयुर्वेद में क्षारसूत्र चिकित्सा की जाती है। इसका तरीका नीचे दिया गया है। इसमें एक धागे का प्रयोग किया जाता है। कुछ आयुर्वेदिक दवाओं का यूज करके डॉक्टर इस धागे को बनाते हैं।इस क्षेत्र में कई झोलाछाप डॉक्टर भी हैं जो क्षारसूत्र से इलाज करने का दावा करते हैं। इनसे बचें। क्षारसूत्र अगर करा रहे हैं तो उन्हीं डॉक्टरों से कराएं, जिनके पास आयुर्वेद की डिग्री है।

3. डाइट : पाइल्स से बचने और अगर है तो उससे जल्द छुटकारा पाने के लिए यह खाएं:

ज्यादा से ज्यादा सब्जियों का सेवन करें। हरी पत्तेदार सब्जी खाएं। मटर, सभी प्रकार की फलियां, शिमला मिर्च, तोरी, टिंडा, लौकी, गाजर, मेथी, मूली, खीरा, ककड़ी, पालक। कब्ज से राहत देने के लिए बथुआ अच्छा होता है।

पपीता, केला, नाशपाती, अंगूर, सेब खाएं। मौसमी, संतरा, तरबूज, खरबूजा, आड़ू, कीनू, अमरूद बहुत फायदेमंद हैं।

जिस गेहूं के आटे की रोटी खाते हैं, उसमें सोयाबीन, ज्वार, चने आदि का आटा मिक्स कर लें। इससे आपको ज्यादा फाइबर मिलेगा।

टोंड दूध ही पीएं। शर्बत, शिकंजी, नींबू पानी या लस्सी ले सकते हैं।
दिन में कम से कम 8 गिलास पानी जरूर पिएं।

4: यह न खाएं :

फास्ट फूड, जंक फूड और मैदे से बनी खाने की चीजें।
चावल कम खाएं।
सब्जियों में भिंडी, अरबी, बैंगन न खाएं।
राजमा, छोले, उड़द, चने आदि।
मीट, अंडा और मछली।
शराब, सिगरेट और तंबाकू से बचें।

5: याद रहे :

ढीले अंडरवेयर पहनें। लंगोट आदि पहनना नुकसानदायक हो सकता है।
मल त्याग के दौरान जोर लगाने से बचें।
कोशिश करें कि मल त्याग का काम दो मिनट के भीतर पूरा करके आ जाएं।
टॉयलेट में बैठकर कोई किताब या पेपर पढ़ने की आदत से बचें।
हो सके तो इंडियन स्टाइल वाले टॉयलेट का ही यूज करें क्योंकि इसमें बैठने का तरीका ऐसा होता है कि पेट आसानी से साफ हो जाता है ।

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