सर्दी-जुकाम व बुखार में कारगर हैं ये आयुर्वेदिक काढ़े……….

सर्दी-जुकाम व बुखार में कारगर हैं ये आयुर्वेदिक काढ़े………

 

काढ़ा एक आयुर्वेदिक पेय पदार्थ है, जो कई तरह की घरेलू औषधियों को मिलाकर तैयार किया जाता है। इसके सेवन से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इससे मौसमी बीमारियों से बचने में मदद मिलती है। दरअसल काढ़ा शरीर का इम्यून सिस्टम मजबूत करता है यानी बीमारियों से लड़ने की ताकत प्रदान करता है। तो आइए हम आपको मौसमी बीमारियों विशेषकर सर्दी, जुकाम, बुखार आदि से बचने के लिए कुछ ऐसे आयुर्वेदिक काढ़ों के बारे में बताते हैं, जिन्हें खुद घर पर भी बना सकते हैं।

काढ़ा पाचन सुधारता है, बीमारियों से लड़ने की ताकत देता है, बुखार दूर भगाता है और डायबिटीज में भी फायदा होता है। सबसे बड़ी खूबी है कि ये काढ़ा शरीर को अंदर से मजबूत करते हैं।

अदरक और गुड़ का काढ़ा

उबलते पानी में बारिक पिसी हुई लौंग, काली मिर्च, इलायची, अदरक और गुड़ डालें। इसे कुछ देर तक अच्छा उबलने दें और फिर इसमें कुछ तुलसी की भी पत्तियां भी डाल दें। जब पानी उबलकर आधा हो जाए तो छानकर पीना चाहिए। इसे बिल्कुल ठंडा करके नहीं पीना चाहिए।

काली मिर्च व नींबू का काढ़ा

एक चम्मच काली मिर्च और चार चम्मच नींबू का रस एक कप पानी में मिलाकर गर्म करें। और इसे रोज सुबह पीना चाहिए। इसके ठंडा होने पर शहद भी डालकर पीया जा सकता है। इस काढ़े से सर्दी-जुकाम में आराम मिलता है और शरीर में अवांछित वसा भी कम हो जाती है। शरीर में ताजगी व स्फूर्ति महसूस होती है।

अजवाइन व गुड़ का काढ़ा

एक ग्लास पानी को अच्छी तरह उबाल लें। जब पानी अच्छी तरह उबलने लगे तो इसमें थोड़ा सा गुड़ और आधा चम्मच अजवाइन मिला लें। जब पानी आधा हो जाए तो इसे छानकर पीएं। अजवाइन पाचन क्रिया को ठीक करने में काफी मदद करती है और साथ ही गैस या अपच जैसी समस्या भी इससे दूर होती है। इस काढ़े को पीने से खांसी और पेट दर्द की समस्या दूर होती है।

दालचीनी का काढ़ा है बड़े काम का

हमारे किचन में आमतौर पर उपयोग में आने वाली दालचीनी एक बड़े काम की औषधि है। इससे भी काढ़ा बनाया जा सकता है। एक ग्लास पानी में आधा चम्मच दालचीन डालकर धीमी आंच पर 10 मिनट तक गर्म करें। ठंडा होने के बाद इसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर उपयोग करें। सर्दी जुकाम व खांसी में इससे लाभ तो मिलता है। साथ ही यह दिल के रोगियों के लिए भी काफी फायदेमंद है। दिल के रोगियों या ऐसे लोग जिनका कॉलेस्ट्रोल काफी बढ़ा हुआ है, उन्हें दालचीनी का सेवन रोज करना चाहिए।

लौंग-तुलसी और काला नमक का काढ़ा

सर्दी-खांसी और ब्रोंकाइटिस के मरीजों में लिए यह काढ़ा बड़े काम का है। इसके सेवन से जोड़ों के दर्द में भी काफी आराम मिलता है। इसे बनाने के लिए धीमी आंच पर दो गिलास पानी में 10-15 तुलसी की पत्तियों डालकर उबालें, साथ ही इसमें 4-5 लौंग भी पीसकर डाल दें। जब यह पानी उबलकर आधा हो जाए तो इसे छानकर पीएं। इससे शरीर का इम्यून सिस्टम बढ़ता है।

इलायची व शहद का काढ़ा

सर्दी जुकाम में आमतौर पर लोगों को सांस लेने में काफी दिक्कत होती है। सांस की परेशानी होने पर इलायची और शहद मिलाकर भी काढ़ा तैयार किया जा सकता है। इसमें थोड़ी मात्रा में पिसी काली मिर्च भी मिलाई जा सकती है। इस काढ़े में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट तत्व दिल की बीमारी का खतरा कम करते हैं। इसे बनाने के लिए धीमी आंच पर एक बर्तन में दो कप पानी गर्म करें और उसमें आधा चम्मच इलायची पाउडर मिलाकर 10 मिनट उबालें। फिर इसमें शहद मिलाकर सेवन करें।

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घर में रहने से बढ़ रहा है वजन तो करे यह काम , नहीं बिगड़ेगी बॉडी शेप

घर में रहने से बढ़ रहे वजन को कम करेंगे ये 7 टिप्स, नहीं बिगड़ेगी बॉडी शेप…………..

 

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लोगों को बाहर निकलने से मना किया जा रहा है। ऐसे में कई लोग हैं जो फिजकल एक्टिविटी भी नहीं कर पा रहे हैं, जिसके वजह से मोटापा बढ़ने लगा है। मोटापा के बढ़ने से न सिर्फ शरीर की सुंदरता बिगड़ती है बल्कि इंसान कई बीमारियों के चपेट में आ जाता है। वैसे तो सभी लोग वजन घटाने के लिए काफी मेहनत करते हैं।

लेकिन सही तरीका पता न होने के कारण असफल हो जाते हैं। वहीं कई लोग पेट की चर्बी को कम करने के लिए घरेलू उपायों को तलाशते हैं। यदि आप सभी उपायों का इस्तेमाल कर थक गए हैं तो आज हम आपको 7 ऐसे फूड के बारे में बताएंगे जो आपके वजन को कम करने में मदद करेंगे। तो आइए बिना देर किए जानते हैं इन फूड्स के बारे में विस्तार से…

बादाम

वैसे तो बादाम का सेवन दिमाग और दिल के स्वास्थ्य के लिए किया जाता है लेकिन आप इसके इस्तेमाल से वजन भी कम कर सकते हैं। बादाम में प्रोटीन और फाइबर की भरपूर मात्रा पाई जाती है। ये दोनों पोषक तत्व वजन कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

अलसी के बीज

फ्लेक्स सीड्स यानी अलसी को प्लांट-बेस्ड प्रोटीन का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। फ्लेक्स सीड्स में ओमेगा -3 फैटी एसिड और फ़ाइबर की भरपूर मात्रा पाई जाती है। इसके स्वास्थ्य लाभ को प्राप्त करने के लिए आप पानी, स्मूदी या शेक में मिला कर सेवन कर सकते हैं।

नमक का कम सेवन

नमक में पाए जाने वाला सोडियम शरीर में कई परेशानियों को पैदा करता है। नमक के ज्यादा सेवन से बचना चाहिए। क्योंकि इसका ज्यादा सेवन मेटाबॉल्जिम को प्रभावित करता है, जिससे वजन बढ़ने लगता है। खासतौर पर शाम के समय तो हल्का से हल्का नमक का इस्तेमाल करना चाहिए।

जंक फूड्स से दूरी

यदि आप वजन कम करना चाहते हैं तो बर्गर, फ्राईस, चौमीन जैसे जंक फूड्स से दूरी में ही भलाई है। इसके साथ ही आपको शुगर से जुड़ी चीजों का कम सेवन करना चाहिए। कूकीज, केक, डॉनट्स आदि चीजों को खाने से बचना चाहिए।

सलाद का सेवन

सलाद को प्रोटीन और फाइबर का एक अच्छा स्त्रोत माना जाता है। अगर आप वजन कम करना चााहते हैं तो आपको इसे अपने डाइट में शामिल करना चाहिए।

गर्म पानी

यदि आप बढ़ते वजन से परेशान हैं तो आपको रोजाना सुबह गर्म पानी पीना चाहिए। ऐसा करना आपके लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है। गर्म पानी के सेवन से शरीर में जमा वसा कम होने लगती है और आपका वजन कम होने लगता है।

एक्सरसाइज

यदि आप बाहर नहीं निकल पा रहे हैं तो घर पर ही कुछ एक्सरसाइज और योगा का अभ्यास कर सकते हैं ऐसा करने से आपका वजन नहीं बढ़ेगा।

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घर पर रहकर खाएं सेहतमंद खाना, रूटीन में शामिल करें ये सुफरफूड….

घर पर रहकर खाएं सेहतमंद खाना, रूटीन में शामिल करें ये तीन सुफरफूड…………

 

 

कोरोना के कहर ने पूरी दुनिया में तबाही मचा रखी है। ऐसे में अपने देश में भी लॉकडाउन लगा दिया गया है। घर में रहने के दौरान अक्सर लोग अनहेल्दी खाना खाने लगते हैं। जिसकी वजह से सेहत के साथ ही शरीर के वजन पर भी असर पड़ता है। सोचिए जरा अगर लगातार 21 दिनों तक खानपान में लापरवाही की गई तो मोटापे के साथ ही बहुत सारी बीमारियां भी शरीर में घर बना लेंगी। इससे बचने के लिए जरूरी है सेहतमंद चीजें खाईं जाएं।

तो चलिए जानें क्या हैं वो खास सुपरफूड।

फलों का सेवन

दिनभर कुछ खाने का मन करता है तो अंगूर का सेवन करें। वैसे तो हर तरह के फल सेहत को फायदा करते हैं। जिसमें केला, सेब से लेकर संतरा, अंगूर तक शामिल हैं। आप चाहें तो फलों को मिलाकर फ्रूट सलाद भी बना सकते हैं। इसे लंच और डिनर के बीच में भूख लगने पर खाएं। खाने से पहले फलों को अच्छी तरह धोना न भूलें। फल खाने से शरीर का इम्यूनिटी सिस्टम भी मजबूत होता है और एनर्जी लेवल भी बढ़ता है।

स्प्राउट्स

चटपटा खाने का मन करे तो आप चना, मूंग या मोठ का स्प्राउट घर में तैयार कर सकते हैं। इन्हें एक साथ मिक्स करें और उसमें टमाटर, प्याज व अन्य मनपसंद सब्जियां मिला लें। ऊपर से नींबू और चाट मसाला डालकर खाएं। इसमें पत्तागोभी, गाजर और हरा धनिया भी मिला लें। प्रोटीन, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर स्प्राउट्स का सेवन फायदेमंद होता है।

ओट्स

अपने आहार में ओट्स शामिल करें, क्योंकि यह वजन को कंट्रोल करने में आपकी मदद करता है। आप नाश्ते में ओट्स, रागी फ्लेक्स या ओट्स से बना दलिया खा सकते हैं। इसमें बेसन या मूंग दाल मिलाकर चीला बना लें। इससे शरीर को पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व मिलेंगे। ओट्स खाने से पाचन सही रहता है और कब्ज की परेशानी नहीं होती है।

इन सेहतमंद चीजों को अपने रूटीन में शामिल करें। घऱ में रहते हुए जब भी कुछ खाने का मन करे तो इसे खा सकते हैं।

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कोरोना वायरस लॉकडाउन से जुड़े 12 सबसे आम सवालों के जवाब

कोरोना वायरस लॉकडाउन से जुड़े 12 सबसे आम सवालों के जवाब…….

 

 

दुनियाभर में अब तक करीब 4 लाख लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाये गए हैं और 16 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 500 के करीब पहुंच गई है और मंगलवार शाम तक 9 लोगों की मौत COVID-19 की वजह से हो चुकी है। अब तक भारत में कुल 23 प्रदेशों में कोरोना संक्रमण के मरीज़ मिले हैं।

ऐसी स्थिति में दुनियाभर के कई देशों में लॉकडाउन कर दिया गया है। यहां तक कि, भारत भी लॉकडाउन की स्थिति से गुज़र रहा है। देश में लोगों को एक जगह इकट्ठा होने पर बैन लगा हुआ है, साथ ही रोड, रेल और फ्लाइट्स भी 31 मार्च तक रद्द कर दी गई हैं।

घर पर रहना ही इस वक्त कोरोना वायरस से बचने का सबसे अच्छा तरीका है। ऐसे में कई ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब आप सभी ढूंढ़ रहे होंगे। हम आपकी मदद के लिए लाए हैं कुछ ऐसे ही सवालों के जवाब:

1. क्या घर से बाहर जाने पर अरेस्ट हो सकते हैं?

नहीं

2. क्या सुबह जॉगिंग के लिए बाहर जाया जा सकता है?

हां, लेकिन अकेले जाएं। किसी दोस्त या ग्रुप के साथ नहीं।

3. क्या कॉलोनी के पार्क में वॉक करने जाना ठीक है?

नहीं। इस वक्त जो हालात हैं, उसमें सबसे अच्छा यही है कि आप बाहर न जाएं तो अच्छा है।

4. क्या मैं एटीएम से पैसे निकालने के लिए बाहर जा सकता हूं? 

हां, आप पैसे निकालने के लिए बाहर जा सकते हैं।

5. क्या ऊबर या ओला लेकर एयरपोर्ट या शहर में कहीं भी जा सकते हैं?

नहीं, ऊबर और ओला दोनों ने कोरोना वायरस के चलते अपनी सेवाएं बंद कर दी हैं।

6. क्या अपने घर की बिल्डिंग की लिफ्ट का इस्तेमाल करना सुरक्षित है?

हां, लेकिन आपको स्वच्छता का ख़ास ख्याल रखना होगा। अपने हाथ धोना न भूलें। इसके अलावा आप लिफ्ट के बटन छूने के लिए सर्जिकल ग्लव्ज़ भी पहन सकते हैं।

7. क्या कोई भी अपना शहर छोड़कर दूसरे शहर जा सकता है?

कई राज्यों ने अपनी सीमाओं को सील कर दिया है और केवल आवश्यक सेवाओं और आपातकालीन मामलों को ही प्रवेश करने की अनुमति दी जा रही है।

8. अगर कोई लॉकडाउन का पालन नहीं करता, तो क्या उसे सज़ा मिलेगी?

लॉकडाउन का पूरी गंभीरता के साथ पालन किया जाना चाहिए। कानून का पालन न करने पर पुलिस आपके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर सकती है।

9. लॉकडाउन कब तक रहेगा?

ज़्यादातर राज्यों ने 31 मार्च तक लॉकडाउन रखने की घोषणा की है। हालांकि,  अब सरकार ने इसे 15 अप्रैल तक लॉकडाउन कर दिया है ।

10. क्या एमर्जेंसी में मेडिकल शॉप जा सकते हैं?

देशभर में दवाई की सभी दुकानें खुली रहेंगी।

11. क्या लोकल मार्केट खुला रहेगा?

हां, किराने का सामान, फल , सब्ज़ियां, बेकरी का सामान उपलब्ध रहेगा।

12. क्या पेट्रोल पम्प खुले रहेंगे?

हां, पेट्रोल पम्प और एलपीजी एजेंसियां खुली रहेंगी।

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कोरोना वायरस का अटैक होने पर शरीर पर होता है ऐसा असर…

कोरोना वायरस का अटैक होने पर शरीर पर होता है ऐसा असर………….

 

चीन के वुहान शहर से फैले जानलेवा कोरोना वायरस से अब तक दुनिया भर में लगभग 21,308 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 5 लाख लोग इससे संक्रमित पाए गए हैं। आप ये तो जानते हैं कि ये वायरस जानलेवा भी साबित हो रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये शरीर को कैसे अटैक करता है? आइए आपको बताते हैं कि आखिर ये वायरस आपके शरीर पर कैसे असर डालता है।

कैसे करता है कोरोना वायरस अटैक

ये वायरस आपके शरीर में तब प्रवेश करता है जब आप संक्रमित बूंदों को सांस के द्वारा अंदर खींच लेते हैं या फिर आप किसी संक्रमित सतह को छू लेते हैं और फिर उन्हीं हाथों से अपनी आंखें, मुंह या नाक छूते हैं। इसके बाद वायरस के कण गले तक पहुंच जाते हैं और कोशिकाओं पर छिपक जाते हैं और अपनी आनुवंशिक सामग्री कोशिकाओं में ट्रांसफर कर देते हैं। जिससे मानव कोशिकाएं ऐसे कारखाने में तबदील हो जाती है जो और ज़्यादा वायरस कणों का उत्पादन करने लगती है।

ऐसे लड़ता है इम्यून सिस्टम

जैसे-जैसे वायरस बढ़ने लगता है, यह गले के नीचे चला जाता है। जिससे बुख़ार और खांसी शुरू हो जाती है। जो इस बात का संकेत है कि इम्यून सिस्टम इस वायरस से लड़ रहा है। कोरोना वायरस से संक्रमित कई लोगों में इसके लक्षण बिल्कुल नहीं दिखते हैं।

फेफड़ों को करता है कमज़ोर

गंभीर मामलों में, जब वायरस फेफड़ों में पहुंचता है, तो यह सूजन यानी इंफ्लामेशन को पैदा करता है। जिससे फेफड़ों को रक्तप्रवाह में ऑक्सीजन भेजने में कठिनाई आती है। इस वजह से फेफड़ों में पानी भरना शुरू हो जाता है और सांस लेने में मुश्किल आने लगती है। कई मरीज़ों को सांस लेने में मदद के लिए वेंटीलेटर का सहारा लेना पड़ता है।

कोरोना का गंभीर रूप

चीन के डाटा के अनुसार, ऐसा कोरोना वायरस के 7 में से एक मरीज़ के साथ होता है। कोरोना वायरस की वजह से जिन लोगों ने जान गंवाई हैं या गंभीर हालत में हैं, उनमें से ज़्यादातर पहले से ही किसी बीमारी से ग्रस्त थे, जिसकी वजह से उनका इम्यून सिस्टम काफी कमज़ोर था। गंभीर रूप से बीमार होने वाले 6% लोगों में, फेफड़े की सूजन इतनी गंभीर है कि शरीर को जीवित रहने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

कैसे होते हैं शुरुआती लक्षण

कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्ति में शुरुआती लक्षण बेहद साधारण होते हैं। इस दौरान व्यक्ति को बुखार आता है और बहुत ज़्यादा थकावट होती है। साथ ही रोगी को सूखी खांसी होती है। इसके अलावा कई लोगों में डायरिया जैसी भी शिकायतें देखने को मिली हैं।

ऐसे करें बचाव

ऐसे वक्त में ये बेहद ज़रूरी है कि सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य सलाह का पालन करके अपनी रक्षा करें। जिसमें सामाजिक दूरी बनाना और स्वच्छता बनाए रखना भी शामिल है।

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यूरिन इन्फेक्शन से बचना है तो अपनाएं शाकाहारी भोजन…..

यूरिन इन्फेक्शन से बचना है तो अपनाएं शाकाहारी भोजन……..

 

यूरिन इन्फेक्शन यानी पेशाब संबंधी बीमारी आम समस्या है। उम्र के साथ यह समस्या बढ़ती जाती है। वहीं महिलाओं को इससे ज्यादा जुझना पड़ता है। अब इस समस्या से जुड़ा एक रोचक अध्ययन सामने आया है। इसके मुताबिक, जो लोग शाकाहारी भोजन करते हैं, उनमें यूरिन इन्फेक्शन की आशंका कम होती है। यूरिन संबंधी बीमारियों को डॉक्टरों की भाषा में यूटीआई यानी यूरिनरी ट्रेक्ट इन्फेक्शन्स कहा जाता है।

यूटीआई आमतौर पर ई. कोलाई जैसे आंत बैक्टीरिया के कारण होता है, जो मूत्रमार्ग में प्रवेश करते हैं। ये न केवल मूत्राशय, बल्कि गुर्दे को भी प्रभावित करते हैं। ताइवान में बौद्ध टीजू ची मेडिकल फाउंडेशन का यह अध्ययन ‘जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट’ मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने पाया कि मांसाहारियों की तुलना में शाकाहारियों में यूटीआई का जोखिम 16 प्रतिशत कम था। यही नहीं, महिलाओं की तुलना में पुरुषों में यह फायदा अधिक देखा गया।

पोल्ट्री और सूअर के मांस को ई. कोलाई का स्रोत माना गया है तथा इसी ई. कोलाई के कारण यूरिन का इन्फेक्शन होता है। शाकाहारी लोग इन खाद्य पदार्थों से दूर रहते हैं, इसलिए ई. कोलाई से भी बचे रहते हैं।

एम्स की डॉ. वीके राजलक्ष्मी के अनुसार, बच्चों की तुलना में वयस्कों में यह बीमारी अधिक होती है। वहीं पुरुषों की तुलना में महिलाओं और लड़कियों में इसकी आशंका अधिक रहती है। हालांकि, इसके पीछे का कोई स्पष्ट कारण नहीं है, लेकिन अंगों की बनावट को इसका कारण माना जा सकता है।

इस बीमारी के कुछ बहुत सामान्य लक्षण हैं

जिन्हें समय रहते पहचान लिया जाए और इलाज लिया जाए तो बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है। बार-बार पेशाब आना, पेशाब करते समय जलन होना, पेशाब में खून आना, पेशाब करते समय पेट के निचले हिस्से में जलन होना इसके सामान्य लक्षण हैं।

युरिन इन्फेक्शन के कई कारण हो सकते हैं जैसे-

असुरक्षित यौन संबंध, अस्वच्छ रहने की आदत, पथरी, गर्भावस्था, एंटीबायोटिक दवाओं का अत्यधिक प्रयोग, मूत्राशय को पूरी तरह खाली न कर पाना आदि। साथ ही डायबिटीज, मोटापा, गर्भावस्था, आनुवंशिकता भी युरिन इंफेक्शन का कारण बन सकते हैं। पुरुषों में डायबिटीज या प्रोस्टेट के बढ़ने के कारण युरिन इन्फेक्शन होता है।

डॉक्टरों के मुताबिक

गुप्तांग शरीर का संवेदनशील हिस्सा होते हैं। साथ ही इनमें बाहरी संक्रमण का खतरा भी अधिक होता है। यदि यूरिन पास होने वाली ट्यूब यानी यूरेथरा की सही तरीके से सफाई ना की जाए तो संक्रमण फैलने खतरा बढ़ जाता है। कई मामलों में यह संक्रमण ब्लैडर तक पहुंच सकता है।

ब्लैडर में सूजन जैसी समस्या भी देखने को मिलती है। सलाह दी जाती है कि बाथटब के बजाय शॉवर या बाल्टी से नहाएं। बाथटब के कारण यह इन्फेक्शन फैल सकता है। यौन संबंध से पहले और बाद में साफ सफाई का ध्यान रखें। जिन लोगों में पथरी की शिकायत रहती है या किसी कारण से मू्त्र मार्ग की सर्जरी हुई है, उन्हें विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए। यदि समस्या लंबे समय से बनी हुई है और अपने-आप ठीक नहीं हो रही है तो डॉक्टर को दिखाएं।

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जानिए क्या है सफेद दाग या विटिलिगो, ऐसे कर सकते हैं बचाव

जानिए क्या है सफेद दाग या विटिलिगो, ऐसे कर सकते हैं बचाव…..

 

कई लोगों के शरीर में सफेद धब्बे दिखाई देते हैं। इन धब्बों को सफेद दाग या विटिलिगो कहते हैं। त्वचा में रंग बनने वाली कोशिकाएं खत्म होने के कारण यह सफेद दाग होते हैं। ये कोशिकाएं मेलेनोसाइट्स कहलाती हैं। ये सफेद दाग शरीर के विभिन्न स्थानों पर हो सकते हैं। यही वहीं मुंह और नाक के अंदर के ऊतक और आंखों तक इसका असर हो सकता है। इसमें त्वचा का रंग सफेद हो जाता है। ये वंशानुगत भी होती है। ये कोई बीमारी नहीं है, केवल विकार है और इसका सेहत पर कोई अन्य बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन मनोवैज्ञानिक रूप से इसके दुष्परिणाम हो सकते हैं। यह भावनात्मक रूप से परेशान करने वाली हो सकती है।

अभी तक डॉक्टर भी सटीक कारण नहीं बता पाए हैं, लेकिन आमतौर पर इन्हें कुछ वजहों से जोड़ा जाता है। यह एक ऐसा विकार है जिसमें इम्यून सिस्टम खुद रंग उत्पादन करने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देती है। थायराइड रोग या टाइप 1 डायबिटीज के प्रभाव के कारण होने वाली ऑटोइम्यून डिसीज के तौर पर इसे देखा जा सकता है। डॉक्टरों ने अन्य कारणों में सनबर्न, तनाव याइंडस्ट्रीयल केमिकल्स के संपर्क में आने को भी बताया है।

मुख्य लक्षण :

एम्स के डॉ. उमर अफरोज का कहना है कि इसके मुख्य लक्षण में त्वचा का रंग कुछ-कुछ जगहों पर फीका या सफेद पड़ जाना है। समय से पहले सिर के बाल, भौहें, पलकें, दाढ़ी के बालों का रंग उड़ जाता है या सफेद हो जाती है। रेटिना की अंदरूनी परत का रंग फीका पड़ जाता है। ज्यादातर मामलों में सफेद दाग बढ़ते रहते हैं और आखिर में पूरे शरीर में फैल जाते हैं। शरीर के सिर्फ एक हिस्से में या किसी एक भाग में सफेद दाग होने को सेगमेंटल विटिलिगो कहते हैं और यह कम उम्र में ही हो जाता है।

शरीर के एक हिस्से या सिर्फ कुछ ही हिस्सों में होने को स्थानीयकृत विटिलिगो कहते हैं। शरीर के कई हिस्सों में हुए सफेद दाग को सामान्यकृत विटिलिगो कहा जाता है। इसमें शरीर के किसी भी हिस्से से यह अन्य हिस्सों में फैलने लगता है। कई तरह से इस त्वचा के विकार से बचने की कोशिश कर सकते हैं। बेहतर होगा कि त्वचा को सूर्य की किरणों और अन्य यूवी लाइड्स से बचाएं। सन स्क्रीन पर्याप्त मात्रा में लगाएं। अगर सफेद दाग शरीर पर ज्यादा दिखने लगें तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

घरेलू उपाय :

विटिलिगो के शुरुआती लक्षणों को ठीक करने के लिए कुछ घरेलू उपाय अपना सकते हैं।

सफेद दाग हटाने के लिए लाल मिट्टी का मास्क, हल्दी और नारियल के तेल का इस्तेमाल हो सकता है।

घरेलू नुस्खों में तुलसी, नीम की पत्तियों का इस्तेमाल करें।

मूली के बीज भी फायदेमंद हो सकते है। मूली के बीज त्वचा की अशुद्धियों को साफ करते हैं और इसमें विटामिन बी, विटामिन सी, जिंक और फास्फोरस होता है जो सफेद दाग से छुटकारा दिलाने में मदद करते हैं। सफेद दाग को रोकने के लिए अखरोट और अंजीर, एलोवेरा और अदरक का प्रयोग कर सकते हैं।

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कोरोना वायरस को लेकर वायरल हैं ये 5 भ्रम,जानें क्या है सच्चाई………

कोरोना वायरस को लेकर वायरल हैं ये 5 भ्रम,जानें क्या है सच्चाई….

 

चीन के वुहान शहर से शुरू हुए कोरोना वायरस का कहर अब दुनियाभर में अपना ताडंव मचा रहा है। कोरोना वायरस (COVID -19) का संक्रमण चीन के बाद ईरान, हांगकांग, जापान, इटली के बाद अब भारत में भी लोगों को संक्रमित करने की फिराक में है। हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारत में कोरोना वायरस से हुए संक्रमण के मामलों की पुष्टि की है। जिसके बाद भारत में भी कोरोना वायरस का खौफ लोगों के चेहरों पर देखा जा सकता है। ऐसें में इस संक्रमण से जुड़े कुछ भ्रम भी लोगों के बीच तेजी से वायरल हो रहे हैं। जिनका हकीकत से कोई वासता नहीं है। जानते हैं आखिर क्या हैं लोगों के बीच फैले ये भम्र जिनका इस बीमारी से कोई लेना देना नहीं है। ।

ये हैं वो 5 चीजें जो COVID -19 के संक्रमण को रोक या ठीक नहीं कर सकती हैं।

1-लहसुन खाने से दूर होगा कोरोना-

लहसुन एक हेल्दी फूड है जिसमें कुछ एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं। लेकिन इसके द्वारा कोरोना वायरस से नहीं बचा जा सकता है। WHO का यह ग्राफिक इसका प्रमाण है।

2-तिल का तेल शरीर में कोरोनावायरस के संक्रमण को प्रवेश करने से रोक सकता है-

बात जब सेहत की होती है तो तिल का तेल कई तरह से शरीर के लिए फायदेमंद होता है। लेकिन बात जब कोरोना वायरस की होती है तो COVID-19 पर इसका कोई असर नहीं होता है। गौर करने वाली बात यह है कि अब तक कोरोना का कोई ठोस इलाज डॉक्टरों के पास मौजूद ही नहीं है। WHO की मानें तो इस वायरस का इलाज जून 2020 तक ही मिलना संभव है।

3-एंटीबॉयोटिक से कोरोना की रोकथाम संभव-

भले ही एंटीबॉयोटिक बैक्टीरिया को रोकने में मदद करते हैं लेकिन कोरोना वायरस पर ये भी बेअसर हो चुके हैं। एंटीबायोटिक्स की मदद से आप कोरोनावायरस को रोक सकते हैं यह धारणा पूरी तरह से एक मिथ है।ऐसा इसलिए क्‍योंक‍ि कोराना वायरस की दवा डॉक्टर अभी तक नहीं खोज पाए हैं।

4-गोमूत्र से होगा कोरोना का खात्मा-

असम से भाजपा विधायक सुमन हरिप्रिया के अनुसार गोमूत्र से कोरोना का निश्चित रूप से इलजा संभव हो सकता है। खबरों की मानें तो विधायक जी ने हाल ही में असम विधानसभा में कोरोना पर एक टिप्पणी करते हुए कहा, कोरोनावायरस एक हवा से होने वाली बीमारी है जिसे गौमूत्र और गाय के गोबर का इस्तेमाल करके ठीक किया जा सकता है। अगर गोमूत्र से इस संकम्रण को रोका जा सकता तो दुनियाभर के वैज्ञानिक इस वायरस को कोरने के लिए वैक्सीन नहीं खोज रहे होते। विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो कोरोनावायरस का इलाज करने के लिए अब तक कोई विशिष्ट दवाएं बाजार में उपलब्ध नहीं हैं।

5-मानसिक रूप से फिट व्यक्ति को नहीं हो सकता कोरोना वायरस-

अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं जो यह मानते हैं कि मानसिक रूप से फिट व्यक्ति को कोरोना वायरस नहीं घेर सकता है तो आप गलत है। कल शाम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक संवाददाता सम्मेलन में सीओवीआईडी ​​-19 संक्रमण को रोकने के लिए योग के माध्यम से मानसिक बीमारियों पर काबू पाने की सलाह दी। योग व्यक्ति को रोग-मुक्त जीवन जीने में मदद कर सकता है, लेकिन कोरोना का इलाज इससे पूरी तरह कर पाना संभव नहीं है। कोरोनोवायरस के संक्रमण को रोकने का एकमात्र तरीका इस वायरस के संपर्क में आने से खुद को रोकना है।

कोरोना से ऐसे करें खुद का बचाव-

-हाथों को बार-बार धोएं। इसके अलावा खुद को कीटाणुओं से बचाए रखने के लिए सेनिटाइजर का प्रयोग करें।

-भीड़भाड़ में जाने से पहले मास्क का प्रयोग करें।

-अगर आप नॉन वेजिटेरियन हैं तो साफ-सफाई देखकर खाएं या फिर घर पर ही बनाकर खाएं।

-अगर आपके घर में पालतू जानवर हैं तो उन्हें सारे टीके लगवाकर रखें।

-खांसी-जुकाम होने पर घरेलू नुस्खों की जगह डॉक्टर को दिखाएं।

-जिन लोगों को सर्दी-जुकाम और खांसी है उनसे दूरी बनाए रखें।

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काली मिर्च, कई बीमारियों को साधने में करती है मदद…….

काली मिर्च में होता है पेपराइन, जो सुधारता है पाचन, कई बीमारियों को साधने में करती है मदद……

 

गरम मसालों में इस्तेमाल की जाने वाली काली मिर्च, जिसे ‘क्वीन ऑफ स्पाइस’ भी कहा जाता है, वह कई औषधियों से भी भरपूर है। खाने में स्वाद बढ़ाने वाली काली मिर्च को कई तरह की सब्जियों में डालकर खाया जाता है, लेकिन इसके औषधीय गुण हैरान कर देने वाले हैं। इसमें कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, कैरोटिन के अलावा और भी कई पोषक तत्व होते हैं। काली मिर्च में पेपराइन नामक रसायन होता है। इसी के कारण तीखा स्वाद आता है। पेपराइन पाचन सुधारता है।

आयुर्वेद के अनुसार काली मिर्च को खाने से सिर्फ 7 दिनों में ही कई रोग ठीक किए जा सकते हैं, लेकिन इसका फायदा खाली पेट खाने से अधिक होता है। काली मिर्च की तासीर गर्म होने की वजह से इसका इस्तेमाल ज्यादातर सर्दियों के मौसम में किया जाता है, लेकिन चमत्कारी गुणों के कारण इसका उपयोग कभी भी किया जा सकता है। तो आइए जानते हैं कि काली मिर्च कौन सी बीमारियों को साधा जा सकता है।

सर्दी जुकाम में लाभदायक

काली मिर्च की तासीर गर्म होने की वजह से इसके सेवन से सर्दी-जुकाम की समस्या जल्दी दूर हो जाती है। चाय में काली मिर्च डालकर पीने से भी सर्दी जल्दी ठीक होती है। साथ ही चाय भी जायकेदार हो जाती है।

एसिडिटी और गैस की समस्या से छुटकारा

जिन लोगों को अधिकतर गैस और एसिडिटी की समस्या होती है उन्हे नींबू के रस में काला नमक और काली मिर्च मिलाकर आधा चम्मच खाने से आराम मिलता है।

दांत और मसूड़ों की समस्या का इलाज

काली मिर्च से मसूड़ों के दर्द की समस्या दूर हो जाती है, इसके लिए काली मिर्च, माजूफल और सेंधा नमक को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें और इसमें कुछ बूंद सरसों के तेल की मिलाकर इस चूर्ण को दांत और मसूड़ों में लगाएं और आधे घंटे बाद धो लें, इससे दांत और मसूड़ों के दर्द की समस्या में राहत मिलेगी।

पेट में कीड़ों की समस्या होगी दूर

काली मिर्च का इस्तेमाल पेट के कीड़ों को दूर करने का एक बेहतर इलाज है। पेट में कीड़ों की समस्या को दूर करने के लिए काली मिर्च के पाउडर के साथ किश्मिश खाने से पेट के कीड़े दूर हो जाते हैं।

ऐसे दूर हो जाता है तनाव

काली मिर्च तनाव दूर करने में भी सहायक होती है, क्योंकि इसमें पिपराइन और एंटीडिप्रेसेंट के गुण होते हैं। जिन लोगों को डिप्रेशन की समस्या है, उनके लिए काली मिर्च काफी लाभकारी होती है।

कैंसर से बचाने में सहायक

काली मिर्च में विटामिन सी, विटामिन ए, फ्लेवोनॉयड और एंटीऑक्सीडेंट के साथ और भी कई तत्व मौजूद होते हैं, जो कैंसर से लड़ने में मददगार होते हैं। काली मिर्च के सेवन से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा भी कम होता है।

वजन कम करने का कारगर इलाज

रोज सुबह गर्म पानी में काली मिर्च, हल्दी, अदरक और नींबू का रस मिलाकर पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ता है, जो वजन कम करने में सहायक होता है हाल ही में हुए शोध से पता चला है कि काली मिर्च के साथ हल्दी का सेवन काफी लाभप्रद होता है क्योंकि हल्दी में करक्यूमिन नामक तत्व होता है, जो कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है। काली मिर्च में मौजूद पिपराइन करक्यूमिन के लिए उत्प्रेरक का काम करता है।

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‘अमृत’ है गाय का घी, ठंडे पानी में 100 बार फेंटने पर बनती है ऐसी औषधि….

‘अमृत’ है गाय का घी, ठंडे पानी में 100 बार फेंटने पर बनती है ऐसी औषधि……….

 

आज लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर काफी सजग हो गए हैं, क्योंकि व्यस्त जीवनशैली में सबका खान-पान, रहन-सहन ठीक नही हो पाता है। इसी वजह से अधिकतर लोग कई बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। इसलिए अपनी सेहत को देखते हुए ज्यादातर लोग कम घी और तेल वाला खाना खाते हैं, क्योंकि घी और तेल में वसा की मात्रा अधिक होती है जो कि बीमारियों की सबसे बड़ी जड़ मानी जाती है। डॉ. लक्ष्मीदत्ता शुक्ला के अनुसार, घी से पाचन सुधरता है और यह वजन घटाने में सहायक होता है।

घी का इस्तेमाल दिल के मरीजों के लिए वर्जित माना जाता है, लेकिन यह जानकर हैरानी होगी कि गाय के घी से दिल के मरीजों का भी स्वास्थ्य ठीक किया जा सकता है। क्योंकि इसमें वसा की मात्रा बहुत ही कम होती है। स्वास्थ्य के लिए गाय का घी ‘अमृत’ के समान है। इसके अलावा गाय के घी से हर तरह के रोग ठीक हो सकते हैं, क्योंकि देसी गाय के घी में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं।

कई शोधों में निष्कर्ष निकला है कि गाय के घी से हवन किया जाए तो उससे लगभग 1 टन ऑक्सीजन निकलती है। तो आइए देसी गाय के घी के गुणकारी उपयोगों के बारे में जानते हैं –

मेटाबॉलिज्म को रखे संतुलित

गाय के घी में फैट एसिड कम होता है, जिससे खाना जल्दी पच जाता है। गाय के घी से मेटाबॉल्जिम संतुलित रहता है और इससे मोटापा भी कम होता है। मेटाबॉलिज्म का कार्य है शरीर की वसा को ऊर्जा में परिवर्तित करना।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का कार्य

कैल्शियम शरीर के ब्लड सेल्स को नुकसान न पहुंचाए, इसलिए गाय के घी में मौजूद K-2 तत्व इसे रोकने का काम करता है, जिससे रक्त संचार भी ठीक तरह से होता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। यही कारण है कि स्वस्थ रहने के लिए हमेशा दूध पीने की सलाह दी जाती है। वहीं रोगियों को भी जल्द स्वस्थ होने के लिए दूध दिया जाता है, क्योंकि इससे उनका इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।

माइग्रेन, एलर्जी व नाक की समस्या का इलाज

गाय का घी सिरदर्द की समस्या को दूर करने का सबसे बढ़िया इलाज है। इसके लिए दो बूंद गाय का घी नाक में रोज सुबह-शाम डालने से माइग्रेन की समस्या ठीक हो जाती है और यही इलाज एलर्जी और नाक की खुश्की की समस्या दूर करने में भी किया जाता है। साथ ही बाल झड़ना भी कम हो जाता है।

शारीरिक और मानसिक क्षमता में इजाफा

गाय के घी की नियमित मालिश से शारीरिक और मानसिक ताकत बढ़ती है और यदि पुराने घी से बच्चों की छाती व पीठ पर मालिश की जाए तो उनकी सर्दी भी जल्दी ठीक हो जाती है और अत्यधिक कमजोरी लगने पर एक गिलास दूध में एक चम्मच गाय का घी डालकर पीने से ऊर्जा मिलती है। डॉ. लक्ष्मीदत्ता शुक्ला के अनुसार, घी का सेवन शरीर में ऊर्जा बनाए रखता है।

स्तन और आंत के कैंसर से बचाव

गाय के घी में ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो कैंसर से लड़ने की क्षमता रखते हैं और कैंसर को फैलने से भी रोकते हैं, इसलिए आंत के कैंसर और महिलाओं में स्तन कैंसर की आशंका गाय के घी के नियमित सेवन से कम होती है।

आंखों की रोशनी बढ़ाता है

आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी गाय का घी काफी लाभप्रद माना जाता है। एक चम्मच गाय के घी में एक चम्मच शक्कर और एक चुटकी पिसी हुई काली मिर्च मिलाकर दूध के साथ खाली पेट सुबह-शाम खाने से आंखों की ज्योति बढ़ती है।

त्वचा के लिए सर्वोत्तम औषधि

ठंडे पानी में गाय का घी सौ बार फेंटने से यह औषधी का रूप ले लेता है, जिसे त्वचा पर लगाने से चर्म रोग की बीमारियां ठीक की जा सकती हैं और साथ भी चेहरे की चमक बढ़ाने में भी गाय का घी उत्तम माना जाता है।

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