अगर आप को है cevical की प्रॉब्लम तो यहाँ होता है cervical का इलाज़ बह वी मुफ्त,ਜਿਸਦਾ Cervical ਠੀਕ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਉਹ ਦੁਖੀ ਇੱਥੇ ਪਹੁੰਚਦੈ, ਬਾਬਾ ਪੈਸਾ ਵੀ ਨਹੀਂ ਕੋਈ ਲੈਂਦਾ….

अगर आप को है cevical की प्रॉब्लम तो यहाँ होता है cervical का इलाज़ बह वी मुफ्त,ਜਿਸਦਾ Cervical ਠੀਕ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਉਹ ਦੁਖੀ ਇੱਥੇ ਪਹੁੰਚਦੈ, ਬਾਬਾ ਪੈਸਾ ਵੀ ਨਹੀਂ ਕੋਈ ਲੈਂਦਾ….

 

 

पंजाब मे लुधियाना के पास डेहलों शहर में एक गाऊ है जिसका नाम है नंगल यहा पर एक बाबा जी जिनका नाम है दर्शन सिंह बह करता है cevical का इलाज बिल्कुल फ्री

विडियो जरुर देखे :-


यह पड़ता हा पंजाब मे जब हम जाते है लुधियाना से मालेरकोटला रोड पर से तब टोल प्लाजा के पास से बहा जाने का रास्ता है अगर आप cervical का इलाज करवा कर टूट चुके है और डॉक्टर के चकर से आप को पाना है छुटकारा तो एक बार बहा पर जरुर जाए और पाए इस बीमारी से मुक्ति .

ਪੰਜਾਬ ਚ ਲੁਧਿਆਣਾ ਦੇ ਕੋਲ ਡੇਹਲੋਂ ਤਹਿਸੀਲ ਦਾ ਪਿੰਡ ਨੰਗਲ ਜਿਥੇ ਹੁੰਦਾ cervical ਦਾ ਇਲਾਜ਼ ਓਹ ਵੀ ਬਿਲਕੁਲ ਮੁਫ਼ਤ ਇਹ ਇਲਾਜ਼ ਕਰਦੇ ਹਨ ਬਾਬਾ ਦਰਸ਼ਨ ਸਿੰਘ .ਜਿਥੇ ਮਰੀਜਾ ਦੀ ਬਹੁਤ ਜਿਆਦਾ ਭੀੜ ਲਗੀ ਰਹਦੀ ਹੈ ਜਿਥੇ ਦੂਰ ਦੂਰ ਤੋ ਲੋਕ ਆਕੇ ਕਰਵਾਦੇ ਹਨ cervical ਦਾ ਇਲਾਜ਼ ਜੋ ਲੋਕ ਡਾਕਟਰ ਦੇ ਗੇਰੇ ਮਾਰ ਕੇ ਥਕ ਚੁਕੇ ਹਨ ਓਹ ਇਕ ਵਾਰ ਜਰੁਰ ਜਾ ਕੇ ਦੇਖਣ ਤੇ ਆਪਣੀ ਇਸ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋ ਛੁਟਕਾਰਾ ਪਾਉਣ

ਸਰਵਾਇਕਲ ਦਾ ਮੁਫਤ ਇਲਾਜ ਹੱਥਹੋਲੇ ਨਾਲ

ਵੀਡਿਓ ਦੇਖੇ :-


Free treatment of Servical

Village – NANGAL

TEHSIL – DEHLON

District – LUDHIANA
PUNJAB

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रोजना 1 अखरोट खाने से होते है ये 30 अद्भुत फायदे, स्वस्थ रहना है तो अखरोट खाओ

रोजना 1 अखरोट खाने से होते है ये 30 अद्भुत फायदे, स्वस्थ रहना है तो अखरोट खाओ……….

 

अखरोट (walnut)

हमारे जीवन के आसपास बहुत सी चीजे विद्धमान है लेकिन जब तक हम उसके गुण और प्रभाव से अनभिग्य है तब तक उसका लाभ नहीं उठा पाते है जी हाँ-हम अखरोट (Walnut) की बात कर रहें है ये अखरोट भी हमारे लिए बहुत ही फायदे मंद है इसकी दो जातियां पाई जाती हैं जंगली अखरोट 100 से 200 फीट तक ऊंचाई पर अपने आप उगते हैं और इसके फल का छिलका मोटा होता है। लेकिन कृषिजन्य अखरोट (Walnut) का पेड़ 40 से 90 फुट तक ऊंचा होता है और इसके फलों का छिलका पतला होता है इसे हम कागजी अखरोट कहते हैं पर्वतीय देशों में होने वाले पीलू को ही अखरोट कहते हैं इसका नाम कर्पपाल भी है और इसके पेड़ अफगानिस्तान में बहुत होते हैं तथा फूल सफेद रंग के छोटे-छोटे और गुच्छेदार होते हैं पत्ते गोल लम्बे और कुछ मोटे होते हैं तथा फल गोल-गोल मैनफल के समान परन्तु अत्यंत कड़े छिलके वाले होते हैं इसकी मींगी मीठी बादाम के समान पुष्टकारक और मजेदार होती है।

अखरोट (Walnut) की तुलना चिलगोजा और चिरौंजी से की जा सकती है अखरोट गरम व खुष्क प्रकृति का होता है अखरोट पित्त प्रकृति वालों के लिए हानिकारक होता है अनार का पानी अखरोट के दोषों को दूर करता है।

अखरोट बहुत ही बलवर्धक है हृदय को कोमल करता है हृदय और मस्तिष्क को पुष्ट करके उत्साही बनाता है इसकी भुनी हुई गिरी सर्दी से उत्पन्न खांसी में लाभदायक है और यह वात, पित्त, टी.बी, हृदय रोग, रुधिर दोष वात, रक्त और जलन को नाश करता है आप अखरोट का सेवन 10 ग्राम से 20 ग्राम तक की मात्रा में कर सकते हैं।

अखरोट के 30 अद्भुत फायदे

अगर आपको पथरी की शिकायत है तो साबुत (छिलके और गिरी सहित) अखरोट को कूट-छानकर एक चम्मच सुबह-शाम ठंडे पानी में कुछ दिनों तक नियमित रूप से सेवन कराने से पथरी मूत्र-मार्ग से बाहर निकल जाती है।

अखरोट को छिलके समेत पीसकर चूर्ण बनाकर रखें एक-एक चम्मच चूर्ण ठंडे पानी के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम खायें इससे पेड़ू का दर्द और पथरी दोनों ठीक होती है।

जिन लोगों को फुन्सियां अधिक निकलती हो तो एक साल तक रोजाना प्रतिदिन सुबह के समय 5 अखरोट सेवन करते रहने से हमेशा के लिए लाभ हो जाता है।

जिन लोगों को टी.बी. रोग की शिकायत है तो इस के लिए तीन अखरोट और 5 कली लहसुन पीसकर एक चम्मच गाय के घी में भूनकर सेवन कराने से टी.बी. में लाभ होता है।

जिन माँ में दूध की कमी होती है तो गेहूं की सूजी एक ग्राम, अखरोट के पत्ते 10 ग्राम को एक साथ पीसकर दोनों को मिलाकर गाय के घी में पूरी बनाकर सात दिन तक खाने से माँ के दूध की वृद्धि होती है।

खांसी होने पर अखरोट गिरी को भूनकर चबाने से लाभ होता है छिलके सहित अखरोट को आग में डालकर राख बना लें और इस राख की एक ग्राम मात्रा को पांच ग्राम शहद के साथ चटाने से भी लाभ होता है।

बवासीर होने पर-वादी बवासीर में अखरोट के तेल की पिचकारी को गुदा में लगाने से सूजन कम होकर पीड़ा मिट जाती है तथा अखरोट के छिलके की राख दो से तीन ग्राम को किसी दस्तावर औषधि के साथ सुबह,दोपहर तथा शाम को खिलाने से खूनी बवासीर में खून का आना बंद हो जाता है।

मासि-क धर्म की रुकावट में अखरोट के छिलके का काढ़ा 40 से 60 मिलीलीटर की मात्रा में लेकर दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन-चार बार पिलाने से अदभुत लाभ होता है।

जिसका मासि-क धर्म बंद हो तो अखरोट का छिलका, मूली के बीज, गाजर के बीज, वायविडंग, अमलतास, केलवार का गूदा सभी को 6-6 ग्राम की मात्रा में लेकर लगभग 2 लीटर पानी में पकायें फिर इसमें 250 ग्राम की मात्रा में गुड़ मिला दें और जब यह 500 मिलीलीटर की मात्रा में रह जाए तो इसे उतारकर छान लेते हैं फिर इसे सुबह-शाम लगभग 50 ग्राम की मात्रा में मासि-क स्राव होने के एक हफ्ते पहले पिलाने से बंद हुआ मासि-क धर्म खुल जाता है।

सुबह खाली पेट 5 ग्राम अखरोट की गिरी और 5 ग्राम पिसी हुई सोंठ को एक चम्मच एरंड के तेल में पीसकर गुनगुने पानी से लें। इससे रोगी के घुटनों का दर्द दूर हो जाता है तथा घुटने दर्द को दूर करने के लिए अखरोट का तेल जोड़ों पर लगाने से रोगी को लाभ मिलता है अखरोट का तेल आपको किसी भी आयुर्वेद दवा बेचने वाले पंसारी से मिल जाएगा।

अखरोट को गर्म दूध के साथ सेवन करने से बच्चों के पेट में मौजूद कीड़े मर जाते हैं तथा पेट के दर्द में आराम देता है। कुछ दिनों तक शाम को दो अखरोट खिलाकर ऊपर से दूध पिलाने से बच्चों के पेट के कीडे़ मल के साथ बाहर निकल जाते हैं अखरोट की छाल का काढ़ा 60 से 80 मिलीलीटर पिलाने से आंतों के कीड़े मर जाते हैं।

हृदय की दुर्बलता होने पर अखरोट खाने से दिल स्वस्थ बना रहता है रोज एक अखरोट खाने से हृदय के विकार 50 प्रतिशत तक कम हो जाते हैं और इससे हृदय की धमनियों को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक कॉलेस्ट्राल की मात्रा नियंत्रित रहती है इस अखरोट के असर से शरीर में वसा को पचाने वाला तंत्र कुछ इस कदर काम करता है कि हानिकारक कॉलेस्ट्राल की मात्रा कम हो जाती है हालांकि रक्त में वसा की कुल मात्रा में कोई परिवर्तन नहीं होता है लेकिन अखरोट में कैलोरी की अधिकता होने के बावजूद इसके सेवन से वजन नहीं बढ़ता और ऊर्जा स्तर बढ़ता है।

हमारे शरीर का कोई अंग जिस आकार का होता है ठीक उसी आकार का फल खाने से उस अंग को मजबूती मिलती है चूँकि अखरोट की बनावट हमारे दिमाग की तरह होती है इसलिए अखरोट खाने से दिमाग की शक्ति बढ़ती है तथा याददाश्त मजबूत होती है अखरोट की गिरी को 25 से 50 ग्राम तक की मात्रा में प्रतिदिन खाने से मस्तिष्क शीघ्र ही सबल हो जाता है अखरोट खाने से मस्तिष्क की शक्ति बढ़ती है।

कुछ बच्चों को बिस्तर में पेशाब करने की शिकायत हो जाती है ऐसे बाल रोगियों को दो अखरोट और 20 किशमिश प्रतिदिन दो सप्ताह तक सेवन करने से यह शिकायत दूर हो जाती है।

आठ अखरोट की गिरी और चार बादाम की गिरी और दस मुनक्का को रोजाना सुबह के समय खाकर ऊपर से दूध पीने से वृद्धावस्था की निर्बलता भी दूर हो जाती है।

दो अखरोट और तीन हरड़ की गुठली को जलाकर उनकी भस्म के साथ चार कालीमिर्च को पीसकर अंजन करने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।

अखरोट की छाल को मुंह में रखकर चबाने से दांत स्वच्छ होते हैं तथा अखरोट के छिलकों की भस्म से मंजन करने से दांत मजबूत होते हैं।

अखरोट की गिरी 50 ग्राम,छुहारे 40 ग्राम और बिनौले की मींगी 10 ग्राम एक साथ कूटकर थोड़े से घी में भूनकर बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर रखें अब इसमें से 25 ग्राम प्रतिदिन सेवन करने से प्रमेह में लाभ होता है बस ध्यान रहे कि इसके सेवन के समय दूध न पीयें।

अखरोट का 10 से 40 मिलीलीटर तेल 250 मिलीलीटर गौमूत्र मिलाकर पिलाने से सभी प्रकार की सूजन में लाभ होता है वात-जन्य सूजन में इसकी 10 से 20 ग्राम अखरोट की गिरी को कांजी में पीसकर लेप करने से लाभ होता है।

सुबह-सुबह बिना मंजन कुल्ला किए बिना 5 से 10 ग्राम अखरोट की गिरी को मुंह में चबाकर लेप करने से कुछ ही दिनों में दाद मिट जाती है।

अखरोट को पीसकर पानी के साथ मिलाकर नाभि पर लेप करने से पेट में मरोड़ और दस्त का होना बंद हो जाता है तथा अखरोट के छिलकों को पानी के साथ पीसकर पेट की नाभि पर लगाने से पेट में होने वाली मरोड़ के साथ आने वाले दस्त तुरंत बंद हो जाते हैं।

जिन लोगों को लकवे की शिकायत है रोगी को रोजाना सुबह अखरोट का तेल नाक के छिद्रों में डालने से लकवा ठीक हो जाता है और अखरोट के निरन्तर सेवन से सफेद दाग भी ठीक हो जाते हैं तथा रोजाना अखरोट खाने से श्वेत कुष्ठ सफेद दाग का रोग नहीं होता है।

अखरोट के तेल को 20 से 40 मिलीलीटर की मात्रा में 250 मिलीलीटर दूध के साथ सुबह देने से मल मुलायम होकर बाहर निकल जाता है।

किसी भी कारण या चोट के कारण हुए सूजन पर अखरोट के पेड़ की छाल पीसकर लेप करने से सूजन कम होती है।

हिस्टीरिया में अखरोट और किसमिस को खाने और ऊपर से गर्म गाय का दूध पीने से लाभ मिलता है।

अखरोट की मिंगी(बीज)को लगातार खाने से होठ या त्वचा के फटने की शिकायत दूर हो जाती है।

वात रोग में अखरोट की 10 से 20 ग्राम की ताजी गिरी को पीसकर दर्द वाले स्थान पर लेप करें तथा ईंट को गर्मकर उस पर जल छिड़ककर कपड़ा लपेटकर उस स्थान पर सेंक देने से शीघ्र पीड़ा मिट जाती है लेकिन गठिया पर इसकी गिरी को नियमपूर्वक सेवन करने से रक्त शुद्धि होकर लाभ होता है।

यदि नासूर है तो अखरोट की 10 ग्राम गिरी को महीन पीसकर मोम या मीठे तेल के साथ गलाकर लेप करें।

अखरोट के पत्तों का काढ़ा 40 से 60 मिलीलीटर पीने से व उसी काढ़े से गांठों को धोने से कंठमाला मिटती है।

अखरोट की छाल को पीसकर लेप करने से नाड़ी की सूजन,जलन व दर्द मिटता है।

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सिर्फ़ 2 बार अनार का उपयोग इस तरह कर किया तो बवासीर का जड़ से सफ़ाया हो सकता है

सिर्फ़ 2 बार अनार का उपयोग इस तरह कर किया तो बवासीर का जड़ से सफ़ाया हो सकता है……….

 

अनार के सेवन से शरीर में खून की कमी दूर हो जाती है, यह पेट को नरम करता है, मूत्र लाता है, हृदय के लिए लाभदायक होता है। प्यास को खत्म करता है। धातु को पुष्ट करता है, शरीर के प्रत्येक अंग का पोषण करता है।

वैज्ञानिक मतानुसार अनारदाने में आद्रता 78 प्रतिशत, कार्बोहाईट्रेट 14.5 प्रतिशत, प्रोटीन 1.6 प्रतिशत, वसा 0.1 प्रतिशत होती है। इसके अलावा फास्फोरस, कैल्शियम, सोडियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, आक्जैलिक अम्ल, तांबा, लोहा, गंधक, टेनिन, शर्करा, विटामिन्स होते हैं।

फल की छाल में 25 प्रतिशत, तने के गूदे में 25 प्रतिशत तक, पत्तियों में 11 प्रतिशत और जड़ की छाल में 28 प्रतिशत टैनिन होता है।

यह विभिन्न रोगों में उपयोगी होता है। अनारदाना का बारीक चूर्ण स्वादिष्ट, भोजन पचाने वाला और भूख बढ़ाने वाला होता है

pomegranates on a white background

अनार से कैसे करे घरेलु उपाए

खूनी बवासीर में सुबह-शाम अनार के पिसे छिलके के चूर्ण को 8 ग्राम की मात्रा में ताजे पानी से फंकी लेना चाहिए। इससे खूनी बवासीर नष्ट हो जाता है।

12 ग्राम अनार के फल के छिलके का चूर्ण समान मात्रा में चीनी के साथ दिन में 2 बार दें। इससे खूनी बवासीर में लाभ मिलता है।

10 मिलीलीटर अनार के रस को मिसरी के साथ दिन में सुबह-शाम 2 बार लेना चाहिए। इससे खूनी बवासीर नष्ट हो जाती है।

10 ग्राम अनार के सूखे छिलकों के चूर्ण को बराबर मात्रा में बूरा मिलाकर दिन में 2 बार लेना चाहिए। इससे खूनी बवासीर नष्ट हो जाती है।

मीठे अनार का छिलका शीतल तथा खट्टे फल का छिलका शीतल रूक्ष होता है इसलिए यह अर्श (बवासीर) के लिए विशेष उपयोगी होता है।

अनार की जड़ के 100 मिलीलीटर काढे़ में 5 ग्राम सोंठ का चूर्ण मिलाकर दिन में 2-3 बार पीने से रक्तार्श यानी खूनी बवासीर में लाभ होता है।

अनार के पत्तों का लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग रस सुबह-शाम पीने से खूनी बवासीर में लाभ होता है।

अनार के 8-10 पत्तों को पीसकर टिकिया बनाकर गर्म घी में भूनकर बांधने से अर्श (बवासीर) के मस्सों में लाभ होता है।

सावधान

सभी प्रकार के अनार शीत प्रकृति वालों के लिए हानिकारक होते हैं। मीठा अनार बुखार वालों को, खट्टा और फीका अनार सर्द मिजाज वालों के लिए हानिकारक हो सकता है।

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सुबह खाली पेट इस पानी को भीगे हुए बीजों के साथ सेवन करने से गठिया और जोड़ो का दर्द ख़त्म हो जाता है, बुढ़ापे में ही घुटने चिकने रहेंगे

सुबह खाली पेट इस पानी को भीगे हुए बीजों के साथ सेवन करने से गठिया और जोड़ो का दर्द ख़त्म हो जाता है, बुढ़ापे में ही घुटने चिकने रहेंगे………

 

जैसे-जैसे उम्र बढ़ने के साथ अक्सर लोगो को घुटनों और जोड़ों का दर्द होने लगता है जो गठिया का लक्षण (Arthritis symptoms) भी हो सकता है।

गठिया की वजह यूरिक एसिड को माना जाता है, शरीर में uric acid की मात्रा बढ़ जाने पर इसके कण घुटनों और अन्य जोड़ों में जमा होने लगते है जिस वजह से जोड़ो में दर्द होने लगता है। कई बार ये दर्द इतना असहनीय होता है की व्यक्ति का बुरा हाल हो जाता है।

गठिया की बीमारी हो तो रात के समय जोड़ो का दर्द बढ़ जाता है और सुबह अकड़न होती है। अगर आपके घुटनो में दर्द रहता है तो सही समय पर इसकी जाँच करवाना जरुरी है, अगर ये गठिया का रोग है तो तुरंत इसका इलाज करना चाहिए नही तो इससे जोड़ो को नुकसान भी हो सकता है।

इस लेख के माध्यम से हम जोडों और घुटने के दर्द से राहत पाने के घरेलू नुस्खे और आयुर्वेदिक उपचार के आसान तरीके बता रहे है। इन देसी उपायों के प्रयोग से आप गठिया जैसी बीमारी से भी छुटकारा पा सकते है।गठिया का घेरलू और रामबाण इलाज :

चुना :

गेहूँ के दाने के बराबर मात्रा में चुना हर रोज सुबह खाली पेट 1 कप दही में या पानी मे मिला कर 3 महीने तक लगातार खाने से कैसा भी गठिया हो ठीक हो जाता है। जिन लोगों को पथरी की समस्या हो वो चुने का सेवन ना करे।

दालचीनी और शहद :

एक चम्मच दालचीनी पाउडर और दो चम्मच शहद दिन में 2 बार 1 गिलास गुनगुने पानी के साथ पिए। जिन लोगों को गठिया के कारण चलने फिरने में मुश्किल होती है उन्हें 30 दिनों के प्रयोग में ही काफी pain relief मिलने लगेगा।

तिल : 1/4 कप पानी में तिल को रातभर भिगोकर रख दें। सुबह खाली पेट इस पानी को भीगे हुए बीजों के साथ ही पी लें। यह उपचार जोड़ों के दर्द में अत्यंत लाभकारी होता है।

केला :

केला विटामिन B का मुख्य स्रोत है और विटामिन B गठिया के उपचार में असरदार माना जा चुका है। गठिया के रोगी को उपचार के लिए 3-4 दिन तक रोजाना सिर्फ केला खिलाया जाता है। इसमें एक दिन में रोगी 7-8 केले रोजाना खाता है।

आलू :

कच्चे आलू का जूस गठिया के उपचार में सबसे कारगर है। यह सदियों से किया जाने वाला देसी उपचार है। आलू के जूस को निकालने के लिए उसे बिना छीले ही पतले-पतले टुकड़ों में काट लें। इसके बाद इन टुकड़ों को पानी से भरे एक बड़े ग्लास में रात भर के लिए ढककर रख दें। सुबह खाली पेट इस पानी का सेवन करें। निश्चित लाभ मिलेगा।

मूंग की दाल :

मूंग की दाल का सूप जोड़ों के दर्द में सीधा फायदा पहुंचाता है। इसे तैयार करने के लिए एक चम्मच मूंग की दाल को लहसुन की दो कलियों और एक कप पानी में मिलाया जाता है। इसे दिन में दो बार लेने से जल्द राहत मिलेगी।

करेला, सहजन और नीम :

करेला, सहजन की फलियां और नीम के फूल गठिया के इलाज में काफी कारगर होते हैं। इनकी सब्जी बनाकर खाएं। कोशिश करें कि इसे बहुत भुनें नहीं और अगर अधकची सब्जी हो, तो ज्यादा असरदार होगी।

किन बातों का रखे ख्याल :

दिन की शुरुआत हलके फुल्के योगा से करे। सुबह के समय सूर्य नमस्कार और प्राणायाम करने से जोड़ों और घुटने के दर्द से छुटकारा मिलता है। गठिया का उपचार करने के लिए बाबा रामदेव के बताये योगा आसन भी कर सकते है।

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सिर्फ 2-3 खजूर आपके शरीर को फौलाद बना देगी…………….

सिर्फ 2-3 खजूर आपके शरीर को फौलाद बना देगी, कब्ज, वजन बढ़ाना, रक्त बढ़ाना, हृदय, मर्दाना ताकत, सुखी खाँसी आदि 200 रोगों का रामबाण उपाय……….

 

खजूर फल पौष्टिक तत्वों का बहुत बड़ा खजाना होता है । यह शरीर की सप्त धातुओं की पुष्टि करके शरीर को फौलाद की तरह बनाने में सक्षम होता है । इसके बारे में एक तथ्य यह भी है की खजूर का पेड़ जितना बड़ा होता है इसके फल उतने ही छोटे होते हैं । मूल रूप से यह अरब देशों में पाया जाता है और अपने स्वाद और गुणों के कारण आज सम्पूर्ण विश्व में समान रूप से पाया जाता है । खजूर को ही सुखाकर छुहारा बनाया जाता है । खजूर से हमको क्या स्वास्थय लाभ प्राप्त होते हैं इस पोस्ट में जानेंगे के माध्यम से। खजूर में पाये जाने वाले पोषक तत्वों में फाईबर, विटामिन ए, बी-कॉम्प्लेक्स, विटामिन के, ऑयरन, कॉपर, मैगनीशियम, मैगनीज़ आदि पाये जाते हैं। अब बात करते हैं खजूर से मिलने वाले स्वास्थय लाभों के बारे में।

खजूर के चमत्कारी फ़ायदे

कब्ज़ में स्थाई आराम : कब्ज़ का मुख्य कारण होता है आँत में खुश्की होना और खजूर आँतों की खुश्की को पूरी तरह से खत्म करता है । खजूर के द्वारा कब्ज़ को पूरी तरह खत्म करने के लिये रोज सुबह दो-तीन खजूर को एक कटोरी ताजे पानी में डुबोकर रख दीजिये और रात होने तक रखा रहने दीजिये । रात को सोते समय इन खजूरों को खूब चबा चबा कर खा लीजिये । यह प्रयोग 7-15 दिनों तक लगातार कीजिये ।

वजन बढ़ानें में लाभकारी :

खजूर में सभी पोषक तत्व तो पाये ही जाते हैं इसके अतिरिक्त यह कैलोरी और ग्लुकोज़ का भी बहुत अच्छा स्रोत है जिस कारण से यह दुबले-पतले लोगों में वजन बढ़ाने का काम कर सकता है । वजन बढ़ाने का लाभ उठाने के लिये14 साल से अधिक उम्र के लोग रोज पूरे दिन में 10-12 खजूर खूब चबा चबा कर खायें ।

ऊर्जा देता है :

खजूर में शरीर को तुरंत ऊर्जा देने की प्राकृतिक शक्ति होती है क्योंकि इसमें शुगर अधिक मात्रा में पायी जाती है । यह शुगर ग्लुकोज़ और फ्रक्टोज़ दोनों ही रूप में उप्लब्ध होती है । इस कारण से जब भी शरीर को अधिक ऊर्जा की जरूरत हो तो 2-3 खजूर खाकर ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है।

नाड़ीतंत्र को मजबूत करे :

शरीर का नाड़ीतंत्र सबसे ज्यादा उलझे हुये तंत्रों में माना जाता है । सम्पूर्ण शरीरेंद्रियों का मस्तिष्क के साथ सम्पर्क मुख्यतः नाड़ीतंत्र के द्वारा ही सम्भव हो पाता है । खजूर नाड़ीतंत्र का परम मित्र सिद्ध होता है । खजूर में उपलब्ध पोटाशियम नाड़ीतंत्र के लिये बहुत जरूरी होता है । साथ ही साथ यह रक्त्चाप को नियमित रखता है और हृदय को भी मजबूत करता है ।

खून की कमी दूर करे :

खजूर में शरीर के लिये लाभकारी और शरीर द्वारा आसानी से स्वीकार किया जाने वाला ऑयरन तत्व पाया जाता है । अतः खून की कमी से परेशान लोगों के लिये खजूर वास्तव में किसी वरदान से कम नही है । रक्ताल्प्तता के रोगियों के लिये रोज दो बार 2-2खजूर खाना पर्याप्त होता है ।

मर्दाना ताकत :

प्रतिदिन खजूर खाने और साथ में दूध पीने से शरीर को भरपूर शक्ति मिलती है । खजूर के सेवन से मर्दाना ताकत में वृद्धि होती है ।

शरीर में शक्ति : दो खजूर को दूध में उबालकर खाने से और साथ में वही दूध पीने से शरीर में शक्ति का संचार होता है।

हृदय रोग :

हृदय रोगी यदि 4-5 खजूर रोज खायें तो यह उनकी रक्तवाहीनियों में रक्त का संचार सरल होता है जिससे रक्तसंचार के अवरोध होने से हृदय रोग की भावना नष्ट होती है।

कमर का दर्द : 2 खजूर को जल में उबाल कर, उसमें 2-3 ग्राम मेथी दाना का चूर्ण मिलाकर रोज खाने से महिलाओं का कमर का दर्द जल्दी ही ठीक हो जाता है ।

नजला : खजूर को काली मिर्च के चूर्ण के साथ दूध में उबाल कर पीने से पुराना सूखा नजला ठीक होता है ।

सूखी खाँसी : खजूर, मिश्री, मक्खन मिलाकर गरम दूध के साथ खाने से सूखी खाँसी ठीक होती है ।

लीवर और तिल्ली : पाँच-सात खजूर रात भर पानी में भिगोकर सुबह उनकी गुठली निकालकर, गूदे को शहद के साथ खाने से लीवर और तिल्ली बढ़ने के रोग खत्म होते हैं ।

विशेष नोट :

खजूर बहुत ही मीठा होता है जिस कारण से यह शरीर में खून की शुगर के स्तर को एक दम से बढ़ाता है । अतः मधुमेह के रोगियों को खजूर का सेवन नही करना चाहिये। ऐसे रोगी यदि खजूर खाना ही चाहते हैं तो पहले अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें।

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करंट लगने पर करे ये आसान उपाय, आपकी समझदारी किसी की जान बचा सकती है, जरूर पढ़े और शेयर करे

करंट लगने पर करे ये आसान उपाय, आपकी समझदारी किसी की जान बचा सकती है, जरूर पढ़े और शेयर करे……..

 

बिजली का झटका यानि इलेक्ट्रिक शॉक कहीं भी लग सकता है। कई मामलों में इलेक्ट्रिक शॉक लगने पर करंट के शरीर के माध्यम से गुजरने पर कार्डीएक अरेस्ट यानि हृदय गति रुकने का खतरा हो सकता है। कई बार करंट लगने से जलना और छाले हो सकते हैं। हालांकि तेज करंट लगने से दिल और दिमाग पर असर पड़ सकता है। दिल पर असर पड़ने से हार्ट बीट्स बिगड़ना और वेंट्रिकुलर फिब्रेलेशन का जोखिम होता है, जिससे कार्डीएक अरेस्ट का खतरा हो सकता है।

बिजली का करंट लगने से दिमाग में ऐंठन हो सकती है और अगर व्यक्ति बुजुर्ग है और दिमागी हालत से पीड़ित है, तो जटिलताएं अधिक गंभीर हो सकती हैं। मुंबई स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल में कंसल्टेंट फिजिशियन डॉक्टर प्रदीप शाह आपको बता रहे हैं कि बिजली का करंट लगने के बाद आपको तुरंत कौन से ऐसे काम करने चाहिए जिससे करंट लगने वाले व्यक्ति की जान बचाई जा सके।

इससे पहले की आप मदद के लिए आगे जाएं, ये सुनिश्चित कर लें कि आसपास कुछ ऐसी चीजें तो नहीं है, जिसमें करंट हो। आपको बता दें कि पानी या लोहे की चीजों में करंट जल्दी से पास होता है। उसके बाद तुरंत एमरजेंसी हेल्पलाइन पर कॉल करें।

व्यक्ति को करंट लगने वाली चीज से अलग करने की कोशिश करें। इसके लिए पावर ऑफ कर दें या डिवाइस अलग निकाल लें। अगर आप ऐसा नहीं कर सकते, तो एक सूखे लकड़ी के स्टूल पर खड़े होकर किसी लकड़ी की छड़ी से व्यक्ति को अलग करने की कोशिश करें। व्यक्ति को भूलकर भी ना छूएं, इससे आप भी करंट चपेट में आ सकते हैं।

व्यक्ति को अलग करने के बाद उसे रिकवरी पोजीशन में लेटा दें। इस पोजीशन में व्यक्ति किसी एक करवट में होता है और उसका एक हाथ सिर के नीचे और दूसरा आगे की तरफ होता है और उसका एक पैर सीधा होता है और दूसरा मुड़ा हुआ होता है। इसके बाद उसकी ठोड़ी उठाकर जांच करें कि वो सांस ले रहा है या नहीं।

अगर व्यक्ति सांस ले रहा है और थोड़ा जल गया है, तो उसे पानी से धो लें। व्यक्ति को कभी भी कंबल से ना लपेटें।
अगर ब्लीडिंग हो रही है, तो ब्लड रोकने के लिए उस जगह को एक साफ और सूखे कपड़े से बांध दें।
अगर आपको व्यक्ति के सांस लेने, खांसने या किसी भी तरह की गतिविधि का कोई संकेत नहीं मिल रहा है, तो आप सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटैशन) शुरू करें। इस प्राथमिक चिकित्सा से किसी बेहोश या मूर्छित व्यक्ति के दिल और फेफड़ो को पुन: होश में लाया जाता है। अगर व्यक्ति सांस ले रहा है, तो कभी भी सीपीआर ना करें।

ध्यान रहे कि

करंट लगने वाले व्यक्ति को तुरंत मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत होती है, भले ही व्यक्ति घटना के बाद पूरी तरह से ठीक लग रहा हो। डॉक्टर जांच के बाद ही ईसीजी, ब्लड टेस्ट, सीटी स्कैन या एमआरआई जैसे टेस्ट के लिए कह सकते हैं।

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पित्त की पथरी से हैं परेशान तो ऑपरेशन की जगह अपनाएँ ये घरेलू उपाय, मिलेगा जल्द ही आराम!

पित्त की पथरी से हैं परेशान तो ऑपरेशन की जगह अपनाएँ ये घरेलू उपाय, मिलेगा जल्द ही आराम!…..

 

इंसान के शरीर की संरचना बहुत ही जटिल है। इसके बारे में साधारण व्यक्ति जल्दी नहीं समझ सकता है। इंसानी शरीर बिमारी की चपेट में बहुत जल्दी आ जाता है। इस वजह से व्यक्ति जीवनभर किसी ना किसी शारीरिक समस्या से परेशान रहता है। कुछ ऐसे भी लोग होते हैं, जो जीवन भर निरोग रहते हैं। वह अपने शरीर और स्वास्थ्य का बहुत ज्यादा ख़याल रखते हैं। यही वजह होती है कि वह बहुत कम बीमार पड़ते हैं।

पथरी दो तरह की होती है:

शरीर में कई तरह की समस्याएँ होती हैं, उन्ही में से एक है पथरी की समस्या। पथरी दो तरह की होती है, एक गुर्दे की पथरी और दूसरा पित्त की पथरी। जब व्यक्ति को गुर्दे में पथरी हो जाती है तो पेट के निचले हिस्से में दर्द होता है। कई बार यह पेशाब के रास्ते बाहर भी निकल जाती है। लेकिन जब पित्त में पथरी हो जाती है तो पेट के दाएँ हिस्से में असहनीय दर्द होता है। ज्यादातर लोग इसे सर्जरी की मदद से निकलवाते हैं।

हो जाती है पाचन शक्ति कमजोर:

जब किसी व्यक्ति को पित्त में पथरी हो जाती है तो डॉक्टर तुरंत पित्त का ऑपरेशन करके पथरी को निकाल देता है। यह काफी तकलीफदेह प्रक्रिया होती है। इससे भविष्य में व्यक्ति की पाचन शक्ति भी काफी कमजोर हो जाती है। हमारे देश में औषधियों का काफी पहले से इस्तेमाल किया जाता रहा है। पित्त की पथरी को ठीक करने के लिए ऐसे कुछ घरेलू उपाय हैं, जिसे अपनाने के बाद बिना ऑपरेशन के पथरी की समस्या से निजात पाया जा सकता है।

पथरी से निजात पाने के लिए अपनाएँ ये घरेलू उपाय:

सेब का जूस और सिरका:

सेब में फोलिक एसिड मौजूद होता है जो पथरी को गलाने में काफी सहायक होता है। हर रोज सेब यह इसके जूस का सेवन करने से पथरी की समस्या से निजात पाया जा सकता है। इसके अलावा आप एक गिलास सेब के जूस में एक चम्मच सिरका मिलाकर डॉन में दो बार सेवन करें, जल्द ही आपकी पथरी गलने लगेगी।

नाशपाती का जूस:

नाशपाती के जूस में पैक्टिन तत्व पाया जाता है जो लीवर में कॉलेस्ट्रोल को बनने और जमने से रोकता है। कॉलेस्ट्रोल ही पथरी का मुख्य कारक है। पथरी की समस्या से निजात पाने के लिए एक गिलास गर्म पानी में एक गिलास नाशपाती का जूस मिलाएं। इसके बाद 2 चम्मच शहद मिलाकर इस जूस का दिन में तीन बार सेवन करें।

चुकंदर और खीरा:

एक चुकंदर, एक खीरा और 4 गाजर लेकर उनका जिस बना लें। इस जूस का सेवन दिन में दो बार करें। इसमें मौजूद विटामिन सी और कोलोन तत्व ब्लैडर में जमे हुए विषैले पदार्थ को बाहर निकालता है, इससे पथरी भी बाहर निकल जाती है।

पुदीना:

पुदीने में तारपीन तत्व मौजूद रहता है जो पथरी को गलाने में मदद करता है। एक गिलास पानी गर्म करें और उसमें कुछ ताज़ी पुदीना की पत्तियाँ डालें। अच्छे से उबलने के बाद पानी को ठंढा करके उसमें शहद मिलाएं और दिन में दो बार सिका सेवन करें।

सेंधा नमक:

एक गिलास पानी गर्म करें और उसमें एक चम्मच सेंधा नमक मिलाकर पिएं, इससे पथरी बहुत जल्दी गल जाती है। इस तरह आप इसे दिन में 2- बार पिए बहुत जल्दी आपको पथरी से छुटकारा मिल जायेगा

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सिर्फ 1 दिन में जोड़ों और घुटनों के दर्द से छुटकारा वो भी बिना किसी दवाई के

सिर्फ 1 दिन में जोड़ों और घुटनों के दर्द से छुटकारा वो भी बिना किसी दवाई के………

 

बहुत सारे लोगों को जोड़ों और घुटनों के दर्द की समस्या का सामना करना पड़ता है | बढती उम्र के साथ ये समस्या और भी गंभीर हो जाती है |अगर आप भी इस समस्या से जूझ रहें हैं और इलाज करवा कर थक चुके हैं तो घबराइए मत ऐसी बहुत सी प्राकृतिक औषधियां मौजूद हैं जो आप को इस समस्या से निजात दिला सकती हैं।

आज जो नुस्खा हम आप के लिए ले कर आये हैं वो अद्भुत चिकितिसीय गुणों से भरपूर है | इस में ऐसे anti-inflammatory तत्व मौजूद हैं जिन में मैग्नीशियम, सिलिकॉन, विटामिन सी और bromelain भरपूर मात्रा में होते हैं जो आप के स्नायुबंधन (ligaments) और tendons मजबूत बनाते हैं।

➡ घुटने और जोड़ों के दर्द से राहत के लिए नुस्खा

सामग्री :

संतरे का रस एक कप (a cup of orange juice (100% natural)
पानी एक कप (a cup of water)
दालचीनी की एक स्टिक (1 cinnamon)
कटा हुआ अनानास 2 कप (2 cups of diced pineapple)
शहद स्वाद अनुसार (raw organic honey (to taste)
आधा कप कूटे हुए बादाम (½ cup of crushed almonds)
जौ का दलिया एक कप (a cup of rolled oats)

➡ तैयार करने की विधि :

एक बर्तन में जौ का दलिया और पानी मिलाएं और कुछ मिनटों के लिए आग पर पकाएं | जब ये पक जाये तो इसे ठंडा होने के लिए छोड़ दें और फिर सारी सामग्री एक ब्लैंडर में डाल कर अच्छी तरह से मिक्स कर लें | थोडा हल्का करने के लिए और पानी भी मिला सकते है।
इस मिश्रण को हर रोज इस्तेमाल करें । दर्द गायब हो जाएगा और आपके जोड़, tendons, स्नायुबंधन (ligaments) और मजबूत हो जायेंगे।

➡ यह नुस्खा इतना प्रभावी कैसे है ?

अनानस में bromelain और विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है, विटामिन सी कंकाल प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण है, bromelain एक anti-inflammatory एजेंट के रूप में कार्य करता है। संतरा भी विटामिन सी, जो भी tendons और ligaments को मजबूत बनाने में मदद करता है के साथ भरपूर है।

दालचीनी भी anti-inflammatory गुणों के साथ रक्त परिसंचरण को बढावा देने और हड्डियों और जोड़ों को मजबूत करने में मदद करती है।

➡ सेवन की विधि :

यह आप सुबह खाली पेट या भोजन के कम से कम दो घंटे के बाद लीजिये. और इसके सेवन के बाद में दो घंटे तक कुछ भी खाना नहीं. आधे घंटे के बाद में गुनगुना या गर्म पानी पी सकते हैं।

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ये फूल रातों-रात झट-पट ख़ून बढ़ाता है तो कोलेस्टेरॉल कम करता है, जो मधुमेह को ख़त्म कर दे वही बालों को नयी जड़ो से उगा सकता है।

ये फूल रातों-रात झट-पट ख़ून बढ़ाता है तो कोलेस्टेरॉल कम करता है, जो मधुमेह को ख़त्म कर दे वही बालों को नयी जड़ो से उगा सकता है।…….

 

आज हम आपको गुड़हल के फूल से होने वाले लगभग 15 फ़ायदों के बारे में बताएँगे।

गुड़हल से होने वाले फ़ायदे जैसे कोलेस्टेरॉल और ब्लड प्रेशर से लेकर मधुमेह या डायबिटीज, किडनी और डिप्रेसन, दिल और दिमाग को शक्ति, मुंह में छाले, बालों की जड़ें मजबूत, सर्दी और खांसी, बालों के झड़ने, बालों की ग्रोथ और शाइनिंग बालों के लिए, बुखार व प्रदर, सूजन, खुजली और जलन, पिंपल्स और मुहांसों, एनीमिया की समस्या और स्टेमिना बढ़ाए और पाचन शक्ति तक है, जो आयुर्वेद में प्रकृति का वरदान है।

भारत में गुडहल का पौधा सर्वत्र मिल जाता है लेकिन जब तक इसके उपयोग की जानकारी से अनजान है तब तक ये एक फूल का पौधा समझ कर ही लोग इसका उपयोग करते है गुड़हल (Hibiscus) का फूल दिखने में जितना सुंदर होता है ये उतना ही फायदों से भरपूर भी होता है आयुर्वेद के अनुसार इसके फूल बहुत उपयोगी होते है।

गुड़हल सामान्यत:

दो प्रकार के है सफ़ेद गुडहल की जड़ो को पीस कर कई दवाओं का निर्माण होता है कई प्रकार के ब्यूटी प्रोडक्ट्स बनाने और यहां तक कि ब्यूटी ट्रीटमेंट में गुड़हल के फूल का उपयोग किया जाता है स्ट्रेस और पॉल्यूशन के कारण कम उम्र में बालों के झड़ने की समस्या से परेशान हों या मुहांसे और पिंपल्स की समस्या हो यह दोनों में ही कारगर है।

आइए जानते हैं किस तरह से गुड़हल के फूल का इस्तेमाल किया जा सकता है

आइए जानते है इसके बारे में…गुड़हल के 15 अद्भुत फायदे :

कोलेस्टेरॉल और ब्लड प्रेशर :

गुडहल की पत्ती से बनी चाय एलडीएल कोलेस्टेरॉल को कम करने में काफी प्रभावी है इसमें पाए जाने वाले तत्व अर्टरी में प्लैक को जमने से रोकते हैं जिससे कोलेस्टेरॉल का स्तर कम होता है।

गुड़हल के फूलों में एंटी-ऑक्सीडेंट पाया जाता है जो कोलेस्ट्रॉल कम करने के साथ ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल करता है।इसके लिए इसके फूलों को गरम पानी में उबालकर पीना फायदेमंद होता है।

डायबिटीज :

मधुमेह या डायबिटीज के लिए नियमित आप इसकी 20 से 25 पत्तियों का सेवन शुरू कर दे ये आपकी डाइबिटीज का शर्तिया इलाज है -इसका पौधा नर्सरी से आसानी से मिल जाता है और इसे आप घर में लगा सकते है।

किडनी और डिप्रेसन :

अगर आपको किडनी की समस्या है तो आप गुडहल की पत्ती से बनी चाय का सेवन करे इसी चाय का लाभ डिप्रेसन के लिए भी होता है।

दिल और दिमाग को शक्ति :

गुड़हल का शर्बत दिल और दिमाग को शक्ति प्रदान करता है तथा ये आपकी मेमोरी पावर को बढ़ाता है जो लोग बढ़ते उम्र के साथ मेमोरी लॉस होने की समस्या से परेशान है और जब कम उम्र में याददाश्त कमजोर होने लगे तो गुड़हल इस समस्या को दूर करने में भी बहुत ही कारगर है गुड़हल की 10 पत्तियां और 10 फूल लें फिर इन्हें सुखाकर और पीसकर उसका पाउडर बना लें और किसी एयर टाइट डिब्बे में बंद करके रखें दिन में दो बार दूध के साथ इस पाउडर को लेना से आपकी मेमोरी पावर में काफी इजाफा होता है।

मुंह में छाले :

अगर मुंह में छाले हो गए है तो आप गुडहल के पत्ते चबाये आराम हो जाएगा।

बालों की जड़ें मजबूत :

मैथीदाना, गुड़हल और बेर की पत्तियां पीसकर पेस्ट बना लें आप इसे 15 मिनट तक बालों में लगाएं इससे आपके बालों की जड़ें मजबूत और स्वस्थ होंगे।

सर्दी और खांसी :

गुडहल में अधिक मात्रा में विटामिन सी होता है जब चाय या अन्य रूपों में इसका सेवन किया जाता है तो यह सर्दी और खांसी के लिए काफी फायदेमंद होता है इससे आपको सर्दी से जल्द राहत मिलेगी।

बालों के झड़ने, बालों की ग्रोथ और शाइनिंग बालों के लिए :

बालों के झड़ने की समस्या से लगभग हर कोई परेशान है गुड़हल के फूल इस समस्या को दूर करने में बहुत ही कारगर हैं ये न सिर्फ बालों का झड़ना रोकते हैं बल्कि इसके इस्तेमाल से एक अलग ही शाइनिंग बालों में नजर आने लगती है-गुड़हल की 6-8 पत्तियों को लेकर अच्छे से पीस लें इसे सिर और स्केल्प में अच्छे से लगाएं 3 घंटे रखने के बाद गुनगुने पानी से धो लें ये स्केल्प को पोषण देने के साथ ही बालों की ग्रोथ में भी बहुत ही फायदेमंद होता है।

बुखार व प्रदर :

ये बुखार व प्रदर में भी लाभकारी होता है यह शर्बत बनाने के लिए गुड़हल के सौ फूल लेकर कांच के पात्र में डालकर इसमें 20 नीबू का रस डालें व ढक दें। रात भर बंद रखने के बाद सुबह इसे हाथ से मसलकर कपड़े से इस रस को छान लें।

इसमें 80 ग्राम मिश्री+20 ग्राम गुले गाजबान का अर्क+20 ग्राम अनार का रस+ 20 ग्राम संतरे का रस मिलाकर मंद आंच पर पका लें।

सूजन, खुजली और जलन :

गुड़हल का फूल सूजन के साथ ही खुजली और जलन जैसी समस्याओं से भी आपको राहत दिलाता है। गुड़हल के फूल की पत्तियों को मिक्सी में अच्छे से पीस लें तथा सूजन और जलन वाले हिस्से पर लगाएं कुछ ही मिनटों में समस्या दूर हो जाएगी।

पिंपल्स और मुहांसों :

अगर आप पिंपल्स और मुहांसों की समस्या से परेशान हैं तो गुड़हल की पत्तियों को पानी के साथ उबालकर अच्छे से पीस लें और इसमें शहद मिलाकर पिंपल्स पर लगाएं।

एनीमिया की समस्या और स्टेमिना बढ़ाए :

महिलाओं को अक्सर आयरन की कमी से एनीमिया की समस्या हो जाती है लेकिन बहुत ही कम लोग इस बात को जानते होंगे कि गुड़हल के फूल से भी एनीमिया का इलाज संभव है आप 40-50 गुड़हल की कलियों को सुखा कर फिर अच्छे से पीसकर उन्हें किसी एयर टाइट डिब्बे में बंद कर दें और रोजाना सुबह-शाम एक कप दूध के साथ यह पाउडर लें सिर्फ एक महीने में ही एनीमिया की समस्या दूर हो जाएगी और इससे स्टेमिना भी बढ़ता है।

पाचन शक्ति :

लार में वृद्धि और पाचन शक्ति को बनाने और मुँह के छालों के लिए गुड़हल की 3-4 पत्तियो को चबाना चाहिए। आपको लाभ होगा।

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चाहे चालीस साल पूराने सफ़ेद दाग क्यों ना हो, ये अद्भुत सप्त तेल उम्मीद की आखिरी किरण है

चाहे चालीस साल पूराने सफ़ेद दाग क्यों ना हो, ये अद्भुत सप्त तेल उम्मीद की आखिरी किरण है……….

 

श्वेत कुष्ठ या सफेद दाग त्वचा से संबंधित रोग है। कुछ लोग इसे कुष्ठ रोग भी मानते है। जबकि यह अवधारण गलत है। दुनियाभर में सफेद दाग से करीब चार फीसदी लोग ग्रस्त हैं। भारत की चार फीसदी (करीब पांच करोड़) जनसंख्या को सफेद दाग की समस्या है।

शुरुआत में छोटा सा दिखाई देने वाला यह दाग धीरे-धीरे काफी बड़ा हो जाता है। इससे ग्रस्त व्यक्ति को कोई शारीरिक परेशानी, जलन या खुजली नहीं होती। चेहरे पर या शरीर के अन्य किसी हिस्से में सफेद दाग होने के कारण कई बार व्यक्ति में हीनता की भावना भी पैदा हो जाती है।

➡ सप्त तेल का अनुभूत प्रयोग :

दादा मदन लाल जी का गुरु प्रदत्त अनुभूत प्रयोग तीस-चालीस वर्षो से अधिक समय तक किया गया इनका निम्न प्रयोग निराश रोगियों की सेवा में प्रस्तुत है उनका कहना है की अगर श्वेत कुष्ठ अधिक दिनों का पुराना हो तो यह प्रयोग आजमाये। अनुभूत योग इस प्रकार से है…

➡ अवश्यक सामग्री :

बावची तेल 10 मिली
चाल मोगरा तेल 10 मिली
लौंग तेल 10 मिली
दालचीनी तेल 10 मिली
तारपीन तेल 10 मिली
श्वेत मिर्च का तेल 20 मिली
नीम तेल 40 मिली

➡ सप्त तेल तैयार करने की विधि और लगाने का तरीका :

इन सात तेल को मिला कर अच्छी तरह सुबह शाम मालिश करे या लगाये कितना भी पुराना श्वेत कुष्ठ हो इस तेल के योग से पूरी तरह से ठीक हो जाता है हा एक बात जरुर है इसमें चार से सात माह का समय लगता है अत : निराश नहीं होना चाहिए और ये प्रयोग निरंतर करते रहना चाहिए और अगर किसी तरह का कोई उपद्रोव नजर आये तो इसमें 50 मिली नारियल तेल मिला सकते है इससे इसकी शक्ति कम हो जायेगी पर घबराना नहीं चाहिये कुछ समय और लग सकता है।

इस महत्त्वपूर्ण जानकारी को शेयर जरूर करे ताकि इस रोग से ग्रसित रोगी इसका लाभ ले सके।
स्रोत : स्वदेशी चिकित्सा के चमत्कार लेख दादा मदन लाल जी का गुरु प्रदत्त अनुभूत प्रयोग।

ध्यान रहे यह प्रयोग कुशल वैद्य या आयुर्वेदाचार्य द्वारा तैयार कराये तथा उनकी देख रेख में उचित परामर्श के साथ करे।

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