फफोले (Blister) से छुटकारा पाने के नायाब घरेलू उपाय

फफोले (Blister) से छुटकारा पाने के नायाब घरेलू उपाय……….

 

कई बार त्वचा पर ब्लिस्टर यानी फफोले (Blister) हो जाते हैं. इनके कई कारण हो सकते है. कुछ मुख्य कारण जलने से, घर्षण तथा इन्फेक्शन से भी हो जाते हैं. इनको ठीक करने के लिए बहुत से घरेलू उपाय हैं. जैसे कि ग्रीन टी, एलोवेरा, विच हेजल के प्रयोग से फफोलों (Blister) का इलाज किया जा सकता है.

फफोले (Blister) त्वचा की ऊपरी परत पर कई वजहों से पड़ जाते हैं. त्वचा (Skin) के जलने, जमने, रगड़ लग जाने या फिर इन्फेक्शन से होने वाले फफोलों में पानी भरा होता है. ये फूले हुए दिखाई देते है. इसमें भरा पानी सीरम या फिर प्लाज्मा कहलाता है. कई बार इन में खून या मवाद भी भर जाती है. इन फफोलों में दर्द होता है. फफोले से छुटकारा पाने के लिए कुछ अचूक आसान घरेलू उपाय हैं. आइये जानते हैं इन घरेलू तथा चमत्कारी उपायों के बारे में.फफोले (Blister) से छुटकारा पाने के नायाब घरेलू उपाय

साफ और सुरक्षित रखने के लिए ढंक लें

बैंडेज से फफोलों को सुरक्षित रखा जा सकता है. इससे फफोलों पर रगड़ लगने से बचाव रहेगा. आप बैंडेज किस तरह से लगाते हैं. फफोलों का ठीक होना उस पर निर्भर रहेगा. चिपकने वाला हिस्सा फफोले के आसपास हो और बीच का हिस्सा फफोले से ऊपर उठा होना चाहिए. इस प्रकार आप फफोलों को रगड, गंदगी तथा इन्फेक्शन से बचा सकते है. इस प्रकार छाले को सूखने के लिए जगह मिल जाएगी.

विच हेजल का इस्तेमाल

विच हेजल में एस्ट्रीजेंट तत्वों से भरपूर होता हैं. इससे ब्लिस्टर सूखेगा. विच हेजल फफोलों को साफ करने तथा उसे ठीक करने में सहायक है. साफ रूई से ब्लिस्टर पर लगाएं. आपको थोड़ी जलन हो सकती है. लेकिन ये फफोले का सबसे अच्छा व सुरक्षित घरेलू उपाय है.

एलोवेरा जेल है फायदेमंद

एलोवेरा से सूजन खत्म होती है. इससे दर्द भी कम होता है. एलोवेरा ज्यादा जलने पर भी एक प्रभावशाली दवा का काम करता है. इसके लिए एलोवेरा जैल का बहुत फायदा होता है.

ग्रीन टी बैग्स का प्रयोग

सबसे पहले ग्रीन टी के बैग्स को उबालें. एक चम्मच बेकिंग सोडा मिला दें. पानी को थोड़ा ठंडा होने दें. ग्रीन टी के पानी में अपने फफोलों को डुबा लें. अगर डुबाया नहीं जा सकता तो किसी मुलायम किसी कपड़े को डुबाकर फफोले पर रखें. फफोला मुलायम पड़ जाएगा तथा फूट जाएगा. फूटने पर फफोला बहुत जल्दी ठीक हो जाता है.

सेब का सिरका का प्रयोग

सेब के सिरके में एंटी बैक्टीरियल तत्व होते हैं. यह फफोलों में इन्फेक्शन होने से रोकता है. सिरका कर फफोले पर डालें. इससे काफी दर्द हो सकता है. फफोले में टीस सो सकती है. फिर भी इससे आपको फायदा भी पहुंचेगा. इसके स्थान पर हाईड्रोजन पेरोक्साइड से साफ कर सकते है.

विटामिन ई का प्रयोग

विटामिन E में त्वचा की मरम्मत करने वाले पदार्थ होते हैं. विटामिन E त्वचा को तुरंत ठीक करता है और निशान नहीं पड़ने देता है. आप विटामिन E तेल या फिर क्रीम फफोले पर लगा सकते हैं. विटामिन E के कैप्सूल को फोड़ कर भी लगा सकते है.

अरंडी का तेल लगायें

अरंडी का तेल फफोले के लिए सबसे ज्यादा प्रयोग होने वाला उपाय है. रात को सोने से पहले अरंडी का तेल छाले पर लगाएं. रात भर लगा रहने दें. इसे सूखने दें. सुबह तक फफोले में आराम हो जायेगा. अरंडी के तेल में थोड़ा सा सेब का सिरका मिलाकर भी लगा सकते हैं. इससे ज्यादा फायदा मिलेगा

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नाभि खिसकना (Navel Displacement) कारण लक्षण तथा उपाय

नाभि खिसकना (Navel Displacement) कारण लक्षण तथा उपाय………

 

आजकल लोगो की दिनचर्या बहुत ही व्यस्त हो गई है. दिन भर भागदौड के दौरान वे अपने शरीर का ध्यान ही नहीं रख पाते है. दिन भर भागदौड करने की वजह से व्यक्ति का नाभि चक्र भी निरंतर व्यस्त बना रहता है. जिसकी वजह से कई बार नाभि अपनी जगह से हट जाती है. इसे नाभि खिसकना या फिर नाभि टलना कहा जाता है. चिकित्सकों के पास भी इसका कोई विशेष इलाज नहीं है. वे आपको दवा तो दे देंगे पर कोई फायदा नहीं होता है. नाभि को सिर्फ देसी तरीको से ही अपने स्थान पर ला सकते है.

नाभि खिसक जाने पर बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है. व्यक्ति का शरीर बिलकुल निढाल हो जाता है. वह बिलकुल भी कोई काम नहीं कर पाता है. ऐसा महसूस होता है जैसे शरीर से जान ही निकल गई हो. आज का हमारा लेख इसी विषय पर है. यहाँ पर हम आपको बता रहे है कि नाभि के खिसकने के कारण क्या है. नाभि खिसकने पर कैसा भोजन करना चाहिए. तथा नाभि को फिर से अपने स्थान पर कैसे लायें.

नाभि खिसकने के कारण

खेल के समय उछलने कूदने से.
असावधानी पूर्वक अचानक दाएँ बाएँ झुकने से.
अचानक भारी बोझ उठाने पर.
तेजी से सीढ़ियाँ चढ़ने या उतरने से.
सड़क पर चलते हुए अचानक गड्ढे में पैर पड़ जाने से.
किसी एक पैर पर भार पड़ने से भी नाभि टल जाती है.
कुछ लोगों की नाभि बचपन में ही विकार ग्रस्त हो जाती है.

नाभि टलना या नाभि खिसकना (Navel Displacement) कैसे पता करे

सुबह जल्दी उठकर खाली पेट ज़मीन पर शवासन में लेट जाएँ. फिर अंगूठे के सिरे से नाभि के कम्पन को महसूस करना है. अगर कम्पन नाभि के बीच में ही है तो नाभि अपनी सही जगह पर है. अगर कम्पन नाभि से थोड़ा हट कर किसी भी साइड में होता है. तो आपकी नाभि अपनी जगह से खिसक चुकी है. इसी को नाभि टलना या खिसकना कहते है. आमतौर पर पुरुषों की नाभि बाईं ओर तथा स्त्रियों की नाभि दाईं ओर टला करती है.

नाभि खिसकना या नाभि टलना (Navel Displacement) के प्रकार

व्यक्ति की नाभि कई प्रकार से खिसक सकती है. उपर, निचे दायें या फिर बाएं तरफ भी नाभि खिसक सकती है. आइये जानते है नाभि के किस तरफ खिसकने से क्या होता है. क्या लक्षण पैदा होते है.

नाभि का ऊपर की तरफ खिसकना

यदि नाभि का कम्पन ऊपर की तरफ चल रहा है. नाभि छाती की तरफ चली गई है तो यकृत, प्लीहा, आमाशय, तथा अग्नाशय की क्रिया में बाधा उत्पन्न होने लगती है. जिसकी वजह से हमारे फेफड़ों तथा ह्रदय पर विपरीत प्रभाव पड़ता है. थायराइड, मोटापा, वायु विकार, मधुमेह, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, घबराहट जैसी बीमारियाँ शरीर में पैदा होने लगती हैं.

नाभि का नीचे की तरफ खिसकना 

अगर नाभि खिसककर नीचे की तरफ चली जाए तो मलाशय, मूत्राशय तथा गर्भाशय की क्रिया पर प्रभाव पड़ता है. अतिसार, प्रमेह, प्रदर, दुबलापन जैसे रोग हो जाते है. फैलोपियन ट्यूब नहीं खुलती है. जिसके कारण स्त्रियाँ गर्भधारण नहीं कर पाती है. स्त्रियों के उपचार में नाभि को बीच में लाया जाना चाहिए. इससे कई बाँझ स्त्रियाँ भी गर्भ धारण के योग्य हो जाती है .

नाभि का बाईं ओर खिसकना

कई बार नाभि बाईं और खिसक जाती है. ऐसा होने पर सर्दी जुकाम, खाँसी, कफ रोग जल्दी जल्दी होने लगते हैं.

दाहिनी ओर खिसकना

नाभि के दाहिनी और टलने पर अग्नाशय, यकृत, प्लीहा के काम पर प्रभाव पड़ता है. पित्त विकार, श्लेष्म, कला, प्रदाह, क्षोभ, जलन, छाले, एसिडिटी, अपच तथा अफारा हो सकता है.

नाभि खिसकने पर कैसा भोजन करें

नाभि खिसक जाने पर व्यक्ति को हल्का पचने वाला भोजन देना चाहिए. पीड़ित व्यक्ति को मूँगदाल की खिचड़ी के सिवाय कुछ नही देंना चाहिए. रोगी को दिन में एक या दो बार अदरक का रस 2 से 5 मिलिलीटर उसी मात्रा में शहद मिलाकर देने से वांछित लाभ मिलता है.

नाभि को अपने स्थान पर कैसे लायें

ज़मीन पर दरी बिछा लीजिये. बच्चो के खेलने वाली गेंद ले. इसके बाद उल्टा लेट जाए तथा गेंद को नाभि के बीच में रख लीजिये. आपको पांच मिनट तक ऐसे ही लेटे रहना है. खिसकी हुई नाभि (धरण) बिलकुल ठीक हो जायेगी. अब धीरे धीरे करवट ले कर उठ जाए तथा ओकडू बैठ जाए. अब एक आंवले का मुरब्बा खा ले. आप 2 आटे के बिस्कुट भी खा सकते है. अब धीरे से खड़े हो जाए. आपकी धरन ठीक हो चुकी है.

सबसे पहले कमर के बल लेट जाएं. अब आप पादांगुष्ठनासास्पर्शासन करें. इस आसन के लिए लेटकर बाएं (left) पैर को घुटने से मोड़कर हाथों से पैर को पकड़ लें. अब पैर को खींचकर मुंह तक लाएं. सिर उठा लें तथा पैर का अंगूठा नाक से लगाये. कुछ देर इसी अवस्था में रुकें रहे. यही प्रकिर्या दूसरे पैर से भी करनी है. इस तरह दोनों पैरों से 3 बार करना है. इस प्रकार आपकी नाभि सेट हो जाएगी.

मरीज को सीधा लिटाकर नाभि के चारों ओर सूखे आँवले का आटा बनाकर. उसमें अदरक का रस मिलाकर बाँध दें. इस प्रकार उसे दो घण्टे तक लिटाकर रखें. एक दिन में दो बार ऐसा करने से नाभि अपने आप अपने सही स्थान पर आ जाएगी.

नाभि ठीक होने पर पाँव के अंगूठों में चांदी की छल्ली डाली हैं. इससे आगे के लिए नाभि टलने का खतरा कम हो जाता हैं. बहुत से पुराने लोग पैर के अंगूठो में धागा भी बाँध देते हैं.

अगर नाभि के टलने पर दर्द हो रहा है. तो 20 ग्राम सोंफ, इतना ही गुड एक साथ मिलाकर सुबह खाली पेट खा ले. टली हुई नाभि ठीक हो जायेगी. फिर कभी भी नाभि नहीं टलेगी.

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कब्ज (Constipation) कितनी भी पुरानी हो ये उपाय जड़ से उखाड़ देगा

कब्ज (Constipation) कितनी भी पुरानी हो ये उपाय जड़ से उखाड़ देगा……….

 

कब्ज (Constipation) एक बहुत ही खतरनाक बिमारी है. दुनियाभर में लाखों लोग कब्ज से पीड़ित है. इसका मुख्य कारण कभी भी कुछ भी खा लेना है. खाने के बाद सुस्त बैठे रहना या फिर खाने के सीधे सो जाने से भी कब्ज होती है. इसमें हमारा पाचन तंत्र खराब हो जाता है.

कब्ज (Constipation) बाकि सभी बीमारियों की भी मूल वजह है. इसकी वजह से और भी बड़ी बिमारियां हमारे शरीर को घर कर लेती है. वैसे तो यह किसी भी उम्र में हो सकती है परन्तु जैसे जैसे उम्र बढती है ये अपना सिकंजा कसती जाती है.कब्ज (Constipation) कितनी भी पुरानी हो ये उपाय जड़ से उखाड़ देगा

कब्ज (Constipation) होने के कुछ मुख्य कारण इस प्रकार है

खान पान का ध्यान न रखना
शौच को रोकने की आदत
शारीरिक काम का अभाव
आराम की कमी
मानसिक तनाव
आँतों की कमजोरी
शौच करने में जल्दी
शरीर में पानी की कमी
निशीले पदर्थो का सेवन
दवाइयों का बुरा प्रभाव

कब्ज (Constipation) कितनी भी पुरानी हो ये उपाय जड़ से उखाड़ देगा

यहाँ पर हम आपको हरे पानी की चिकित्सा के बारे में जानकारी दे रहे है. इस विधि से पुरानी से पुरानी कब्ज भी ठीक हो जाती है. साधारण कब्ज तो सिर्फ 2 या 3 दिन में ही ठीक हो जाती है. आइये जानते है इस विधि के बारे में.

किसी हरे रंग की साफ़ बोतल का तीन चौथाई हिस्सा साधारण पानी से भर लीजिये. अब बोतल का ढक्कन ठीक से बंद कर दे. अब इसे 6 से 8 घंटे धुप में रखना है. यह पानी हरे रंग का नही होता लेकिन इसमें हरे रंग के गुण आ जाते है. इस पानी का सेवन करना है. हरा पानी हर रोज बनाना है. और जब यह अपने आप ठंडा हो जाये तब इस्तेमाल करना है.

सूर्य तापित हरे पानी के फायदे

हमारे शरीर के विजातीय द्रव्य बाहर निकाल देता है.
पुरानी से पुरानी कब्ज दूर कर देता है.
गुर्दो (किडनी) की प्रणाली में सुधार करता है.
आंतो और त्वचा की कार्यप्रणाली सुधारता है.

हमारे रक्त से दूषित पदार्थों को बाहर निकालने में सहायता करना तथा खून साफ़ करना, शरीर का ताप संतुलित रखता है.
इसी प्रकार नारंगी या लाल शेड की कत्थई या बियर की ब्राउन बोतल में सूर्यतापित किया गया पानी नारंगी पानी से भी कब्ज खत्म हो जाती है. तथा उपर दिए गये फायदे मिलते है.

हरे पानी से साधारण कब्ज तो 3-4 दिन में ही ठीक हो जाती है. कब्ज दूर करने के लिए हरा पानी सुबह जल्दी उठकर कुल्ला करने के बाद खाली पेट आधा कप से एक कप पीना है. फिर दिन के खाने के आधा घंटे पहले आधा कप पीना है. शाम को खाने से आधा घंटे पहले आधा कप पीना है. इस तरह दिन में तीन बार सूर्य तापित हरा पानी कुछ दिन पीना है.

शहद लहसुन (Honey Garlic) का नुस्खा देता है अदभुत स्वस्थ्य लाभ

शहद लहसुन (Honey Garlic) का नुस्खा देता है अदभुत स्वस्थ्य लाभ………..

 

शहद लहसुन (Honey Garlic) का नुस्खा – शायद ही कोई होगा जो शहद और लहसुन के बारे में नही जानता होगा. लहसुन का प्रयोग हर घर में मसाले के रुप में किया जाता हैं. इसका सेवन करने से बहुत सी बीमारियों से भी बचा जा सकता हैं. यह हमारे शरीर को डिटॉक्स करता है. शरीर में इंफेक्शन को भी खत्म कर देता है. इसके साथ ही यह हमारे इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करता हैं.

अगर लहसुन को शहद के साथ खाया जाये तो इसके अदभुत फायदे मिलते है. अगर आप लगातार कुछ दिन शहद तथा लहसुन का सेवन करते है, तो कुछ ही दिनों में आपको चमत्कारी प्रभाव नजर आएगे. यह उपाय बहुत अधिक स्वस्थवर्धक है. आइये जानते इसे बनाने की क्या विधि है. तथा इसके फायदों पर एक नजर डालते है.शहद लहसुन (Honey Garlic) देता है अदभुत स्वस्थ्य लाभ

सर्दी तथा जुकाम से छुटकारा दिलाए

इसमें ऐसे तत्वों की भरमार होती हैं. जिनके सेवन से हमारे शरीर में गर्मी आती हैं. इसलिए सर्दी जुकाम जैसी बिमारी से छुटकारा मिल जाता है.

दिल को स्वस्थ रखता है

लहसुन और शदह खाने से आपके दिल की बीमारियों से बचा जा सकता हैं. इससे दिल की धमनियों में जमा हुआ वसा निकल जाता है. ब्लड सर्कुलेशन सुचारू रूप से होने लगता हैं. जो दिल के लिए बहुत ही फायदेमंद हैं.

इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत बनाता है

यह इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत बनाता है. जिसके कारण कोई भी बीमारी नजदीक नहीं आ पाएगी.

बॉडी को डीटॉक्स करता है

यह एक प्राकृतिक डीटॉक्स है. हमारी बॉडी को Detox करने का काम करता है. यह शरीर में मौजूद गंदगी और फ़ालतू की चीजों को बाहर निकाल देता है. जिससे आप सेहतमंद रह सकते है.

डायरिया से सुरक्षा करता है

अगर आपको डायरिया की बिमारी है, तो इस का सेवन बहुत अधिक फायदेमंद हैं. इसको खाने से आपका पाचन तंत्र ठीक से काम करता हैं. जिसके कारण आपको पेट संबंधी किसी भी प्रकार का रोग नहीं होता हैं.

गले के इंफेक्शन को खत्म करता है

इस में एंटी इंफ्लेमेटरी तत्व पाए जाते है. जिससे आपके गले में खराश और सूजन से आपको छुटकारा मिल जाएगा.

उपाय को तैयार करने की विधि

कुछ लहसुन की बड़े आकार की कली को कूट लीजिए. अब इसमें शुद्ध शहद मिलाए. अब इसे कुछ देर के लिये ऐसे ही रहने दीजिये. ताकि लहसुन शहद मिक्स हो जाए. हर रोज सुबह खाली पेट 7 दिनों तक खाना है. फिर इसका फायदा देखे. ये वाकई में चमत्कारी उपाय है. इसके जबरदस्त फायदे आपको अपने आप ही नजर आ जयेंगे.

पेट दर्द (Abdominal Pain) है विभिन्न बीमारियों का संकेत

पेट दर्द (Abdominal Pain) है विभिन्न बीमारियों का संकेत…….

 

पेट दर्द (Abdominal Pain) एक सामान्य सी बिमारी है. लेकिन जब पेट का दर्द (Abdominal Pain) किसी अन्य बिमारी का लक्षण है तो यह घातक सिद्ध हो सकता है. पेट दर्द (Abdominal Pain) के बहुत से कारण हो सकते हैं. यह पेट में अलग अलग साइड में या जगह पर हो सकता है. दायीं तरफ बायीं तरफ या फिर मध्य में दर्द हो सकता है. ऐसा विभिन्न कारणों से होता है.

जिनमे गाल ब्लैडर स्टोन या पथरी, कब्ज, बदहजमी, सीने में जलन, मुंह में खट्टा पानी आना, पेप्टिक अलसर, पेनक्रिएटाइटिस, अपेंडिक्स हैं. अक्सर हम पेट दर्द का सही नहीं जान पाते है. हमारा आज का लेख इसी पर आधारित है. जानते है कुछ वजहों के बारे में बताएँगे. जो आपको बतायेंगे कि ये दर्द किस कारण से हो सकता है.पेट दर्द (Abdominal Pain) है विभिन्न बीमारियों का संकेत

अगर पेट के दायें (Right) हिस्से में दर्द हो

पेट के दायें हिस्से में लीवर से नीचे की तरफ पित्त या गालब्लैडर होता है. जो लीवर से निकले हुए पित्त को स्टोर करता है. यहाँ पर दर्द गालब्लैडर में स्टोन या पथरी कि वजह से हो सकता है. इस दर्द में चिकित्सक ऑपरेशन कि सलाह ही देते हैं. उनके पास इसका कोई भी इलाज नहीं है. परन्तु आयुर्वेद की मदद से ये निकाल सकते हैं.

अगर पेट के दायें हिस्से में नीचे की और दर्द

पेट के दायें हिस्से में नीचे की ओर का दर्द अपेंडिक्स हो सकता है. अधिक तला भुना खाने से या आंतो कि अच्छे से सफाई ना होने से आंतो में मल या विषाक्त पदार्थ जमा होने से अपेंडिक्स प्रभावित होती है. डॉक्टर्स तो इस को भी काटने कि ही सलाह देते हैं. आयुर्वेद में इसका इलाज कर सकते हैं.

पेट के बीच में दर्द 

पेट के बीच में दर्द अल्सर की वजह से हो सकता है. यह इन्फेक्शन के कारण होता है. अगर पेप्टिक अल्सर का दर्द है तो छाछ या लस्सी पियें तो तुरंत आराम मिलेगा. एक चौथाई दूध में तीन चौथाई पानी मिला कर अच्छे से घुमा लीजिये तो ये दूध कि लस्सी तैयार हो जाएगी. अल्सर के रोगियों के लिए यह अमृत समान है.

अगर पेट के बीच से पीठ तक होता हुआ दर्द

पेनक्रिएटाइटिस का संकेत है. यह ज्यादा शराब पीने से होता है. शराब का नियमित ज्यादा सेवन करने से पैंक्रियास (अग्नाशय) पर प्रभाव पड़ता है. इसलिए अल्कोहल से दूरी बनाये रखें. शरीर में पानी कि कमी ना होने दें.

अगर पेट दर्द, मल सख्त होने के साथ पेट का साफ़ ना होना

साफ है यह कब्ज के लक्षण हैं. अधिक मसालेदार खाना, कोल्ड ड्रिंक्स, अधिक भोजन, तला भुना तथा तनाव प्रमुख कारण हैं. ऐसे में फाइबर वाले पदार्थ खाने चाहिए. दही या छाछ में अजवायन तथा जीरे का तड़का लगा कर खाएं.

बदहजमी, सीने में जलन, मुंह में खट्टा पानी आना

एसिडिटी की वजह से होता हैं. भोजन को पचाने के लिए लीवर जो एसिड का छोड़ता है. यह भोजन को पचाने में अति सहायक होते हैं. जब ये एसिड अधिक मात्रा में बनते है. इसके कारण सीने में जलन या मुंह में खट्टा पानी जैसे लक्षण होते हैं. मुंह में खट्टा पानी अधिक आता हो तो रात को गरिष्ठ भोजन नहीं लेना चाहिए. फलों में सेब संतरा केला खाना चाहिए. एसिडिटी या हाइपर एसिडिटी होने पर आप आधा चम्मच जीरा कच्चा ही चबा कर खा लीजिये. आधा गिलास पानी पी लीजिये. तुरंत आराम आ जायेगा.

पेट के उपरी हिस्से में खिंचाव के साथ फूलना

गैस के कारण हो सकती है. मिर्च, तला भुना खाना, चाय, कॉफ़ी, खटाई वाली चीजें ना खाएं. नमक कम लें तथा खाने के साथ पानी ना पियें.

देसी घी (Desi Ghee) वजन कम करने में भी है कारगर

देसी घी (Desi Ghee) वजन कम करने में भी है कारगर………

 

ज्यादातर लोग देसी घी (Desi Ghee) केवल स्वाद के लिए खाते हैं लेकिन इसके कुछ फायदे भी हैं जिनसे आप अंजान होंगे. घी दिल की बीमारियों से दूर रखता है. देसी घी (Desi Ghee) में सीएलए यानी वो फैटी एसिड होता है जो मधुमेह और दिल की बीमारियों से बचाता है.

देसी घी (Desi Ghee) खाना पचाने में मदद करता है. घी में बुटेरिक एसिड होता है जो आंत के सेल्स को पोषित करता है. ये पेट की जलन भी कम करता है.

देसी घी (Desi Ghee) वजन कम करने में भी है कारगर

गर्भवती महिलाओं को घी जरूर खाना चाहिए क्योंकि इसमें K2 विटामिन होता है जो चेहरे और दांतों के लिए अच्छा होता है. इससे होने वाला बच्चा स्वस्थ पैदा होगा और आगे चल कर उसके दांत भी मजबूत निकलेंगे.देसी घी (Desi Ghee) वजन कम करने में भी है कारगर

घी वजन घटाने में भी कारगर है. एक शोध के मुताबिक जिन वजनदार लोगों ने छ: महीनों तक घी खाया उनका वजन घटा था. साथ ही जरूरी है कि नियमित तौर पर व्यायाम भी किया जाए.

इसके अलावा घी बालों के लिए बहुत फायदेमंद होता है. ये कंडीशनर की तरह काम कर सकता है. इससे बाल मुलायम और चमकदार बनते हैं.

ये बालों से रूसी भी हटाता है. इसके लिए गुनगुने घी में बादाम का तेल डाल कर मालिश करनी चाहिए. 15 मिनट के लिए छोड़ देना चाहिए और गुलाब जल से बाल धो लें ताकि तेल निकल जाए. इससे बाल खूबसूरत बनेंगे और रूसी खत्म होगी.

चमत्कारी चिरायता (Swertia) बुखार का जानी दुश्मन

चमत्कारी चिरायता (Swertia) बुखार का जानी दुश्मन……….

 

जुलाई से लेकर सितंबर-अक्टूबर और नवम्बर तक का समय बीमारियों के लिहाज से नाजुक होता है, इन दिनों बीमारियों से बचने के लिए महंगी दवाओं के स्थान पर घरेलू नुस्खे आजमाएं. इन्हीं घरेलू नुस्खों में एक है अनमोल चिरायता. बरसों से हमारी दादी-नानी कड़वे चिरायता (Swertia) से बीमारियों को दूर भगाती रही हैं, आप भी जानें इसके बारे में.

दरअसल यह कड़वा चिरायता (Swertia) एक प्रकार की जड़ीबूटी है जो कुनैन की गोली से अधिक प्रभावी होती है. पहले इस चिरायते को घर में सूखा कर बनाया जाता था लेकिन आजकल यह बाजार में कुटकी चिरायते के रूप में उपलब्ध है.चमत्कारी चिरायता (Swertia) बुखार का जानी दुश्मन

घर में चिरायता (Swertia) बनाने की विधि

100 ग्राम सूखी तुलसी के पत्ते का चूर्ण, 100 ग्राम नीम की सूखी पत्तियों का चूर्ण, 100 ग्राम चिरायते की सूखी टहनी का चूर्ण लीजिए. इन तीनों को समान मात्रा में मिलाकर एक बड़े डिब्बे में भर कर रख लीजिए.

यह तैयार चूर्ण मलेरिया या अन्य बुखार होने की स्थिति में दिन में तीन बार दूध से सेवन करें. मात्र दो दिन में आश्चर्यजनक लाभ होगा.

बुखार ना होने की स्थिति में इसका एक चम्मच सेवन प्रतिदिन करें. यह चूर्ण किसी भी प्रकार की बीमारी चाहे वह स्वाइन फ्लू ही क्यों ना हो, उसे शरीर से दूर रखता है. इसके सेवन से शरीर से सारे रोगाणु-कीटाणु झर जाते हैं. रक्त एवं त्वचा संबंधी समस्त विकार दूर होते हैं.

नोट – गर्भवती महिला और कमजोर पाचन शक्ति के लोग विशेषज्ञ से पूछ कर ही इसका सेवन करें. शरीर से हर तरह का विकार निकालता है.

राजमा (Red Kedney Bean) खाने के बेहतरीन फायदे

राजमा (Red Kedney Bean) खाने के बेहतरीन फायदे……….

 

भारत में राजमा (Red Kedney Bean) चावल के तो लोग दीवाने होते है. टेस्ट के साथ साथ ये स्वास्थ के लिए भी अच्छा है. इसे खाने से शरीर पुष्ट रहता है. कहते है सोया उत्पादों में प्रोटीन अधिक होता है, लेकिन मैं आपको बता दूँ राजमा प्रोटीन की खान है, इसमें सोया उत्पाद से भी अधिक प्रोटीन है. राजमा खाने में स्वादिष्ट लगने के साथ ही यह सेहत का भी खजाना है. दिल और दिमाग की सेहत बनी रहने के अलावा राजमा के सेवन से शरीर में ऊर्जा भी बनी रहती है.

राजमा (Red Kedney Bean) बच्चों को जरुर खिलाना चाहिए क्यूंकि इसमें सभी तरह के पोषक तत्व होते है जो बच्चों की बढ़ती की उम्र में बहुत जरुरी होते है, ये स्वादिष्ट नरम होता है जिसे बच्चे आसानी से चबा सकते है. इसे आप ग्रेवी वाली सब्जी के अलावा सलाद, सूप, पराठे व मिक्स वेज के रूप में भी अपने घर वालों को खिला सकती है, हर बार कुछ अलग बनाने से आपके घर वाले बोर नहीं होंगें व स्वाद लेकर खायेंगें लेकिन ध्यान रखें राजमा अच्छी तरह पका हुआ होना चाहिये नहीं तो ये पेट दर्द का कारण बन सकता है. राजमा (Red Kedney Bean) खाने के बेहतरीन फायदे

राजमा (Red Kedney Bean) खाने के बेहतरीन फायदे

मस्तिष्क के लिए असरदार :

राजमा खाने से दिमाग को बहुत फायदा होता है. इसमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन ‘के’ पाया जाता है. जोकि नर्वस सिस्टम को बूस्ट करने का काम करता है. साथ ही ये विटामिन ‘बी’ का भी अच्छा स्त्रोत है, जोकि मस्तिष्क की कोशिकाओं के लिए बहुत जरूरी है. ये दिमाग को पोषित करने का काम करता है.

ताकत का स्रोत :

राजमा में उच्च मात्रा में आयरन मौजूद होता है, जिस वजह से ये ताकत देने का काम करता है. शरीर के मेटाबॉलिज्म और ऊर्जा के लिए आयरन की जरूरत होती है, जो राजमा खाने से पूरी हो जाती है. साथ ही ये शरीर में ऑक्सीजन के सर्कुलेशन को भी बढ़ाता है.

पाचन क्रिया में सहायक :

राजमा में उच्च मात्रा में फाइबर होते हैं. जो पाचन क्रिया को सही बनाए रखते हैं. साथ ही ये ब्लड शुगर के स्तर को भी नियंत्रित रखने में मददगार होता है.

माइग्रेन की प्रॉब्लम खत्म करता है :

इसमें मौजूद फोलेट की मात्रा दिमाग के काम करने की क्षमता को बढ़ाने के साथ ही उसे दुरुस्त भी रखती है. मैग्नीशियम की मात्रा माइग्रेन जैसी गंभीर समस्या में राहत दिलाती है. हफ्ते में एक बार इसका सेवन बहुत ही फायदेमंद होता है.

कैंसर से बचाव :

राजमा में मौजूद मैंगनीज़, एंटी-ऑक्सीडेंट का काम करता है. यह फ्री रैडिकल्स को डैमेज होने से रोकता है. इसके साथ इसमें मौजूद विटामिन के की मात्रा सेल्स को बाहरी नुकसानदायक चीजों से बचाती है जो कैंसर का मुख्य कारण होते हैं.

कैलोरी की प्राप्ति :

राजमा में जिस मात्रा में कैलोरी मौजूद होती है वो हर आयु वर्ग के लिए सही होती है. आप चाहें तो इसे करी के अलावा सलाद और सूप के रूप में भी ले सकते हैं. ऐसे लोग जो अपने वजन को नियंत्रित करना चाहते हैं उनके लिए लंच में राजमा का सलाद और सूप लेना फायदेमंद रहेगा.

नर्वस सिस्टम के लिए अच्छा :

विटामिन के की पर्याप्त मात्रा ब्रेन के साथ ही नर्वस सिस्टम के लिए भी बहुत ही फायदेमंद होती है. राजमा में मौजूद थियामिन की मात्रा दिमाग की क्षमता बढ़ाती है. इससे अल्जाइमर जैसी बीमारी दूर रहती है और याददाश्त भी बढ़ती है.

शरीर की सफाई :

राजमा खाने से शरीर के अंदर मौजूद गंदगी बाहर निकलती है, क्योंकि इसमें मॉलिबडेनम पाया जाता है जिसका काम बॉडी को डिटॉक्सीफाई करना है. साथ ही कई प्रकार की एलर्जी को दूर करने के साथ ही सिरदर्द जैसी समस्या को भी कम करता है.

फाइबर की उचित मात्रा :

राजमा में उच्च मात्रा में फाइबर होते हैं. जो पाचन क्रिया को सही बनाए रखते हैं. साथ ही ये ब्लड शुगर के स्तर को भी नियंत्रित रखने में मददगार होता है.

इम्यून सिस्टम मज़बूत बनाएं :

राजमा में सिर्फ फाइबर और प्रोटीन ही नहीं होता बल्कि काफी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं. ये एंटीऑक्सीडेंट्स इम्यून सिस्टम को बढ़ाते हैं और फ्री रेडिकल्स से इसे मुक्त रखते हैं. ऐसा माना जाता है कि एंटीऑक्सीडेंट्स में एंटी-एजिंग तत्व भी पाए जाते हैं.

ब्लड शुगर में कण्ट्रोल :

राजमा में घुलनशील फाइबर पाए जाते हैं, जो शरीर में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा को कम करते हैं. राजमा प्रोटीन का भी बहुत अच्छा स्रोत होता है. ये दोनों ही मिलकर ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करते हैं.

कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण :

राजमा में उच्च मात्रा में मैग्नीशियम पाया जाता है. साथ ही ये कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी नियंत्रित करने का काम करता है. मैग्नीशियम की मात्रा दिल से जुड़ी बीमारियों से लड़ने में भी सहायक होती है.

हाइपरटेंशन कम करने में सहायक :

राजमा पोटाशियम और मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत है. साथ ही इसमें फाइबर और प्रोटीन भी पाया जाता है. ये सभी दिल की सेहत के लिए बहुत जरूरी पोषक तत्व माने जाते हैं. पोटाशियम और मैग्नीशियम रक्त वाहिकाओं में घुल जाते हैं जिससे कि ब्लड फ्लो आसान हो जाता है.

एनर्जी :

आयरन की भरपूर मात्रा लिए राजमा बॉडी को एनर्जी भी प्रदान करती है. इसके अलावा मैंगनीज़ की मौजूदगी भी मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करके एनर्जी बढ़ाने का काम करती है.

हड्डियों की मजबूती के लिए :

कमजोर हड्डियां ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी का कारण होती हैं. मजबूत हड्डियों के लिए कैल्शियम और मैंगनीज़ की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है जिसे राजमा खाकर पूरा किया जा सकता है. इसके साथ ही राजमा में फोलेट की मौजूदगी होमोसिस्टीन लेवल को कंट्रोल करती है, जो हड्डियों के टूटने की मुख्य वजह है.

वजन घटाने में सहायक :

वजन घटाने के तमाम प्रयासों से हार मान चुके हैं, तो हरी सब्जी बीन्स का सहारा लें. बीन्स से बने उत्पादों का सेवन करके आप अपना मोटापा घटा सकते हैं. बीन्स का इस्तेमाल आप किसी भी तरह कर सकते हैं. वजन नियंत्रित करना-बीन्स में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होता है, प्रति कप में 10 ग्राम. मोटे या आवश्यकता से अधिक वजन वाले लोग जो कम कैलोरी, उच्च प्रोटीन, उच्च फाइबर युक्त आहार लेते हैं, उनका वजन उन लोगों की तुलना में कम होता है जो नियमित तौर पर नियंत्रित मात्रा में कैलोरी, उच्च कार्बोहाइड्रेट और कम फैट वाला आहार लेते हैं.

मधुमेह के लिए लाभप्रद :

बीन्स का ‘ग्लाइसेमिक इन्डेक्स’ कम होता है इसका अभिप्राय यह है कि जिस तरह से अन्य भोज्य पदार्थों से रक्त में शक्कर का स्तर बढ़ जाता है, बीन्स खाने के बाद ऐसा नहीं होता. बीन्स में मौजूद फाइबर रक्त में शक्कर का स्तर बनाए रखने में मदद करते हैं. और बीन्स की इस ख़ासियत की वजह से मधुमेह के रोगियों को बीन्स खाने की सलाह देते हैं. ऐसे उदाहरण भी हैं कि बीन्स का ज़ूस शरीर में इन्सुलिन के उत्पादन को बढ़ावा देता है. इस वजह से जिन्हें मधुमेह है या मधुमेह का खतरा है उनके लिये बीन्स खाना बहुत लाभदायक है. बीन्स का ज़ूस उत्तेजक ( स्टिम्युलेंट) होता है इसकी इसी प्रकृति के कारण यह उन लोगों को बहुत फ़ायदा करता है जो लंबी बीमारी से जूझ रहे हैं या जो बीमारी पश्चात पूर्ण स्वास्थ्य लाभ चाहते हैं.

राजमा में भरपूर मात्रा में आयरन होता है. आयरन शरीर का मेटाबॉलिज्म और ऊर्जा बढ़ाने का मुख्य सोर्स होता है. इससे पूरे शरीर में ऑक्सीजन का सर्कुलेशन भी काफी बढ़ जाता है. इसलिए व्यक्ति खुद को ऊर्जावान महसूस करता है. राजमा को आप आज से ही हफ्ते में एक बार खाने की आदत डालें.

शिलाजीत (Shilajit) बढ़ती उम्र में त्वचा को जवां बनाये रखता है

शिलाजीत (Shilajit) बढ़ती उम्र में त्वचा को जवां बनाये रखता है……

 

कामेच्छा बढ़ाने के लिए अक्सर लोग शिलाजीत का प्रयोग करते हैं. आयुर्वेद में भी सेक्स पावर बढ़ाने के लिए शिलाजीत की बात की गई है. लेकिन कई शोध बताते हैं कि इससे ना केवल सेक्स पावर बढ़ती है बल्कि तनाव भी दूर होता है. साथ ही बढ़ती उम्र में त्वचा को जवां बनाती है शिलाजीत. जानिए और क्या हैं फायदे?

जानवरों पर किए गए शोध से पता चला है कि कैसे यह दिल को सुरक्षित रखने में मदद करता है. इसके प्रयोग के बाद पाया गया कि जानवरों के दिल को कम ही नुकसान हुआ था.

इस के प्रयोग से हड्डियों की बीमारियां भी खत्म होती है जैसे जोड़ों का दर्द और गठिया आदि.
भरपूर मात्रा में प्रोटीन और विटामिन होने से यह तुंरत ऊर्जा देता है.

उम्र बढ़ने पर त्वचा पर झुर्रियां आनी लगती है. ऐसे में मूसली और इस को साथ लेने से फायदा होता है.

यदि आपको तनाव है तो यह बहुत फायदेमंद हो सकता है. शिलाजीत से तनाव को पैदा करने वाले हार्मोन्स संतुलित हो जाते हैं जिससे तनाव से निपटा जा सकता है.

शिलाजीत (Shilajit) बढ़ती उम्र में त्वचा को जवां बनाये रखता है

एंटी एजिंग (Shilajit for Anti-Aging)

इस के सेवन से एजिंग की प्रक्रिया धीमी हो जाती है. अगर आप समय से पहले बूढ़े या थके-थके नजर आ रहे हैं तो शिलाजीत का सेवन करें. इसमें 85 फीसदी से ज्यादा मिनरल्स पाए जाते हैं जो बिमारियों को दूर भगाते हैं और रोग प्रतिरोधी क्षमता को मजबूत करते हैं. यह हड्डियों में कैल्शियम बनाकर हड्डियों को मजबूत बनाती है.

यौन शक्तिवर्द्धक (Shilajit for Sex Desire Stimulation)

इस को इंडियन वियाग्रा कहा जाता है. शीघ्र स्खलन (Early Ejaculation) और ऑर्गेज्म (Orgasm) सुख से वंचित लोगों में यह कामोत्तेजना बढ़ाने का काम करता है.

सदियों से आयुर्वेद में शिलाजीत को यौन शक्ति वर्द्धक दवा के रुप में इस्तेमाल किया जा रहा है. यह पुरुषों में वीर्य की संख्या बढ़ाता है और सेक्स हार्मोन को भी नियंत्रित करता है.

तनाव और मानसिक थकावट (Shilajit for Tension and Mental Tiredness)

इस के सेवन से नर्वस सिस्टम सही से काम करता है. मानसिक थकावट, अवसाद, तनाव और चिंता से लड़ने के लिए शिलाजीत का सेवन करना चाहिए. इससे स्मरण शक्ति भी बढ़ती है, किसी भी काम करने में मन लगता है. दिमागी ताकत के लिए प्रतिदिन एक चम्मच मक्खन के साथ शिलाजीत का सेवन लाभदायक होता है .

दिल के सेहत का भी रखता ख्याल (Shilajit for Heart Health)

यह दिल के सेहत के लिए भी अच्छा है. दिल के साथ-साथ यह रक्त चाप को भी नियंत्रित करता है.

पाचनतंत्र के लिए (Shilajit for Digestive System)

यह शरीर के पाचन तंत्र को भी मजबूत करता है. इसके सेवन से अपच, गैस, कब्ज और पेट के दर्द जैसी बिमारियां खत्म होती हैं.
किडनी और अंत:स्राव ग्रंथि (Shilajit for Kidney and Endocrine Glands)

इस के सेवन से किडनी, पैनक्रियाज और थायराइड ग्लैंड भी सही से काम करते हैं. यह ब्लड सर्कुलेशन के लिए भी अच्छा है.

डायबिटीज (Shilajit for Diabetes)

इसके सेवन से डायबिटीज भी कंट्रोल में रहता है. यह रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है और शरीर से हानिकारक टॉक्सिंस बाहर निकालने का काम करती है.

घुटनों का दर्द (Knee Pain) नाशक असरकारक घरेलू उपाय

घुटनों का दर्द (Knee Pain) नाशक असरकारक घरेलू उपाय………

 

घुटनों का दर्द (Knee Pain) एक भयानक रोग है. आजकल यह रोग आम समस्या बन चुका है. पहले तो यह सिर्फ बुजुर्गों में ही होता था. लेकिन अब ये रोग जवान लोगों को भी अपना शिकार बना रहा है. एक कडवा सच तो ये है कि इसका कोई सम्पूर्ण इलाज भी नहीं है. दर्द निवारक घुटनों के दर्द में कुछ समय तो आराम दिला सकते है. लेकिन वे इस बिमारी का सही इलाज नहीं है. कुछ समय के बाद दर्द रूपी सांप फिर से अपना फन उठा लेता है.

लेकिन आयुर्वेद में इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए बहुत से उपाय दिए गये है. ये नुस्खे न सिर्फ दर्द से राहत दिलाएंगे बल्कि इस रोग को जड़ से ख़त्म भी करेंगे. फिर से दोबारा आपको इनसे समस्या नहीं आएगी.घुटनों का दर्द (Knee Pain) नाशक असरकारक घरेलू उपाय

आज का ये पेपर इसी समस्या को ध्यान में रखकर किया गया है. आज हम आपको घुटनों का दर्द (Knee Pain) खत्म करने के कुछ अचूक व प्रभावशाली घरेलू नुस्खे बता रहे हैं. जिनका उपयोग करने से आपको 7 से 15 दिन में ही घुटनों के दर्द से राहत की साँस मिल जाएगी. तो चलिए जानते है इन घुटनों के दर्द से राहत दिलाने वाले चमत्कारी उपायों के बारे में.

हल्दी का लेप

एक छोटा चम्मच हल्दी पाउडर लेंकर इसमें बूरा या शहद मिला लें. अब इसमें एक चुटकी चूना मिला दें. अब थोड़ा सा पानी मिलाकर कर पेस्ट तैयार कर लें. इस लेप को घुटनों पर अच्छी तरह से लगाकर. इस पर पटटी बांध ले. रातभर ऐसे ही रहने दें. सुबह होने पर पानी से धो ले. इसको लगभग 7 दिन से 15 दिन तक लगाने से घुटने की सूजन, मांसपेशियों में खिंचाव, अंदरुनी दर्द से राहत मिलती है. इससे आपका दर्द हमेशा के लिए दफन हो जायेगा.

सौंठ का लेप

सौंठ भी एक बहुत ही अच्छा दर्द निवारक है. एक चम्मच सौंठ का पाउडर व थोड़ा सा तिल का तेल ले. अब दोनों को मिलाकर पेस्ट बना ले. दर्द के स्थान पर दर्द निवारक सौंठ के पेस्ट को लगाएं. 2 से 3 घंटे तक ऐसे ही लगा रहने दें. इसके बाद इसे पानी से धो लें. लगभग 1 सप्ताह में घुटने के दर्द से आराम मिल जायेगा. मांसपेशियों का खिंचाव भी ठीक हो जाता है.

खजूर से घुटने के दर्द का इलाज

सर्दियों के मौसम में हर रोज 5-6 खजूर बहुत ही लाभदायक होता है. रात को 6-7 खजूर पानी में भिगो दें. सुबह खाली पेट इन खजूर को खा ले. साथ ही पानी भी पी ले. इस उपाय से घुटनों के दर्द के अलावा जोड़ों के दर्द में भी आश्चर्यजनक आराम मिलता है.