अदरक को इस तरह प्रयोग करने से ये महा-औषधि बन जाता है, करता है इन बड़े रोगों का सफ़ाया

अदरक को इस तरह प्रयोग करने से ये महा-औषधि बन जाता है, करता है इन बड़े रोगों का सफ़ाया…………

 

अदरक में अनेक औषधीय गुण होने के कारण आयुर्वेद में इसे महा औषधि माना गया है। यह गर्म, तीक्ष्ण, भारी, पाक में मधुर, भूख बढ़ाने वाला, पाचक, चरपरा, रुचिकारक, त्रिदोष मुक्त यानी वात, पित्त और कफ नाशक होता है।

वैज्ञानिकों के मतानुसार अदरक की रसायनिक संरचना में 80 प्रतिशत भाग जल होता है, जबकि सोंठ में इसकी मात्रा लगभग 10 प्रतिशत होती है। इसके अलावा स्टार्च 53 प्रतिशत, प्रोटीन 12.4 प्रतिशत, रेशा (फाइबर) 7.2 प्रतिशत, राख 6.6 प्रतिशत, तात्विक तेल (इसेन्शियल ऑइल) 1.8 प्रतिशत तथा औथियोरेजिन मुख्य रूप में पाए जाते हैं।

अदरक को सुखाने पर जो प्राप्त होता है उससे सौंठ कहते है। सोंठ में प्रोटीन, नाइट्रोजन, अमीनो एसिड्स, स्टार्च, ग्लूकोज, सुक्रोस, फ्रूक्टोस, सुगंधित तेल, ओलियोरेसिन, जिंजीवरीन, रैफीनीस, कैल्शियम, विटामिन `बी` और `सी`, प्रोटिथीलिट एन्जाइम्स और लोहा भी मिलते हैं। प्रोटिथीलिट एन्जाइम के कारण ही सोंठ कफ हटाने व पाचन संस्थान में विशेष गुणकारी सिद्ध हुई है।

अदरक के चमत्कारी  अद्भुत फ़ायदे :-

बालों के रोग :-

अदरक और प्याज का रस सेंधानमक के साथ मिलाकर गंजे सिर पर मालिश करें, इससे गंजेपन से राहत मिलती है।

हाथ-पैर सुन्न हो जाना :-

सोंठ और लहसुन की एक-एक गांठ में पानी डालकर पीस लें तथा प्रभावित अंग पर इसका लेप करें।

सुबह खाली पेट जरा-सी सोंठ और लहसुन की दो कली प्रतिदिन 10 दिनों तक चबाएं।

नजला, नया जुकाम :-

सौंठ और गुड़ पानी में डालकर उबाल लें। जब चौथाई रह जाए तब सुहाता-सुहाता छानकर पी जाएं। गले में ठंडक और खराश होने पर अदरक चूसें अथवा अदरक के छोट-छोटे टुकड़े, अजवायन, दाना मेथी और हल्दी प्रत्येक आधा-आधा चम्मच भरकर एक गिलास पानी में उबालें। जब आधा पानी शेष रह जाए तब स्वादानुसार जरा-सा गुड़ मिलाकर छानकर रात को सोते समय यह काढ़ा पी कर सो जाएं।

कब्ज :-

अदरक का रस 10 मिलीलीटर को थोड़े-से शहद में मिलाकर सुबह पीने से शौच खुलकर आती है। और यदि एक कप पानी में एक चम्मच भर अदरक को कूटकर पानी में 5 मिनट तक उबाल लें। छानकर पीने से कब्ज नहीं रहती है।

सफेद दाग :-

30 मिलीलीटर अदरक का रस और 15 ग्राम बावची को एक साथ मिलाकर और भिगोकर रख दें। जब अदरक का रस और बावची दोनों सूख जायें तो इन दोनों के बराबर लगभग 45 ग्राम चीनी को मिलाकर पीस लें। अब इसकी एक चम्मच की फंकी को ठंडे पानी से रोजाना 1 बार खाना खाने के एक घंटे के बाद लें।

सिर का दर्द :-

अदरक के रस और दूध को बराबर मात्रा में मिलाकर सूंघने से सिर का दर्द दूर हो जाता है। या अदरक का रस, गुड़, सेंधानमक और पीपल को एक साथ घिस लें और पानी के साथ सूंघने से सिर की सभी बीमारियां ठीक हो जाती हैं।

मस्सा और तिल :-

अदरक के एक छोटे से टुकड़े को काटकर छील लें और उसकी नोक बना लें। फिर मस्से पर थोड़ा सा चूना लगाकर अदरक की नोक से धीरे-धीरे घिसने से मस्सा बिना किसी आप्रेशन के कट जायेगा और त्वचा पर कोई निशान भी नहीं पडे़गा। बस शुरू में थोड़ी सी सूजन आयेगी।

गठिया :-

10 ग्राम सोंठ 100 मिलीलीटर पानी में उबालकर ठंडा होने पर शहद या शक्कर मिलाकर सेवन करने से गठिया रोग दूर हो जाता है।

जोड़ों का दर्द :-

अदरक के एक किलोग्राम रस में 500 मिलीलीटर तिल का तेल डालकर आग पर पकाना चाहिए, जब रस जलकर तेल मात्र रह जाये, तब उतारकर छान लेना चाहिए। इस तेल की शरीर पर मालिश करने से जोड़ों की पीड़ा मिटती है।

दमा :-

लगभग एक ग्राम अदरक के रस को एक ग्राम पानी से सुबह-शाम लेने से दमा और श्वास रोग ठीक हो जाते हैं।

हृदय रोग :-

अदरक का रस तथा शहद, दोनों को मिलाकर नित्य उंगली से धीरे-धीरे चाटें। दोनों की मात्रा आधा-आधा चम्मच होनी चाहिए। इससे हृदय रोग में लाभ मिलता है।

बवासीर :-

अदरक 500 ग्राम और पीपल 250 ग्राम को मिलाकर पेस्ट बनाकर इसे 500 ग्राम घी में पकायें। कालीमिर्च, चाव-चितावर, नाग केसर, पीपलामूल, इलायची, अजमोद, कालाजीरा और हर्रे।

सब थोड़े-थोड़े से बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनायें। अदरक और पीपल से बने पेस्ट को इस चूर्ण के साथ मिलाकर इसमें 1 किलो गुड़ की चासनी बनाकर डालें।

गुड़ और बाकी पेस्ट से बने गाढ़े चासनी को 60 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम खाने से पाक बवासीर, कामला, अरुचि और मंदाग्नि बवासीर ठीक होता है।

एलर्जी :-

अदरक के रस में थोड़ा-सा जीरा तथा पुराना गुड़ मिलाकर सेवन करने से एलर्जी के रोग में लाभ होता है।

जुकाम :-

10 ग्राम अदरक को 10 ग्राम गुड़ के साथ मिलाकर थोड़ा सा गर्म करके रोजाना रात को सोते समय खाने से बार-बार जुकाम होने का रोग ठीक हो जाता है। इसको खाने के बाद पानी नहीं पीना चाहिए।

पेट के सभी प्रकार के रोग :-

पिसी हुई सोंठ एक ग्राम, जरा-सा हींग और सेंधानमक को पीसकर चूर्ण बनाकर गर्म पानी के साथ फंकी के रूप में सेवन करने से पेट के दर्द में लाभ होता है।

हाजमे की खराबी :-

अदरक का रस आधा चम्मच, सेंधानमक 1 चुटकी और नींबू का आधा चम्मच रस को मिलाकर सुबह और शाम खाना खाने के बाद सेवन करने से हाजमे की खराबी में लाभ होता है।

कान का दर्द :-

कान में मैल जमने के कारण, सर्दी लगने के कारण, फुंसियां निकलने के कारण या चोट लगने के कारण कान में दर्द हो रहा हो तो अदरक के रस को कपड़े में छानकर हल्का सा गर्म करके 3-4 बूंदें कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है। अगर पहली बार डालने से दर्द नहीं जाता तो इसे दुबारा डाल सकते हैं।

कमर दर्द :-

10 मिलीलीटर अदरक के रस में 5 ग्राम घी मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से कमर दर्द में लाभ करता है।

मासिक-धर्म की अनियमितता :-

अजवायन का चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में गर्म दूध के साथ सेवन करने से रुका हुआ मासिक धर्म नियमित रूप से आना शुरू हो जाता है।

दस्त :-

रात को सोने से पहले अदरक को पानी में डाल दें, सुबह इसे निकालकर साफ पानी के साथ पीसकर घोल बनाकर 1 दिन में 3 से 4 बार पीने से अतिसार (दस्त) समाप्त हो जाता है।

मसूढ़ों से खून आना :-

मसूढ़े में सूजन हो या मसूढ़ों से खून निकल रहा हो तो अदरक का रस निकालकर इसमें नमक मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम मसूढ़ों पर मलें। इससे खून का निकलना बंद हो जाता है।

निमोनिया :-

एक-एक चम्मच अदरक और तुलसी का रस शहद के साथ देने ये निमोनिया का रोग दूर होता है।

गैस का बनना :-

अदरक 3 ग्राम, 10 ग्राम पिसा हुआ गुड़ के साथ सेवन करने से अफारा या पेट की गैस को समाप्त करता है।

आधे सिर का दर्द, गर्दन का दर्द, मांसपेशियों का दर्द :-

यदि उपरोक्त कष्ट अपच, पेट की गड़बड़ी से उत्पन्न हुए हो तो सोंठ को पीसकर उसमें थोड़ा-सा पानी डालकर लुग्दी बनाकर तथा हल्का-सा गर्म करके पीड़ित स्थान पर लेप करें।

इस प्रयोग से आरम्भ में हल्की-सी जलन प्रतीत होती है, बाद में शाघ्र ही ठीक हो जाएगा। यदि जुकाम से सिरदर्द हो तो सोंठ को गर्म पानी में पीसकर लेप करें। पिसी हुई सौंठ को सूंघने से छीके आकर भी सिरदर्द दूर हो जाता है।

हिचकी :-

अदरक के बारीक टुकड़े को चूसने से हिचकी जल्द बंद हो जाती है।

घी या पानी में सेंधानमक पीसकर मिलाकर सूंघने से हिचकी बंद हो जाती है।

पेट दर्द :-

अदरक के रस में नींबू का रस मिलाकर उस पर कालीमिर्च का पिसा हुआ चूर्ण डालकर चाटने से पेट के दर्द में आराम मिलता है।

किन्हे अदरक का सेवन करने से परहेज़ करना चाहिए :-

अदरक की प्रकृति गर्म होने के कारण जिन व्यक्तियों को ग्रीष्म ऋतु में गर्म प्रकृति का भोजन न पचता हो, कुष्ठ, पीलिया, रक्तपित्त, घाव, ज्वर, शरीर से रक्तस्राव की स्थिति, मूत्रकृच्छ, जलन जैसी बीमारियों में इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

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नस पर नस चढ़ना या मांसपेशियों की ऐंठन का रामबाण घरेलु उपचार, जानिये और शेयर कीजिये

नस पर नस चढ़ना या मांसपेशियों की ऐंठन का रामबाण घरेलु उपचार, जानिये और शेयर कीजिये……….

 

हमारा शरीर कई तरह की हड्डियों और मांसपेशियों से बना रहता है। स्वस्थ शरीर के लिए हड्डियों का मजबूत होना भी काफी जरूरी होता है। हम आपको बता दें कि कई बार ऐसा होता है कि हमारे शरीर के किसी हिस्से की नस चढ़ जाती है, जो कि हमें काफी तकलीफ देती है। यह परेशानी ज्यादातर पैरों, बाजुओं और टांगों में देखने को मिलती है।

नस पर नस चढ़ना एक बहुत साधारण सी प्रक्रिया है, लेकिन जब भी शरीर में कहीं भी नस पर नस चढ़ना जाए, जान ही निकाल देती है और अगर रात को सोते समय पैर की नस पर नस चढ़ना जाए तो व्यक्ति चकरघिन्नी की तरह घूम कर उठ बैठता है।

नस पर नस चढ़ने के लक्षण :-

दो से पांच मिनिट तक पैर की नसों में जकड़न रहना और बहुत तेज दर्द होना। रात को सोते समय अक्सर कई लोगो को ये पैर पर नस चढ़ने की शिकायत रहती है, और ये दर्द बहुत ज्यादा और असहानीय होता है।

पैर पर नस चढ़ने के कारण :-

डायरिया, डाईयूरेटिक, डाइबिटीज, डीहाइड्रेशन, एल्कोहोल का जयादा से ज्यादा सेवन कारना, ज्यादा थकान रहना, बीपी की गोली या गर्भनिरोधक गोलिया खाना आदि।

नस पर नस चढ़ने के कुछ घरेलू उपचार :-

आप लंबाई में अपने शरीर को आधा आधा दो भागों में चिन्हित करें, अब जिस भाग में नस चढ़ी है उसके विपरीत भाग के कान के निचले जोड़ पर उंगली से दबाते हुए उंगली को हल्का सा ऊपर और हल्का सा नीचे की तरफ बार बार 10 सेकेंड तक करते रहें, नस उतर जाएगी।

अगर आपकी नस पर नस चढ़ जाती है तो आप जिस पैर की नस चढ़ी है तो उसी तरफ के हाथ की बीच की ऊँगली के नाखून के नीचे के भाग को दबाए और छोड़ें ऐसा जब तक करें जब तक ठीक न हो जाए।

सोते समय पैरों के नीचे मोटा तकिया रखकर सोएं।

आराम करें। पैरों को ऊंचाई पर रखें।

प्रभाव वाले स्थान पर बर्फ की ठंडी सिकाई करे। सिकाई 15 मिनट, दिन में 3-4 बार करे।

अगर गर्म-ठंडी सिकाई 3 से 5 मिनट की (दोनों तरह की बदल- बदल कर) करें तो इस समस्या और दर्द – दोनों से राहत मिलेगी

आहिस्ते से ऎंठन वाली पेशियों, तंतुओं पर खिंचाव दें, आहिस्ता से मालिश करें।

वेरीकोज वेन के लिए पैरों को ऊंचाई पर रखे, पैरों में इलास्टिक पट्टी बांधे जिससे पैरों में खून जमा न हो पाए।

यदि आप मधुमेह या उच्च रक्तचाप से ग्रसित हैं, तो परहेज, उपचार से नियंत्रण करें।

शराब, तंबाकू, सिगरेट, नशीले तत्वों का सेवन नहीं करें।

सही नाप के आरामदायक, मुलायम जूते पहनें।

अपना वजन घटाएं। रोज सैर पर जाएं या जॉगिंग करें। इससे टांगों की नसें मजबूत होती हैं।

फाइबर युक्त भोजन करें जैसे चपाती, ब्राउन ब्रेड, सब्जियां व फल। मैदा व पास्ता जैसे रिफाइंड फूड का सेवन न करें।

लेटते समय अपने पैरों को ऊंचा उठा कर रखें। पैरों के नीचे तकिया रख लें, इस स्थिति में सोना बहुत फायदेमंद रहता है।

भोजन :-

भोजन में नीबू-पानी, नारियल-पानी, फलों – विशेषकर मौसमी, अनार, सेब, पपीता केला आदि शामिल करें। सब्जिओं में पालक, टमाटर, सलाद, फलियाँ, आलू, गाजर, चाकुँदर आदि का खूब सेवन करें। 2-3 अखरोट की गिरि, 2-5 पिस्ता, 5-10 बादाम की गिरि, 5-10 किशमिश का रोज़ सेवन करें।

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अगर इस तरीके से खाएंगें तिल, तो आपको इन 15 रोगों से मिलेगा छुटकारा

अगर इस तरीके से खाएंगें तिल, तो आपको इन 15 रोगों से मिलेगा छुटकारा……..

 

तिलों में कई प्रकार के प्रोटीन, कैल्शियम, बी काम्लेमिक्स और कार्बोहाइट्रेड आदि तत्वन पाये जाते हैं। तिल में मोनो-सैचुरेटेड फैटी होता है जो शरीर से बैड कोलेस्ट्रोल को कम करके गुड कोलेस्ट्रोल यानि एच.डी.एल. को बढ़ाने में मदद करता है। यह हृदय रोग, दिल का दौरा और धमनीकलाकाठिन्य (atherosclerosis) के संभावना को कम करता है। तिलों का सेवन करने से तनाव दूर होता है और मानसिक दुर्बलता नही होती। प्राचीन समय से खूबसूरती बनाये रखने के लिए तिलों का प्रयोग किया जाता रहा है। तिलों का तेल भी बहुत फायदेमंद होता है

तिल के प्रकार :-

तिल तीन प्रकार के होते हैं – काले, सफेद और लाल। लाल तिल का प्रयोग कम किया जाता है। काले तिलों का प्रयोग भारतीय समाज में पूजा पाठ में होता आया है। और काले तिल ही सेहत के लिए कारगर होते हैं। भारतीय खानपान में तिलों का बहुत महत्व है। सर्दियों के मौसम में तिल खाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है और शरीर सक्रिय रहता है।

तिल के औषधीय गुण :-

तिलों में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होता है। और इसमें विटामिन बी भी पाया जाता है। कफ जैसी बीमारी को दूर करने में तिल का सेवन करना फायदेमंद है। तिलों के सेवन से भूख बढ़ती है। और यह आपके नर्वस सिस्टम को बल देता है। यह वात, पित्त और कफ को नष्ट करता है। तिलों का तेल शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद है। क्योंकी यह एक आक्सीडेंट है।

तिल के तेल से शरीर में मालिश करने से शरीर में बुढ़ापा जल्दी नहीं आता। इसकी मालिश करने से थकावट भी दूर होती है। यह बालों को काला, घना और मजबूत बनाता है। यह त्वचा को सनबर्न से मुक्ति दिलाता है। सर्दियों में तिल के तेल को त्वचा पर लगाने से त्वचा का रूखापन दूर होता है। और चेहरे में कांती आती है।

सर्दी के मौसम में तिल खाने का तरीका :-

सर्दी के मौसम में तिल का उपयोग जरूर करना चाहिए। तिल और गुड़ के लडडू बना कर खा सकते है। तिलपपड़ी , तिलमावा बाटी, गजक, रेवड़ी आदि के रूप में तिल खाये जा सकते है। सब्जी में डालकर इसका उपयोग कर सकते है। गुजराती व्यंजन जैसे मुठिये , हांडवा , पातरा आदि में तिल का उपयोग किया जा सकता है। तिल का पेस्ट बनाकर ताहिनी सॉस बनाई जा सकती है।

तिल इन रोगों में फायदेमंद :-

कैंसर :-

तिल में सेसमीन नाम का एन्टीऑक्सिडेंट होता है जो कैंसर के कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ है और उसके जीवित रहने वाले रसायन के उत्पादन को भी रोकने में मदद करता है। यह फेफड़ों का कैंसर, पेट के कैंसर, ल्यूकेमिया, प्रोस्टेट कैंसर, स्तन कैंसर और अग्नाशय के कैंसर के प्रभाव को कम करने में बहुत मदद करता है।

तनाव :-

इसमें नियासिन नाम का विटामिन होता है जो तनाव और अवसाद को कम करने में मदद करता है।

हृदय :-

तिल में ज़रूरी मिनरल जैसे कैल्सियम, आयरन, मैग्नेशियम, जिन्क, और सेलेनियम होता है जो हृदय के मांसपेशियों को सुचारू रूप से काम करने में मदद करता है और हृदय को नियमित अंतराल में धड़कने में मदद करता है।

शिशु की हड्डियां :-

तिलों में डायटरी प्रोटीन और एमिनो एसिड होता है जो बच्चों के हड्डियों के विकसित होने में और मजबूती प्रदान करने में मदद करता है। उदाहरणस्वरूप 100ग्राम तिलों में लगभग 18 ग्राम प्रोटीन होता है, जो बच्चों के विकास के लिए बहुत ज़रूरी होता है।

मधुमेह :-

डिपार्टमेंट ऑफ बायोथेक्सनॉलॉजी विनायक मिशन यूनवर्सिटी, तमिलनाडु के अध्ययन के अनुसार यह उच्च रक्तचाप को कम करने के साथ-साथ इसका एन्टी ग्लिसेमिक प्रभाव रक्त में ग्लूकोज़ के स्तर को 36% कम करने में मदद करता है जब यह मधुमेह विरोधी दवा ग्लिबेक्लेमाइड से मिलकर काम करता है। इसलिए टाइप-2 मधुमेह रोगी के लिए यह मददगार साबित होता है।

खुनी बवासीर :-

50 ग्राम काले तिलों को सोखने योग्य पानी में भिगोये। लगभग 30 मिनट जल में भीगे रहने के बाद उन्हें पीसकर उसमें लगभग एक चम्मच मक्खन एंव दो चम्मच मिश्री मिला दें। इसका प्रतिदिन दो बार सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ होता है।

पेट दर्द :-

20-25 ग्राम साफ तिल चबाकर उपर से गर्म पानी पिलाने से पेट का दर्द ठीक हो जाता है। साथ ही तिलों को पीसकर लम्बा सा गोला बनाकर उसे तवे पर सहन करने योग्य करके पेट के उपर फिराने से अत्यन्त से अत्यन्त कष्टदायी पेट का दर्द भी शान्त हो जाता है।

खूनी दस्त रक्तातिसार :-

काले तिल एक भाग में मिश्री 5 भाग मिलाकर पीसकर बकरी के दूध के साथ देने से रक्तातिसार में लाभ हो जाता है।

कब्ज :-

लगभग 60 ग्राम तिल लेकर उन्हे कूट लें फिर उनमें कोई मिष्ठान मिला लें। इसे खाने से कब्ज का नाश होता है

बालों में रूसी होना :-

बालो में तिल के तेल की मालिश कर लगभग 30 मिनट के पश्चात गर्म पानी में भीगी एंव निचोडी हुई तौलिया सिर पर लपेंटें। तौलिया के ठंडे होने पर पुनः तौलिया गर्म जल में भिगोकर निचोड़कर सिर पर लपेटे। यह क्रिया लगभग 5 मिनट तक करे। फिर कुछ देर के बाद शीतल जल से सिर धो लेने पर रूसी दूर हो जायेगी ।

सुखी खाँसी :-

यदि सर्दी के कारण सूखी खासी हो तो 4-5 चम्मच मिश्री एंव इतने ही तिल मिश्रित कर ले। इन्हे एक गिलास मे आधा पानी रहने तक उबाले। इसे प्रतिदिन प्रातः साय एंव रात्री के समय पीये।

आग से जलना :-

तिल जल में चटनी की भाती पीस लें। इस का दग्ध जले स्थान पर मोटा लेप करने से जलन शान्त हो जाती है।

मोच आना :-

तिल की खल लेकर उसे पीसे एंव पानी मे गर्म करे फिर उतारकर गर्म ही मोच आये स्थान पर बाधने से मोच के दर्द में लाभ होता है।

मानसिक दूर्बलता :-

तिल गुड दोनो सम मात्रा में लेकर मिला लें।उसके लड्डू बना ले। प्रतिदिन 2 बार 1-1 लड्डू दूध के साथ खाने से मानसिक दुर्बलता एंव तनाव दूर होते है। शक्ति मिलती है। कठिन शारीरिक श्रम करने पर सांस फूलना जल्दी बुढ़ापा आना बन्द हो जाता है।

दंत चिकित्सा :-

प्रातः काल तथा साय काल लगभग 50-50 ग्राम की मात्रा में (बिना मिठा मिलाये) धीरे धीरे काले तिल चबाकर उपर से पानी पीने से दात मजबूत मल रहित हो जाते है। और हिलते हुए दात भी पुनः जम जाते है।

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चर्म रोग दूर करने के रामबाण आयुर्वेदिक व घरेलू उपचार, जानिये और शेयर कीजिये

चर्म रोग दूर करने के रामबाण आयुर्वेदिक व घरेलू उपचार, जानिये और शेयर कीजिये…………..

 

चर्म रोग बेहद गंभीर रोग है जिसमें त्वचा में दाद के काले निशान पड़ जाते हैं। इसे एक्जिमा भी कहा जाता है। चर्म रोग कई प्रकार के होते हैं। इस तरह के सभी रोग परेशान करने वाले होते हैं। इन रोगों का यदि ठीक समय पर इलाज न किया गया, तो परेशानी बढ़ जाती है। इनके पास दूसरे लोग बैठने से घबराते हैं।

परंतु इतना परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है। इन रोगों में ज्यादातर साफ सफाई रखने की जरूरत होती है। वरना ये खुद आपके ही शरीर पर जल्द से जल्द फैल सकते हैं। आपके द्वारा इस्तेमाल की गई चीजें अगर दूसरे लोग इस्तेमाल करते हैं, तो उन्हें भी यह रोग लग सकता है। ये रोग रक्त की अशुद्धि से भी होता है।

इस रोग के कारण कई तरह की परेशानीयों को झेलना पड़ता है। बारिश और गर्मी के मौसम में इस रोग का सामना अधिक करना पड़ता है। इस रोग में त्वचा पर खुजली, दर्द, फोड़े, फुंसी, खसरा, छालें और जलन होती रहती है। आखिर क्यों होता है चर्म रोग ये भी जानना जरूरी है। ताकि समय रहते इस रोग से बचा जा सके। तो चलिए जाने चर्म रोग के कारण, लक्षण और उपचार के बारे में।

चर्म रोग के कारण :-

रसायनिक चीजों का ज्यादा प्रयोग करना जैसे साबुन, चूना, सोड़ा और डिटर्जेट का अधिक इस्तेमाल करना।

पेट में कब्ज का अधिक समय तक होने से भी चर्म रोग होता है।

रक्त विकार होने की वजह से भी चर्म रोग होता है।

महिलाओं में मासिकधर्म की परेशानी की वजह से भी उन्हें एक्जिमा हो सकता है।

किसी एक्जिमा पीड़ित इसान के कपड़े पहनने से भी। यह रोग हो सकता है।

अधिक समय धूप में बिताने वाले लोगों को चर्म रोग का खतरा अधिक होता है।

शरीर पर अधिक समय तक धूल, मिट्टी और पसीना जमने पर चर्म रोह हो सकता है।

आहार लेने के तुरंत बाद एक्सरसाइज करने से चर्म रोग होने की संभावना अधिक होती है।

चर्म रोग के लक्षण :-

एक्जिमा रोग में त्वचा पर छोटे.छोटे दाने निकलने लगते हैं। और फिर ये लाल रंग में बदलने लगते हैं और इनमें खुजली होती रहती है। और खुजलाने से जलन होती है फिर ये दाग के रूप में त्वचा में फैलने लगता है। गर्मी और बरसात के मौसम में चर्म रोग होने की संभावना अधिक रहती है। यदि सारे शरीर में एक्जिमा होता है उससे रोगी को बुखार भी आने लगता है।

चर्म रोग के उपचार :-

नीम का प्रयोग :-

नहाने से पहले नीम के पत्तों को पानी में उबाल लें फिर उस पानी को नहाने वाले पानी के साथ मिला कर स्नान करें। इससे आपको चर्म रोग में फायदा मिलेगा। इसके इलावा नीम के नये हरे पत्तों का सेवन सुबह खाली पेट करने से त्वचा के रोगों को मुक्ति मिलती है।

मूली के पत्तों का प्रयोग :-

मूली के पत्ते चरम रोग में लाभकारी होते हैं। जब आप चर्म रोग से परेशान होते हैं तब आपको मूली के पत्तों का रस अपने शरीर पर लगाना चाहिए। आप इसका प्रयोग नियमित रूप से करते हो तब आपको कुछ ही समय में चरम रोग से राहत मिल जाती है। इसके इलावा आप मूली का सेवन भी कर सकते हो। मूली में मैग्नीशियम की मात्रा पाई जाती है। यह तत्व पाचन क्रिया के लिए फायदेमंद होता है। मूली का सेवन करने से पेट साफ़ होता है। जिसके कारण आपको चर्म रोग होने की नौबत नहीं नहीं पडती।

बबूने के फूल का प्रयोग :-

बबूने का फूल को कैमोकइल फूल भी कहा जाता है। चर्म रोग में यह फूल बहुत ही कारगर होता है। चर्म रोग को ठीक करने के लिए आप बबूने के फूल के रस में रूई के जरिए चर्म रोग के उपर लगाएं। एैसा करने से चर्म रोग से होने वाल खुजली और चर्म रोग दोनों ही ठीक हो जाते हैं। इस उपाय को दिन में दो से तीन बार करें।

गेंदे का फूल :-

गेंदे के फूल में एंटी बैक्टीरियल के साथ एंटी वायरल तत्व होते हैं जो चर्म रोग में लाभ देता है। गेंदे की पत्तियों को पानी में अच्छे से उबाल लें और दिन में तीन बार चर्म रोग से प्रभावित जगह पर लगाएं। नियमित गेंदा का इस्तेमाल करने से चर्म रोग पूरी तरह से ठीक हो जाता है।

अलसी :-

अलसी के इस्तेमाल से भी चर्म रोग ठीक होता है। अलसी में मौजूद ओमेगा थ्री एसिड शरीर के पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है जिससे चर्म रोग में आराम मिलता है। अलसी के तेल की 1 से 2 चम्मच का सेवन करें।

तिल का तेल :-

बाजार में आसानी से आपको तिल का तेल मिल जाए। यह तेल भी चर्म रोग को ठीक करता है। एक कटोरी में तिल के तेल को रख लें और उसमें पानी मिला लें और इसे गैस या चूल्हे पर हल्की पर तब तक गर्म करते रहें जब पानी तेल से उड़ जाए तब इस तेल को चर्म रोग से प्रभावित होने वाली जगह पर लगाएं। आपको चर्म रोग से राहत मिल जाएगी। इस उपाय को सप्ताह में दो से तीन दिन में जरूर करें।

अन्य उपाय :-

चरम रोग होने पर सबसे पहले हल्दी, लाल चन्दन, नीम की छाल, चिरायता, बहेड़ा, आंवला, हरेडा और अडूसे के पत्तों को समान मात्रा में लें अब इन सभी चीजों को पानी में पूरी तरह से फूलने के लिए भिगो दें जब यह सभी चींजे पानी में अच्छे तरीके के साथ फूल जाएं तब इसको पानी से निकाल कर इसको पीस लें।

ध्यान रहें कि इसका पेस्ट ढीला रखें। अब इस पेस्ट से चार गुना अधिक मात्रा में तिल का तेल मिला लें। तिल के तेल से चार गुनी मात्रा में पानी लेकर सारे समान को एक बड़े बर्तन में मिला लें। अब इस मिश्रण को मंद आंच पर तब तक गर्म करें जब तक सारा पानी भाप बनाकर उड़ न जाएं। अब आपका पेस्ट तैयार हैं इस पेस्ट को अपने शरीर पर लगा लें। इसको नियमित रूप से लगाने पर आपको चरम रोग से छुटकारा मिल जायेगा ।

चर्म रोग कष्टदायी रोग है जिसका समय रहते उपचार कराना जरूरी है। क्योंकि यह धीरे-धीर सारे शरीर में फैल जाता है और रोगी को बेहद परेशानी होती है।

इन उपायों के जरिए आप चर्म रोग यानि एक्जिमा से मुक्ति पा सकते हो। यदि एक्जिमा बेहद गंभीर हो तो चिकित्सक को दिखाने में देर न करें।

इस विडियो में देखिये त्वचा का इलाज >>

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हर रोज एक संतरा, आपको इन 5 बीमारियों से बचाने की रखता है ताकत

हर रोज एक संतरा, आपको इन 5 बीमारियों से बचाने की रखता है ताकत………………..

 

सर्दियां आते ही बाज़ार में आ जाते हैं ताज़े संतरे. जिसे आप और हम कई तरीकों से अपनी डाइट में शामिल करते हैं। कोई सुबह जूस की तरह पीता है तो कई इसे शाम के ब्रेक में खाना पसंद करता है। विटामिन सी, ए, अमिनो एसिड, बी कॉम्प्लेक्स, फ्लेवोनॉयड, कैल्शियम, फॉस्फोरस, सोडियम जैसे मिनरल्स से भरे इस फल को खाने के कई फायदे होते हैं।

संतरा एक स्वास्थ्यवर्धक फल है। इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन सी होता है। लोहा और पोटेशियम भी काफी होता है। संतरे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें विद्यमान फ्रुक्टोज, डेक्स्ट्रोज, खनिज एवं विटामिन शरीर में पहुंचते ही ऊर्जा देना प्रारंभ कर देते हैं। संतरे के सेवन से शरीर स्वस्थ रहता है, चुस्ती-फुर्ती बढ़ती है, त्वचा में निखार आता है तथा सौंदर्य में वृद्धि होती है।

सिर्फ एक दिन में एक संतरा शरीर को कई बीमारियों से बचा कर रखता है। यहां आपको संतरे खाने के 5 फायदों के बारे में बता रहे हैं।

ब्लड प्रेशर कंट्रोल करे :-

ब्लड प्रेशर को लो होने से बचाने के लिए सबसे ज़रूरी है सोडियम की मात्रा को बैंलेस रखना। संतरा सोडियम की मात्रा को नॉर्मल रख ब्लड प्रेशर को सही रखता है। इसीलिए जिसे भी हाई या लो ब्लड प्रेशर की परेशानी हो वो अपनी डाइट में संतरा ज़रूर शामिल करें।

 कैंसर से बचाए :-

विटामिन सी से भरपूर संतरा शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री-रैडिक्लस से सुरक्षित रखता है। साथ ही इसमें पाया जाने वाला लाइमोनिन कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकता है। मैंडरिन संतरे में विटामिन ए भरपूर मात्रा में पाया जाता है। जापान में हुई एक स्टडी के मुताबिक मैंडरिन संतरा लिवर कैंसर होने के खतरे को कम करता है।

किडनी पथरी से रखे सेफ :-

रोज़ाना संतरे का सेवन किडनी में होने वाली पथरी के खतरे को कम करता है। इसीलिए आप संतरे को रोज़ाना अपनी डाइट में शामिल करें। पथरी के लिए संतरे को लिक्विड रूप में पीएं ज़्यादा फायदा होगा।

बवासीर में राहत :-

संतरा पेट के अल्सर को खत्म करता है और बवासीर में राहत दिलाता है। इसके लिए रोज़ाना खाना खाने के बाद एक ग्लास संतरे का जूस पीएं। बवासीर के मरीज़ संतरे के छिलके के पाउडर को भी पानी में मिला कर पी सकते हैं।

सर्दी-जुकाम करे छुमंतर :-

संतरे में मौजूद विटामिन सी सर्दी-जुकाम में राहत दिलाता है। लोगों का ऐसा मानना है कि संतरे की तासीर ठंडी होती है इसीलिए इसे सर्दी-खांसी में नहीं खाना चाहिए, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं होता है। बल्कि संतरा या विटामिन सी वाले सभी फल सर्दी में राहत दिलाते हैं।

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किसी को अचानक आ जाए हार्ट अटैक, तो करें ये उपाय

किसी को अचानक आ जाए हार्ट अटैक, तो करें ये उपाय………….

 

हार्ट अटैक कब और किसे आएगा, यह कोई नहीं कह सकता। चाहे आप स्लिम हों या फिर एक्सरसाइज करते हों, हार्ट अटैक आने के चांसेस कभी भी हो सकते हैं। हार्ट अटैक की बीमारी आजकल एक आम समस्या बनती जा रही है और हमारे भारत में तो यह बिल्कुल कॉमन हो गया है। ज़्यादातर नौजवान लोगों में हार्ट अटैक आने की काफी मामले सामने आ रहे हैं।

आज हम आपको बता रहे हैं कि अगर किसी को हार्ट अटैक आ जाए तो हार्ट अटैक आने के 5 मिनट के अंदर आप यह काम करें और इन सावधानियों का ख्याल रखें जिससे मरीज की जान तुरंत बचाई जा सके।

हार्ट अटैक आने पर क्या करें ? हार्ट अटैक से कैसे बचें :-

हार्ट अटैक एक ऐसी बीमारी है जो कभी भी अचानक किसी को भी इसका दौरा पड़ सकता है। अगर आपके सामने किसी को हार्ट अटैक आ जाए तो आप तुरंत यहां दिए गए उपायों को अपनाएं जिससे पेशेंट की जान बचाने में आसानी हो, हार्ट अटैक में जितनी जल्दी पेशंट को मेडिकल फैसिलिटी मिल जाए उतना अच्छा होता है क्योंकि हार्टअटैक एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है और इसमें बहुत कम समय मिलता है जिसमें आप रोगी की जान बचा सके।

हार्ट पेशेंट को लंबी सांस लेने को कहें और उसके आसपास से हवा आने की जगह छोड़ दें ताकि उन्हें पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिल सके। कई बार ऐसा देखा गया है के घर में या कहीं किसी को अटैक आया और लोग उसको बुरी तरह से चारों तरफ घेर लेते हैं तो इस बात का विशेष ध्यान रखें के रोगी को ऑक्सीजन लेने के लिए पर्याप्त खुली जगह होना चाहिए।

अटैक आने पर पेशेंट को उल्टी आने जैसी फीलिंग होती है ऐसे में उसे एक तरफ मुड़ कर उल्टी करने को कहें ताकि उल्टी लंग्स में न भरने पाए और इन्हें कोई नुकसान ना हो।

पेशेंट की गर्दन के साइड में हाथ रखकर उसका पल्स रेट चेक करें यदि पल्स रेट 60 या 70 से भी कम हो तो समझ लें कि ब्लड प्रेशर बहुत तेजी से गिर रहा है और पेशेंट की हालत बहुत सीरियस है।

पल्स रेट कम होने पर हार्ट पेशेंट को आप इस तरह से लिटा दें उसका सर नीचे रहे और पैर थोड़ा ऊपर की और उठे हुए हों। इससे पैरों के ब्लड की सप्लाई हार्ट की और होगी जिससे ब्लड प्रेशर में राहत मिलेगी।

इस दौरान पेशेंट को कुछ खिलाने पिलाने की गलती ना करें इससे उसकी स्थिति और भी बिगड़ सकती है।

एस्प्रिन ब्लड क्लॉट रोकती है इसलिए हार्ट अटैक के पेशेंट को तुरंत एस्प्रिन या डिस्प्रिन खिलानी चाहिए। लेकिन कई बार इनसे हालात और भी ज्यादा बिगड़ जाते हैं इसलिए एस्प्रिन या डिस्प्रिन देने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर ले लेना चाहिए।

पल्स रेट बहुत ज्यादा कम हो जाने पर पेशेंट के चेस्ट पर हथेली से दबाब देने से थोड़ी राहत जरूर मिलती है। लेकिन गलत तरीके से हार्ट को प्रेस करने में प्रॉब्लम और भी बढ़ सकती है। इसलिए इसके लिए विशेष अभ्यास की जरूरत होती है। अगर चाहें तो आप इंटरनेट पर CPR का सही तरीका देख कर भी आप इसको कर सकते हैं।

पेशेंट को गाड़ी में बिठाने की बजाए सीधा लिटाये, इससे उसका ब्लड सर्कुलेशन सही रखने में मदद मिलेगी।

यहां आपसे कुछ पॉइंट्स भी शेयर कर रहे हैं कि ऐसी सिचुएशन में क्या-क्या करना चाहिए :-

मरीज़ को देखकर आप खुद घबराएं नहीं और फटाफट मदद के लिए आस-पास के लोगों और डॉक्टर को बुलाएं।

सबसे पहले चेक करें कि मरीज़ होश में है या नहीं।

अगर मरीज़ बेहोश है तो उसकी सांसे चेक करें. इसके लिए उसकी नाक के पास अंगुलियों या कानों से चेक करें कि सांसे चल रही है या नहीं।

मरीज़ की पल्स चेक करें।

अगर मरीज़ सांस भी ना लें और उसकी पल्स भी नहीं आ रही है तो उसे CPR दें।

CPR के लिए अपने बाएं हाथ को सीधा रखें उसके ऊपर दाएं हाथ को रख अंगुलियों को लॉक करें।

अब हाथों को छाती के बीचो-बीच लाएं और अपने पूरे प्रेशर से छाती को दबाएं।

सबसे ज़रूरी है कि आपको प्रति मिनट 100 कंप्रेशन देने हैं।

कंप्रेशन तब तक करते रहें जब तक उस मरीज़ को होश ना आ जाए या फिर डॉक्टर ना आ जाए।

इस बात की बिल्कुल फिक्र ना करें कि कहीं मरीज़ की चेस्ट बोन में फ्रेचर ना हो जाए, क्योंकि उस वक्त होश में लाना ज़्यादा ज़रूरी है।

दोस्तों कृपया इस बेहद मत्वपूर्ण काम की जानकारी को अपने Facebook प्रोफाइल पर या अपने ट्विटर और Google अकाउंट पर जरूर शेयर करें हो सकता है आपका एक शेयर किसी की जिंदगी बचा पाए।

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प्याज़ सिर्फ़ खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाता है, बल्कि इसके ये 10 स्वास्थ्य लाभ भी हैं

प्याज़ सिर्फ़ खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाता है, बल्कि इसके ये 10 स्वास्थ्य लाभ भी हैं……………….

 

प्याज़ काटना हर किसी के लिए सबसे बड़ा टास्क होता है, क्योंकि प्याज़ को काटते समय आंखें बहुत जलती हैं. मगर इसकी एक बुराई को किनारे रख दें, तो प्याज़ में सेहत का खज़ाना भरा पड़ा है. इसमें होने वाले एंटी-इंफ़्लेमेटरी, एंटी-एलर्जिक, एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-कार्सिनोजेनिक गुण शरीर को स्वस्थ रखते हैं. साथ ही प्याज़ में भरपूर मात्रा में विटामिन A, B6, B-Complex और C भी पाया जाता है. प्याज़ में आयरन, फ़ोलेट और पोटैशियम जैसे खनिज भी पर्याप्त मात्रा में होते हैं.

कई तरह से इस्तेमाल होने वाले प्याज़ के फ़ायदे भी कई सारे हैं:

1. बाल लंबे होते हैं 

कच्चे प्याज़ के रस को बालों की जड़ों में लगाने से बाल लंबे होते हैं.

2. कैंसर से बचाव 

प्याज़ में कई ऐसे तत्व मौजूद होते हैं, जो कैंसर से बचाव में भी सहायक होते हैं.

3. इम्यूनिटी बढ़ती है 

कच्चा प्याज़ खाने से इम्यून सिस्टम स्ट्रॉन्ग होता है.

4. मुंह के लिए फ़ायदेमंद 

प्याज़ में मौजूद विटामिन-सी और कैल्शियम मुंह से जुड़ी समस्याओं को दूर करते हैं.

5. डायबिटीज़ में लाभदायक 

डायबिटीज़ से पीड़ि‍त लोगों के लिए भी प्याज़ बहुत फ़ायदेमंद होता है. ये शरीर में इंसुलिन की मात्रा को बढ़ाने के साथ ही ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है.

6. वज़न घटाने में सहायक 

वज़न घटाना चाहते हैं तो हरे प्याज़ का सेवन करें. इससे शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है.

7. कान दर्द में राहत 

कान में किसी प्रकार की समस्या होने पर प्याज़ को राख में भूनकर उसका गुनगुना रस निकाल लें. फिर इस रस को कान में डालें इससे दर्द में राहत मिलेगी.

8. पीरियड्स की समस्या को दूर करे 

महिलाओं में पीरियड्स से जुड़ी समस्या होने पर प्याज़ के रस में शहद मिलाकर सेवन करने से दर्द कम होता है.

9. लू नहीं लगती 

गर्मियों के मौसम में प्याज़ का सेवन करने से लू नहीं लगती है. अगर आप दिनभर धूप में रहते हैं तो अपनी जेब में एक प्याज़ रखें इससे लू से बचने में मदद मिलेगी. इसके अलावा बच्चों को अगर लू लग जाए तो उसको प्याज़ का रस पिलाएं और उसके तलवों पर प्याज़ के रस से मालिश करें आराम मिल जाएगा.

10. याददाश्त बढ़ती है 

रोज़ाना प्याज़ खाने से याददाश्त तेज़ होती है. अपने बच्चों को बचपन से ही प्याज़ खाने ही आदत डालें.

एलोविरा :- गुणों का खजाना, स्वास्थ्य हो या खूबसूरती, हर चीज के लिए बेस्ट है 1 टुकड़ा एलोवेरा

एलोविरा :- गुणों का खजाना, स्वास्थ्य हो या खूबसूरती, हर चीज के लिए बेस्ट है 1 टुकड़ा एलोवेरा………….

 

एलोवेरा को घृतकुमारी के नाम से भी जाना जाता है। इसमें एमीनो एसिड और 12 विटामिन भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।कई शताब्दियों के लिए, कई देशों में एलो वेरा का उपयोग किया गया है। इसमें कई उपचार गुण हैं और यह सबसे अच्छी औषधीय पौधों में से एक है क्योंकि यह कई बीमारियों और स्वास्थ्य विकारों को ठीक करता है,

एलोवेरा का उपयोग सौंदर्य उत्पादों में और अच्छे कारण के लिए किया जाता है। यह एंटीवायरल और जीवाणुरोधी गुण है, और कब्ज से मधुमेह के लिए सब कुछ का इलाज करने में मदद करने की क्षमता है। एलोवेरा का पौधा कांटेदार और कड़वे पत्तों के साथ लगभग एक या दो फीट लंबा होता है, जो पौधे पर फ़ीड करने के लिए जानवरों और कीड़ों को रखने के लिए एक रक्षा के रूप में कार्य करता है। पत्तियां एक गॉली पारभासी जेल रखती हैं, यह भी बेहद कड़वा होता है, और यह दुनिया भर में जाना जाता है कि यह अविश्वसनीय उपचार गुण है।

पारभासी जेल लगभग 96% पानी, कुछ कार्बनिक और अकार्बनिक यौगिकों, एक प्रकार के प्रोटीन से बना होता है, जिसमें 18 शामिल होते हैं 20 अमीनो एसिड शरीर में पाए जाते हैं और अंत में, विटामिन ए, बी, सी और ई। यह जितना आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए लाभप्रद होता है उतना ही आपके बालों और त्वचा के लिए भी। आइए जानें ऐलोवेरा का हमारे स्‍वास्‍थ्‍य पर कितना अच्‍छा प्रभाव पड़ता है।

बालों, त्वचा और वजन घटाने के लिए एलोवेरा के कुछ लाभ इस प्रकार हैं:-

त्वचा के लिए एलो वेरा:-
एलोवेरा के कई उपयोग हैं, जैसे चेहरे और त्वचा के लिए एलोवेरा। बिल सी। कोट लिखते हैं, “चूंकि त्वचा को अपने स्वयं के पोषण की आवश्यकता होती है, एलो वेरा, जब एक अच्छी तरह से डिज़ाइन की गई व्यक्तिगत देखभाल आहार में तैयार की जाती है, तो मानव त्वचा के लिए निरंतर, प्रभावशाली पोषण का इलाज, एक्सफ़ोलीएट, बहाल, प्रकट और प्रदान कर सकता है।” और हम यह दिखाने वाले हैं कि आप ऐसा कैसे कर सकते हैं। एक बार जब आप प्राकृतिक एलोवेरा जेल की कीचड़युक्त बनावट को हटा दें और इसे अपनी त्वचा पर लागू करें, तो आप देखेंगे कि यह कितना सुखदायक और ठंडा है। और यह इन सटीक कारणों के लिए है कि आयुर्वेद एलोवेरा को चमत्कार जड़ी बूटी के रूप में संदर्भित करता है जिसका उपयोग घाव, मामूली कटौती, शुष्क त्वचा और गंभीर जलन के इलाज के लिए किया जा सकता है।

1. सूखी त्वचा के लिए एलोवेरा – 

कुछ एलोवेरा, एक चुटकी हल्दी, एक चम्मच शहद, एक चम्मच दूध और कुछ बूंदें गुलाब जल की लें। इस मिश्रण को तब तक फेंटें जब तक आपको एक पेस्ट न मिल जाए। इसे लागू करें और लगभग 20 मिनट या तो में छोड़ दें।

2. एलोवेरा स्क्रब – 

आधा कप ताजा एलोवेरा जेल, एक कप चीनी और दो बड़े चम्मच नींबू का रस मिलाएं। चीनी मृत त्वचा को एक्सफोलिएट और स्क्रब करने में मदद करेगी, एलोवेरा त्वचा को गहराई से साफ करेगा और नींबू दाग और तन को मिटाने में मदद करेगा। तीनों सामग्रियों को एक साथ मिलाएं और इसका उपयोग चेहरे और शरीर दोनों को रगड़ने के लिए करें।

3. मुंहासों के लिए एलोवेरा – 

कुछ एलोवेरा जेल लें, इसमें अखरोट को एक आटे के साथ मिलाएं जैसे कि स्थिरता और शहद। शहद से एंटी-ऑक्सीडेंट के साथ मिलकर एलोवेरा के हीलिंग गुण आपको चिकनी और साफ त्वचा के साथ छोड़ देंगे।

4. संवेदनशील त्वचा के लिए एलोवेरा – 

कुछ एलोवेरा जेल, खीरे का रस, दही और गुलाब का तेल लें और उन्हें एक पेस्ट में मिलाएं। लागू करें और लगभग 20 मिनट के लिए छोड़ दें, फिर इसे कुल्ला।

वजन घटाने के लिए एलो वेरा:-
यह सिर्फ सौंदर्य उद्योग नहीं है जो एलोवेरा के लाभों पर ध्यान दे रहा है, स्वास्थ्य उद्योग इसके बारे में भी रूकना बंद नहीं कर सकता है। हिंदी में घृतकुमारी के रूप में जाना जाता है, पौधे के पास दुनिया भर में लाखों लेने वाले हैं और इसका उपयोग एलोवेरा के चमत्कारिक स्वास्थ्य लाभों के कारण जैल, क्रीम और जूस के रूप में किया जाता है। द एवरीथिंग गाइड टू एलो वेरा के लेखक ब्रिट ब्रैंडन के अनुसार, “एलोवेरा आपके आहार की प्रभावशीलता में सुधार कर सकता है और आपके वजन घटाने की क्षमता को अधिकतम कर सकता है।

पर्याप्त मात्रा में विटामिन और खनिजों के साथ जो वजन घटाने में योगदान करते हैं। अमीनो एसिड, एंजाइम और स्टेरोल्स के रूप में, एलोवेरा सुनिश्चित करता है कि आपका आहार न केवल वजन घटाने का समर्थन करता है, बल्कि शरीर के अवशोषण और उपयोग में सुधार करता है, जिससे समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है और साथ ही वजन घटाने में भी सफलता मिलती है। ”

कब्ज के लिए:

100-200 मिलीग्राम मुसब्बर या शाम को लिया गया 50 मिलीग्राम घृतकुमारी का उपयोग किया गया है। इसके अलावा, मुसब्बर युक्त एक 500 मिलीग्राम कैप्सूल, प्रतिदिन एक कैप्सूल की खुराक से शुरू होता है और आवश्यकतानुसार तीन कैप्सूल तक बढ़ जाता है।

मधुमेह के लिए:

मधुमेह के लिए सबसे प्रभावी खुराक और मुसब्बर का रूप स्पष्ट नहीं है। पाउडर, अर्क और रस सहित 4-14 सप्ताह के लिए मुसब्बर की कई खुराक और रूपों का उपयोग किया गया है। पाउडर की खुराक प्रतिदिन 100-1000 मिलीग्राम तक होती है। रस की खुराक प्रतिदिन 15-150 एमएल तक होती है।

मुंह की स्थिति के लिए जिसे मौखिक सबम्यूकोस फाइब्रोसिस कहा जाता है:

शुद्ध एलोवेरा जूस 30 एमएल प्रतिदिन दो बार शुद्ध एलोवेरा जेल लगाने के साथ 3 महीने तक घावों को रोजाना 3 बार प्रयोग किया जाता है।

वजन घटाने के लिए:

8 सप्ताह के लिए प्रतिदिन दो बार 147 मिलीग्राम एलो युक्त विशिष्ट एलो जेल उत्पाद का उपयोग किया गया है।

स्किन के लिए आवेदन:-
मुंहासों के लिए: चेहरे को धोने के बाद सुबह और शाम को 50% एलो जेल लगाया जाता है, इसके साथ ही शाम को ट्रेटिनॉइन जेल भी कहा जाता है।

जलने के लिए:

मुसब्बर और जैतून का तेल क्रीम, 6 सप्ताह के लिए दो बार दैनिक रूप से लागू किया जाता है। इसके अलावा, एलो जेल या क्रीम, घाव के ड्रेसिंग को बदलने के बाद, या हर तीन दिन में दो बार लागू किया जाता है, जब तक कि जलता नहीं हो, तब तक इसका उपयोग किया जाता है।

दाद के लिए:

0.5% मुसब्बर निकालने वाली क्रीम, 2-सप्ताह की अवधि में एक या दो बार लगातार 5 दिनों के लिए तीन बार दैनिक उपयोग की जाती है।

त्वचा या मुंह पर खुजली वाली चकत्ते के लिए (लिचेन प्लेनस):

एलो जेल, 8 सप्ताह तक रोजाना दो से तीन बार इस्तेमाल किया जाता है। मुसब्बर माउथवॉश के दो बड़े चम्मच, 2 मिनट के लिए स्वाइप करें और फिर थूक दें, एक महीने के लिए चार बार दैनिक उपयोग किया गया है।

मुंह की स्थिति के लिए जिसे मौखिक सबम्यूकोस फाइब्रोसिस कहा जाता है:

3 महीने के लिए रोजाना तीन बार गाल के प्रत्येक तरफ लागू 5 मिलीग्राम मुसब्बर जेल का उपयोग किया गया है। शुद्ध एलोवेरा जेल को 3 महीने तक रोजाना तीन बार घावों पर लगाने के साथ-साथ शुद्ध एलोवेरा का रस 30 एमएल रोजाना दो बार पीने से लाभ होता है।

सोरायसिस के लिए:

एलो अर्क 0.5% क्रीम 4 सप्ताह के लिए दैनिक तीन बार लागू किया गया है। 8 सप्ताह के लिए दो बार दैनिक रूप से लागू मुसब्बर युक्त क्रीम का उपयोग किया गया है।

स्किन के लिए आवेदन:-
मुंहासों के लिए: चेहरे को धोने के बाद सुबह और शाम को 50% एलो जेल लगाया जाता है, इसके साथ ही शाम को ट्रेटिनॉइन जेल भी कहा जाता है।

मौखिक सबम्यूकोस फाइब्रोसिस नामक एक पूर्ववर्ती मुंह की स्थिति के लिए: 3 महीने के लिए रोजाना तीन बार गाल के प्रत्येक तरफ लागू 5 एलो जेल का उपयोग किया गया है।

ऐसी बीमारी जो व्यक्ति की सोचने समझने की क्षमता कर देती है खत्म, जानें ये हैं इसके लक्षण…

ऐसी बीमारी जो व्यक्ति की सोचने समझने की क्षमता कर देती है खत्म, जानें ये हैं इसके लक्षण…………

 

आज के समय में हमारी लाइफ इतनी व्यस्त हो चुकी है कि हम अपने ऊपर ध्यान ही नहीं दे पाते हैं और इसी के चलते हम लोग हमारे शरीर में हो रही छोटी-मोटी बीमारियों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ये छोटी-छोटी बीमारी कब बड़ी बन जाए आपको पता भी नहीं चलता।

हमारे कहने का मतलब ये है कि शरीर में किसी भी तरह के लक्षण आपको दिखाई देते हैं तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। क्योंकि ये किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे ही एक बीमारी सामने आई है, जिसमें व्यक्ति सोचने समझने की क्षमता खो देता है। जानें क्या हैं ये बीमारी और इसके लक्षण।

स्किजोफ्रेनिया (schizophrenia) :

स्किजोफ्रेनिया (schizophrenia) एक तरह की मानसिक बीमारी है। इस बीमारी का वजह से इंसान सोचने-समझने की क्षमता पूरी तरह से खुद को खो देता है और पीड़ित व्यक्ति खुद से दूर होता चला जाता है। इतना ही नहीं पीड़ित व्यक्ति को अजीबों-गरीब आवाजें सुनाई देने लगती हैं।

कभी-कभी ऐसी भी चीजें दिखाई देने लगती हैं जो हकीकत में होती ही नहीं हैं और वह व्यक्ति हमेशा डरा हुआ महसूस करता है और एक समय के बाद अवसाद हो जाता है। स्किजोफ्रेनिया की बीमारी कई कारणों की वजह से हो सकती है, जिनमें विविधता, जन्म, गर्भावस्था में मस्तिष्क क्षति होना है।

नशा और तनाव :

नशा और तनाव से स्किजोफ्रेनिया और भी ज्यादा बुरा हो जाता है। इस बीमारी से ग्रस्त लोगों में भ्रम जैसी स्थिति ज्यादा होती है। उन्हें वो आवाजें सुनाई देती हैं जो कोई और सुन नहीं सुन पाता, इस रोग से ग्रसित व्यक्ति मानते हैं कि अन्य लोग उनका दिमाग पढ़ रहे हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार, एंटीसाइकोटिक दवाएं और पुनर्वास से इलाज हो सकता है। अगर डॉक्टर से सही समय पर सलाह ली जाए तो दवाएं बहुत सुरक्षित होती हैं। इलाज के साथ स्किजोफ्रेनिया वाले अधिकांश लोग एक स्थिर जीवन जी सकते हैं और काम कर सकते हैं।

रोज सुबह उठकर खाना चाहिए एक सेब, होंगे ये फायदें…

रोज सुबह उठकर खाना चाहिए एक सेब, होंगे ये फायदें………..

 

सेब, स्वास्थ्य के लिए सबसे ज्यादा लाभकारी फलों में से एक माना जाता है और अगर आप हमेशा स्वस्थ रहना चाहते हैं तो रोज सुबह उठकर एक सेब जरुर खाना शुरू कर दें। डॉक्टरों का कहना है कि रोज एक सेब खाने से आप कई तरह की बीमारियों से दूर रहेंगे।

इतना ही नहीं आपने इससे मिलती जुलती एक कहावत भी सुनी होगी ‘कि अगर आप रोज सुबह उठते ही एक सेब खाते हैं तो आपको कभी डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ती है।‘ सेब में अधिक मात्रा में फाइबर पाया जाता है जो शरीर के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है।

 हार्ट की बीमारी :

डॉक्टरों का कहना है कि सेब खाने से अल्जाइमर से लेकर कैंसर व ट्यूमर तक की बीमारी नहीं होती है। इतना ही नहीं कई रिसर्च में ये भी दावा किया गया है कि सेब हार्ट की बीमारी से लेकर मांसपेशियों तक की बीमारी में लाभकारी माना गया है।

कैंसर :

आपको बता दें कि सेब का जूस दिमाग के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है। अमेरिका के एक कैंसर रिसर्च के वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है। कि सेब खाने से अग्नाशय के कैंसर का खतरा 23 फीसदी तक कम हो जाता है और साथ ही ट्यूमर का खतरा भी कम होता है।

खून की बढ़ोतरी में :

वैसे तो डॉक्टर हर तरह के फ्रूट खाने का सलह देते है लेकिन ज्यादातर डॉक्टर सेब खाने की सलह इसलिए देते है कि सेब में आयरन की मात्रा सबसे ज्यादा पाई जाती है जो हमारे शरीर में खून की बढ़ोतरी में मदद करता है। इतना ही नहीं रोजाना सेब का सेवन करने से मांसपेशियों से जुड़ी बीमारियां भी खत्म हो जाती हैं।

पाचन तंत्र :

सेब खाने से पाचन तंत्र तो मजबूत होता ही है और ये कब्ज की बीमाकी को भी दूर करने में मददगार साबित होती है। सेब में मौजूद फाइबर खाने को अच्छी तरह से पचाते हैं। अमेरिका के नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट ने यह दावा किया है कि सेब और फाइबर वाले फल खाने से कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा कम होता है।