R.I.P बॉलीवुड एक्टर ऋषि कपूर का 67 साल की उम्र में निधन…….

R.I.P 24 घंटे में बॉलीवुड ने खो दिए दो दिग्गज कलाकार, इरफान खान के बाद ऋषि कपूर की भी कैंसर ने ली जान बॉलीवुड एक्टर ऋषि कपूर का 67 साल की उम्र में निधन…….

 

जाने-माने बॉलीवुड एक्टर ऋषि कपूर का मुंबई में सुबह निधन हो गया। लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे 67 वर्ष के थे। कल रात सांस लेने में परेशानी के कारण ऋषि कपूर को एचएन रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था।

सुबह में अमिताभ बच्चन ने ट्वीट कर जानकारी दी कि

ऋषि कपूर का निधन हो गया है, मैं टूट चुका हूं। ऋषि कपूर के भाई और अभिनेता रणधीर कपूर ने भी बताया कि वह नहीं रहे, उनका निधन हो गया है।

सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ऋषि कपूर के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने अपने शोक संदेश में कहा, “अभिनेता रहे ऋषि कपूर के निधन से गहरा धक्का लगा। वह एक महान अभिनेता ही नहीं बल्कि बहुत ही मानवता प्रेमी थे। उनके परिवार, मित्र और प्रशंसकों के प्रति हार्दिक संवेदना। ओम शांति।”

कैंसर से थे पीड़ित

ऋषि कपूर को साल 2018 में कैंसर के बारे में पता चला था। इसके बाद अमेरिका में करीब एक साल तक कैंसर का इलाज कराने के बाद वह पिछले साल सितंबर में भारत लौटे थे। न्यूयॉर्क में इलाज के दौरान उनके साथ उनकी पत्नी और अभिनेत्री नीतू सिंह थीं। फरवरी में भी तबीयत खराब होने की वजह से उन्हें दो बार अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

R.I.P बॉलीवुड एक्टर इरफान खान का 53 साल की उम्र में मुंबई के अस्पताल में निधन…………….

R.I.P बॉलीवुड एक्टर इरफान खान का 53 साल की उम्र में मुंबई के अस्पताल में निधन……………….

 

एक्टर इरफान खान का मुंबई के अस्पताल में निधन हो गया। वह 53 साल के थे और लंबे समय से एक दुलर्भ किस्म के कैंसर से जंग लड़ रहे थे। इरफान को 2018 में न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर हुआ था। उनके परिवार में पत्नी सुतापा और दो बेटे बाबिल और अयान हैं। परिवार को एक सप्ताह में लगा यह दूसरा झटका है। ‘मकबूल’ अभिनेता की 95 वर्षीय मां सईदा बेगम का चार दिन पहले ही जयपुर में इंतकाल हुआ था। अभिनेता कोरोना वायरस से निपटने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाए थे।

इरफान खान ने केवल देश में ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपने अभिनय का लोहा मनवाया। खान को मलाशय संक्रमण के कारण मंगलवार को कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में आईसीयू में भर्ती कराया गया था। उनके निधन के संबंध में जारी एक बयान में कहा गया है, ‘यह काफी दुखद है कि आज हमें उनके निधन की खबर बतानी पड़ रही है। इरफान एक मजबूत इंसान थे, जिन्होंने अंत तक लड़ाई लड़ी और अपने संपर्क में आने वाले हर शख्स को प्रेरित किया। 2018 में एक दुर्लभ किस्म का कैंसर होने के बाद उन्होंने उससे लड़ाई लड़ी और जीवन के हर मोर्चे पर उन्होंने संघर्ष किया।’

बयान के अनुसार, ‘अपने प्रियजनों, अपने परिवार के बीच उन्होंने अंतिम सांस ली और अपने पीछे एक महान विरासत छोड़ गए। हम दुआ करते हैं कि उन्हें शांति मिले। और हम उनके द्वारा कहे शब्दों को दोहराएंगे कि ‘ये इतना जादुई था, जैसे कि मैं पहली बार जिंदगी का स्वाद चख रहा था।’

फिल्म ‘पीकू’ के निर्देशक शूजित सिरकार ने अभिनेता के निधन पर शोक जताते हुए ट्वीट किया, ‘मेरे प्रिय मित्र इरफान। तुम लड़े, लड़े और लड़ते रहे। मुझे हमेशा तुम पर गर्व रहेगा…. हम दोबारा मिलेंगे…सुतापा और बाबिल को मेरी संवेदनाएं… तुमने भी लड़ाई लड़ी…. सुतापा तुमने इस लड़ाई में अपना सब कुछ दिया। ओम शांति। इरफान खान तुम्हें सलाम।’

बॉलीवुड एक्टर अमिताभ बच्चन ने ट्वीट कर लिखा कि इरफान खान के निधन की खबर मिल रही है। यह एक परेशान करने वाली और दुखद खबर है। अविश्वसनीय प्रतिभा .. महान सहयोगी .. सिनेमा की दुनिया के लिए एक शानदार योगदानकर्ता.. हमें बहुत जल्द छोड़ दिया।

इरफान खान को कोलोन इन्फेक्शन के कारण मुंबई स्थित कोकिलाबेन (अस्पताल) के आईसीयू में भर्ती कराया गया था।

साल 1967 में जयपुर में हुआ जन्म

इरफान खान का जन्म 7 जनवरी 1967 में जयपुर के एक मुस्लिम पठान परिवार में हुआ था। उनका पूरा नाम साहबजादे इरफान अली खान है। उनके पिता टायर का व्यापार करते थे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बॉलीवुड की दुनिया में अपनी अदाकारी के लिए मशहूर एक्टर इरफ़ान खान ने हॉलीवुड में भी अपना धौंस जमाई है। इस एक्टर ने अपने सफर में कई चुनौतियों का सामना किया है लंबे वक़्त से अपनी सेहत से जूझ रहे इस अभिनेता ने अपनी हिम्मत को कभी पस्त नहीं होने दिया।

देखे वीडियो देश में 3 मई तक लॉकडाउन, 20 अप्रैल से किन जरूरी चीजों की ही अनुमति दी जाएगी

देखे वीडियो देश में 3 मई तक लॉकडाउन, 20 अप्रैल से किन जरूरी चीजों की ही अनुमति दी जाएगी…………….

 

इसमें कोई दोराय नहीं कि आज कल कोरोना वायरस का डर चारों तरफ फैला हुआ है। जी हां इस खतरनाक वायरस के कारण हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके है। यही वजह है कि सरकार और आम जनता इस वायरस को लेकर अब काफी सतर्क हो चुकी है। कोरोनावायरस का प्रकोप हर दिन बढ़ता ही जा रहा है भारत में कुछ ही हफ्तों में संक्रमण के मामलों में तेजी से इजाफा होता जा रहा है पीएम नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देश के लोगों से लॉकडाउन का सख्ती से पालन करने आग्रह किया है।

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन है। बाजार बंद हैं, ट्रेनें, बसें, हवाई जहाज, टैक्सियां कुछ भी नहीं चल रहा। ऐसे में सरकार ने लॉकडाउन खोलने की तैयारियों पर चर्चा शुरू कर दी है। 25 मार्च से लागू हुए देशव्यापी लॉकडाउन का आज आखिरी दिन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश को संबोधित किया है और लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ने का फैसला लिया है यह भी कहा कि 20 अप्रैल से कुछ जरूरी चीजों की अनुमति दी जाएगी। अगर आपके इलाके में कोरोना पैर पसारता है तो ये अनुमति तुरंत वापस ले ली जाएगी। पिछले 26 दिन में मोदी का देश के नाम यह चौथा संदेश था।

भाषण की शुरुआत :

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत करते हुए कहा, “नमस्ते मेरे प्यारे देशवासियों” कोरोना के खिलाफ भारत की लड़ाई बहुत मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। आप सभी देशवासियों की तपस्या और त्याग की वजह से भारत अब तक कोरोना से होने वाले नुकसान को काफी हद तक टालने में सफल रहा। आप लोगों ने कष्ट सहकर भी अपने देश और भारत वर्ष को बचाया है। मैं जानता हूं कि आपको कितनी दिक्कतें आई हैं। किसी को आने जाने की परेशानी, कोई घर-परिवार से दूर है। लेकिन आप देश की खातिर एक अनुशासित सिपाही की तरह अपने कर्तव्य निभा रहे हैं। मैं आप सभी को आदरपूर्वक नमन करता हूं।

कुछ महत्वपूर्ण बातें : Lockdown Till 3 May

‘‘साथियो, आज पूरे विश्व में कोरोना वैश्विक महामारी की जो स्थिति है, हम सब उससे भली-भांति परिचित हैं। अन्य देशों के मुकाबले भारत ने कैसे अपने यहां संक्रमण को रोकने के प्रयास किए हैं, आप इसके सहभागी भी रहे हैं और साक्षी भी। जब हमारे यहां कोरोना का एक भी केस नहीं था, उससे पहले ही भारत ने कोरोना प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों की एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग शुरू कर दी थी। कोरोना के मरीज 100 तक पहुंचे, उससे पहले ही भारत ने विदेश से आए हर यात्री के लिए 14 दिन का आइसोलेशन अनिवार्य कर दिया था। मॉल, थिएटर, क्लब, जिम बंद किए जा चुके थे।

सारे सुझावों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया गया है कि लॉकडाउन को अब 3 मई तक बढ़ाना पड़ेगा। यानी 3 मई तक हम सभी देशवासियों को लॉकडाउन में ही रहना होगा। इस दौरान हमें अनुशासन का उसी तरह पालन करना है, जैसे हम करते आ रहे हैं।

20 अप्रैल तक हर कस्बे, हर थाने, हर जिले, हर राज्य को बड़ी बारीकी से परखा जाएगा। वहां लॉकडाउन का कितना पालन हो रहा है, उस क्षेत्र ने कोरोना से खुद को कितना बचाया है, इसका मूल्यांकन लगातार किया जाएगा।

जो क्षेत्र इस परीक्षा में सफल होंगे वहां पर 20 अप्रैल से कुछ जरूरी गतिविधियों की अनुमति, दी जा सकती है। लेकिन याद रखिए, ये अनुमति सशर्त होगी। बाहर निकलने के नियम बहुत सख्त होंगे। लॉकडाउन के नियम अगर टूटते हैं और कोरोना का पैर हमारे इलाके में पड़ता है तो सारी अनुमति तुरंत वापस ले ली जाएगी।

इस समय रबी की फसल की कटाई का काम भी जारी है। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर प्रयास कर रही हैं कि किसानों को कम से कम दिक्कत हो।

आज भारत के पास भले ही सीमित संसाधन हों, लेकिन अगर हम धैर्य बनाकर रखेंगे, नियमों का पालन करेंगे तो कोरोना जैसी बीमारी को परास्त करके रहेंगे।

कोरोना पर अब तक प्रधानमंत्री मोदी के 3 संदेश :

पहला :

जैसा की आपको पता है की मोदी जी ने 22 अप्रैल को जब देश को सम्बोधित किया था तो कर्फ्यू लगने का आदेश दिया था और 22 अप्रैल को लगा हुआ कर्फ्यू काफी सफल भी रहा था देशभर में सबकुछ बंद रहा। शाम को लोगों ने घरों के अंदर से ही कोरोना फाइटर्स के लिए ताली और थाली बजाकर आभार व्यक्त किया था।

दूसरा :

दूसरी बार मोदी ने 24 मार्च को संबोधित किया और कोरोना संक्रमण रोकने के लिए 25 मार्च से 14 अप्रैल तक पुरे देश में लॉकडाउन का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि कोरोना की चेन तोड़ने के लिए लोग घरों में रहना आवश्यक है

तीसरा :

प्रधानमंत्री मोदी ने 3 अप्रैल को एक वीडियो संदेश जारी किया था। इसमें लोगों से 5 अप्रैल की रात 9 बजे 9 मिनट के लिए घरों की लाइट बंद कर दीये, मोमबत्ती और मोबाइल की फलेश जलाकर एकजुटता दिखाने की अपील की थी। इस दिन भी लोगो की एकता देखते ही बनती थी

देखे यह वीडियो :-

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कैमरे पर छलका पत्नी पीड़ित मर्दों का दर्द, बोले- हम सुरक्षित नहीं…पुरुष आयोग चाहिए

कैमरे पर छलका पत्नी पीड़ित मर्दों का दर्द, बोले- हम सुरक्षित नहीं…पुरुष आयोग चाहिए……….

 

पत्नियों के उत्पीड़न का शिकार हुए ये लोग हरियाणा के जींद जिले के निवासी हैं…….जो महिला आयोग की तर्ज पर पुरुष आयोग बनाने की मांग करते हुए अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं

हाथों में मांगों का बैनर लेकर आज पत्नी पीड़ित कई लोगों ने पुरुष आयोग गठित करने की मांग उठाई, और कहा कि आज अगर पेड़, पक्षी, पहाड़, नदियों, यहां तक की महिलाओं के लिए अलग से कानून बनाया गया है, तो पुरुषों के लिए भी आयोग का गठन होना चाहिए, नहीं तो महिलाएं झूठे केसों में पुरुषों को फंसाती रहेंगी….

विडियो देखे :- 

एक ऐसे विषय पर उल्लेख करना बहुत आवश्यक है जो चर्चित है लेकिन चर्चा में नहीं। कानून में जिक्र है लेकिन न्याय में नहीं। उसकी दिशा तो है परन्तु दशा आहत है। प्रधान तो है लेकिन सेवक के रूप में। सबके सामने कठोर, लेकिन आंतरिक और भावनात्मक रूप से कमजोर। पुरुष… जो केवल अपने परिवार की जिम्मेदारियों के बोझ तले दबा सिसका सा, जिसे केवल अपने परिवार की जरूरतें और उनकी छोटी-बड़ी इच्छाओं को पूरा करने का ही दर्जा प्राप्त है। उसे केवल परिवार का खर्चा उठाने का ही प्रशिक्षण दिया गया है शायद! सबकी सुनने और अपनी परेशानी जगजाहिर करने से गुरेज करना सिखाया गया है। अपनी भावनाएं और परेशानियां सांझा भी करे तो उन्हें तबज्जो नहीं मिलती। इसके खिलाफ वो आवाज भी नहीं उठा सकता, क्योंकि पुरुष है न, सब सह सकता है!

पुरुष बाहर से जितना कठोर और सख्त दिखता है अंदर से उतना ही कमजोर होता है। विवाह उपरांत अपनी जीवनसंगिनी से इस बात की आस रखता है कि शायद उसकी भावनाओं को समझ सकें। बदलते दौर के साथ महिलाओं में भी तेजी से बदलाव आया है। जीवन-शैली में बदलाव से लेकर शिक्षा व व्यवसाय तक महिला पुरुषों के साथ खड़ी है, लेकिन पुरुषों के लिए उनकी सोच संकुचित ही रही है। वे सिर्फ अपनी भावनाएं और परेशानियाँ उन पर थोप देती है लेकिन जीवनसाथी की परेशानियां उनके लिए सिर्फ बात करने के बराबर ही है। उन्हें समझने के लिए न उनके पास समय है न ही दिलचस्पी। ऐसे में अगर किसी अन्य महिला सहयोगी से अपनी समस्या का जिक्र करता है तो इसका खामियाजा उसे परनारी से अनैतिक और अवैध संबंधों के तानों से चुकाना पड़ता है। कई दफा तो स्थिति तलाक पर पहुंच जाती है।

जरूरत है संस्कारों को पुनर्जीवित करने की,

वर्ना बिखर जाएंगे परिवार व समाज

हालात ये हो गए है कि महिलाओं में सप्रेम और आपसी सामजस्य की कमी से परिवार बिखरने लगे है। पिछले एक-डेढ़ दशक से इस तरह की घटनाएं कई परिवारों में दफन है जो रिश्तों के बिखराव की तड़प सह रही है। इस बिखराव और टकराव का अंत तलाक तक आ पहुंचता है, जिसका सबसे बड़ा खामियाजा पुरुषों को झेलना पड़ रहा है। कई पुरुष विवाह उपरान्त भी अपनी पत्नी और बच्चों के वियोग में जी रहे है।
इससे पहले के दशकों में नारी शिक्षा और कैरियर को लेकर जागरूक नहीं थी। नारी के आत्मविश्वास को समृद्ध और सुदृढ़ करने के लिए सरकार द्वारा उनके पक्ष में कानून बनाए गए। न बल्कि कानून बनाए गए बल्कि समय-समय पर समयानुसार उनमें संशोधन भी किए गए। नारी को पुरुष के समान अधिकार दिए गए। इसमें कोई दोराय नहीं है कि आज नारी पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है और यह बहुत गर्व की बात भी है, लेकिन कहीं न कहीं समान अधिकारों में पुरुष महिलाओं से काफी पिछड़े हुए है।

विवाह उपरान्त कई कोशिशों के बावजूद आपसी तालमेल नहीं बनता। ऐसे में तलाक आवश्यक और आखिरी रास्ता बचता है। तलाक लेने की प्रक्रिया भी आसान नहीं है। कई महीनों और सालों की लम्बी व जटिल प्रक्रिया मानसिक रूप से खोखला और कमजोर कर देती है। महिला को शिक्षा, खाना-पीना, पहनने और कमाने के समान अधिकार दिए गए है।

किन्तु एक कामकाजी नौकरीपेशा और व्यवसायिक समृद्ध महिला (महिला के पक्ष में बने कानून के अनुसार) तलाक की प्रक्रिया के दौरान और तलाक के बाद भत्ते के लिए आवेदन करती है तो यहां समान अधिकार खोखले क्यों पड़ जाते हैं? क्या यह पुरुष पर अत्याचार नहीं है? क्या आर्थिक रूप से सम्पन्न आत्मनिर्भर महिला भी पुरुष से भत्ते के लिए आवेदन कर सकती है? अगर महिला आत्मनिर्भर है तो क्या उसके लिए अपने अधिकारों का ढोल पीटकर पुरुष से भत्ते की मांग करना आवश्यक बन जाता है? अगर बिना सन्तान के तलाक की स्थिति बनती है तो इस तरह के नियमों में बदलाव की आवश्यकता है। संतान होने के बाद अगर तलाक की स्थिति पनपती है तो दोनों को एक साथ उसकी परवरिश का खर्चा उठाने जिम्मेदारी बनती है। अकेले पुरुष पर आर्थिक बोझ मढ़ना कैसा न्याय है? क्या ऐसे कानून-नियमों में पुरुषों का शोषण नहीं हो रहा?

संस्कारों और संस्कृति को संजो कर रखना आज के समय की बहुत बड़ी जरूरत बन गई है, लेकिन अब बेटियों को केवल शिक्षा और कैरियर को लेकर ही जागरूक किया जा रहा है। परिणामस्वरूप संस्कारों की शिक्षा विलुप्त होती प्रतीत हो रही है। संस्कारों की शिक्षा को पुनर्जीवित करना बहुत जरूरी है क्योंकि अगर संस्कार मिटे तो परिवार बिखरेगा, परिवार बिखरा तो समाज बिखरेगा, समाज बिखरा तो वेस्टर्न कल्चर के लिए स्वत: ही पट खुल जाएंगे जो आगे आने वाली पीढ़ी के लिए घातक भी हैं।

इस मकेनिक ने बना दिया एक ऐसा ट्रेक्टर न डीजल की जरुरत और न ही पेट्रोल

इस मकेनिक ने बना दिया एक ऐसा ट्रेक्टर न डीजल की जरुरत और न ही पेट्रोल…………..

In this blog, you will a new  type tractor working on batteries .

New Eicher

Hello, Friends Welcome to my blog . to aj ham Aaye hai ek aisa  Eicher  tractor ko  laker jise  banaya hai is bai ne jo ke chalta hai batteries par .jise banaya hai ik merrut mai small shopkeeper ne jo daudta hai 50 kilometer per hours ki speed par.

Ek tractor machine ne wo kar dala jo scientist se bhi na ho paya. he had made this tractor to work on batteries. he make eicher tractor working through batteries. the speed of this tractor on the road is 50/ph. it is very usefull for small farmer to use it on the road and their fields. tractor machine use six batteries to make this tractor. three batteries use in the front and three are use on back side of this tractor.no use to phill diesel and petrol on it.

Tractor has no sound and very good pick up. he use dc motor,controller and batteries to build it.  philhall is machine walo eh khulasa nahi  kita gya ke is nu khetta /fields de vich use kita ja sakdha hai ja nahi but his work is good and appreciate to create new idea.

for more information watch videos:-


Please tell us how you liked this Blog and by the comment on which tractor you want to like.

प्रदर्शनकारी छात्रों को पुलिस ने रोका, बसों में वापस भेजा,जेएनयू हिंसा

प्रदर्शनकारी छात्रों को पुलिस ने रोका, बसों में वापस भेजा,जेएनयू हिंसा…………..

 

नई दिल्ली. जेएनयू परिसर में रविवार को हुई हिंसा के विरोध में छात्र संघ और शिक्षक संगठनों ने गुरुवार को रैली निकाली। सभी छात्र और शिक्षकों ने मार्च निकाला। छात्र जब राष्ट्रपति भवन की ओर जा रहे थे, तब पुलिस ने उन्हें रोका। छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और उन्हें बसों में भरकर वापस भेजा। प्रदर्शनकारियों ने कुलपति एम जगदीश कुमार के इस्तीफे की मांग की। छात्रों ने जेएनयू में हिंसा के जिम्मेदार लोगों को जल्द सजा देने और बढ़ी हॉस्टल फीस को वापस लेने की मांग की है। इस बीच, जेएनयू प्रशासन ने 5 जनवरी को हुई हिंसा के मद्देनजर सुरक्षा में खामी की जांच कराने का फैसला किया है। वीसी ने कहा- 5 सदस्यीय कमेटी सुरक्षा में कमियों की जांच करेगी।

वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने कहा- सरकार के प्रस्ताव को लागू करने के मामले में कुलपति का हठी रवैया अपनाना हैरानी भरा है। कई रिपोर्ट आ चुकी हैं, जिनमें मानव संसाधन मंत्रालय ने वीसी को जेएनयू में फीस बढ़ाए जाने के मामले को हल करने के लिए कोई तय फार्मुला खोजने का सुझाव दिया है। मेरे हिसाब से कुलपति को पद पर नहीं रहना चाहिए।

आदेश ऊपर से आएगा तो पुलिस क्या करेगी- केजरी

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जेएनयू हिंसा पर कहा- जब ऊपर से कानून-व्यवस्था न बनाने के आदेश मिलेंगे तो पुलिस क्या कर लेगी। अगर आदेश नहीं मानेगी तो सस्पेंड होगी। अगर आदेश आएगा कि हिंसा होने दो, हिंसा करने वालों को निकल जाने दो तो पुलिस क्या कर लेगी?

‘जगदीश कुमार के पद पर रहते यूनिवर्सिटी में शांति नहीं रह सकती’

जेएनयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष डीके लोबियाल ने कहा, “जेएनयू, जामिया और दिल्ली यूनिवर्सिटी के टीचर्स एसोसिएशन समेत विभिन्न सिविल सोसाइटी भी प्रोटेस्ट मार्च में शामिल हुए। हम मानव संसाधन विकास मंत्रालय के दफ्तर तक मार्च करेंगे। हमारा मुख्य उद्देश्य मंत्रालय को इस बात से अवगत कराना है कि मौजूदा वीसी जगदीश कुमार के रहते हुए यूनिवर्सिटी में शांति नहीं रह सकती। हम उनके इस्तीफे की मांग करते हैं।”

जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने ट्विटर पर लिखा, “दिल्ली, भारत के छात्रों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए अब आपकी बारी है। आइए, यूनिवर्सिटी परिसर में हिंसा के खिलाफ और सरकारी शिक्षा के बचाव में मार्च करें। अपने हाथ में पोस्टर लेकर आएं और सभी नागरिकों के लिए दिल में प्यार रखें।”

Kanhaiya Kumar
Hey Delhi, it’s your turn now to show your solidarity with the Students of India. Lets march together against mob violence and in defense of inclusive public education. Please come with posters in your hand and love in your heart for all our fellow-citizens. See you tomorrow.

मुंबई में भी जेएनयू के समर्थन में प्रदर्शन

मुंबई समेत देश के अन्य क्षेत्रों में भी जेएनयू हिंसा के खिलाफ प्रदर्शन हुए। लोगों ने सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ नारेबाजी की। मुंबई में एक प्रदर्शनकारी इरफान मच्छीवाला ने कहा, “गरीब और मुस्लिमों समेत आम लोग नए कानून से ज्यादा प्रभावित होते हैं। नोटबंदी के बाद लोगों को डर है कि वे फिर से कतारों में खड़े होने के लिए मजबूर होंगे।” बुधवार को भी दिल्ली-मुंबई समेत देश के अन्य हिस्सों बेंगलुरु, कोलकाता, अहमदाबाद, डिब्रूगढ़ आदि में जेएनयू हिंसा के खिलाफ प्रदर्शन हुए थे। दिल्ली में सेंट स्टीफंस कॉलेज के छात्रों ने बुधवार को क्लासों का बहिष्कार किया और परिसर में प्रदर्शन किया।

हिंसा अधिकारियों की प्रायोजित गुंडागर्दी: कांग्रेस

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा- अभी तक 72 घंटे हो चुके हैं, लेकिन एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। छात्रों के साथ मारपीट करने वालों को जल्द गिरफ्तार किया जाए। यह घटना अचानक नहीं घटी बल्कि, सुनियोजित थी। हम सभी जानते हैं कि इसके पीछे कौन हैं। इस हिंसा के पीछे मानव संसाधन विकास विभाग और गृह मंत्री हैं। यह अधिकारियों की प्रायोजित गुंडागर्दी है। यूनिवर्सिटी कैंपस में शांति कायम करने के लिए कुलपति एम जगदीश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए।

50 लाख हेक्टेयर ज़मीन जलकर ख़ाक, 50 करोड़ जीव-जंतुओं की मौत,ऑस्ट्रेलियाई आग

50 लाख हेक्टेयर ज़मीन जलकर ख़ाक, 50 करोड़ जीव-जंतुओं की मौत,ऑस्ट्रेलियाई आग…………..

 

ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी भीषण आग से देश में जीवन बुरी तरह तबाह है. बेकाबू आग दुनिया के कई मुल्कों से भी बड़े इलाके में फैली हुई है और पिछले कई हफ्तों से ऑस्ट्रेलिया को जला रही है। इस आग की वजह से ऑस्ट्रेलिया के पीएम स्कॉट मॉरिसन ने भारत दौरा रद्द कर दिया है. यह आग अभी तक 50 लाख हेक्टेयर ज़मीन के हिस्से को जलाकर ख़ाक़ कर चुकी है.

इससे जुड़े 10 महत्वपूर्ण तथ्य क्या हैं, हम आपको बताते हैं.

1. ऑस्ट्रेलिया में लगी आग अबतक 50 लाख हेक्टेयर ज़मीन जलाकर ख़ाक कर चुकी है। दुनिया के कई मुल्क सिंगापुर, डेनमार्क, नीदरलैंड और बेल्जियम आग से तबाह इलाके से बहुत छोटे हैं।

2. लगभग 100 जगहों पर अब भी आग तेज़ी से धधक रही है जिसके चलते दस हज़ार से भी ज़्यादा लोगों को अपना घर छोड़कर महफ़ूज़ इलाक़ों में जाना पड़ा है।

3. यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिडनी के शोधकर्ताओं के मुताबिक सितम्बर से अब तक लगभग 50 करोड़ जीव जंतुओं की मौत हो चुकी है. इनमें परींदे और सांप की तरह रेंगकर चलने सरीसृप शामिल हैं।

4. ऑस्ट्रेलिया में तकरीबन 1300 घर और 2000 इमारतें इस आग की भेंट चढ़ चुकी हैं और 17 लोगों की मौत हो चुकी है.

5. आग इतनी भीषण है कि उससे उठाने वाला काला धुआं 2000 किलोमीटर दूर न्यूज़ीलैंड तक पहुंच गया है और आसमान में छाया हुआ है.
वीडियो देखिये

6. साल 2009 में लगी ऐसी ही भीषण आग के बाद बने आयोग ने तब 4.4 अरब डॉलर का नुकसान बताया था। विशेषज्ञों के मुताबिक इस साल लगी आग 2009 के मुक़ाबले 6 गुना बड़ी है।

7. ऑस्ट्रलिया की राजधानी कैनबेरा में एयर क्वालिटी इंडेक्स 7,700 के पार हो चुका है जबकि साफ़ हवा के लिए एक्यूआई का स्तर 200 के आसपास होना चाहिए.

8. ऑस्ट्रेलिया में पिछले तीन के मुक़ाबले साल 2019 सबसे गर्म और पानी की किल्लत वाला साल रहा है. आग भड़कने की एक वजह यह भी है कि मिट्टी या जंगलों में नमी नहीं है.

9. अगर इस आग को एक सीधी रेखा में कर दिया जाए तो यह ऑस्ट्रेलिया से अफ़ग़ानिस्तान पहुंच जाएगी. दोनों देशों के बीच की दूरी तक़रीबन 10 हज़ार किलोमीटर है.

10. ऑस्ट्रेलिया के मौसम विभाग ने कहा है कि आग इतनी भीषण है कि इसके धुएं की वजह एक ख़ास किस्म के बादल बन रहे हैं जिसकी वजह से तूफ़ान आ रहे हैं और आग भड़क रही है.

जानें क्या है CAA और NRC , क्या फर्क है दोनों में, क्यों है बवाल

क्या है CAA और NRC , जानें दोनों के बीच का अंतर और पूरा मतलब………..

 

What is CAA , NRC : दिल्ली , यूपी समेत देश भर में संशोधित नागरिकता कानून ( Citizenship Amendment Act ) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर या एनआरसी ( NRC ) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। राष्ट्रीय राजधानी में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन पर लगी रोक के बावजूद गुरुवार को सड़कों पर उतरने के चलते सैकड़ों छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया, जबकि कई इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। कई मेट्रो स्टेशनों को भी बंद कर दिया गया, जिससे शहर में यातायात प्रभावित हुआ। वहीं नये नागरिकता कानून के खिलाफ राजधानी लखनऊ में हिंसा भड़क उठी। उपद्रवियों ने पथराव किया, वाहनों को आग लगा दी जबकि संभल में दो सरकारी बसों को आग के हवाले कर दिया। कर्नाटक में इतिहासकार गुहा सहित तमाम प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए। कोलकाता में रैली में विभिन्न क्षेंत्रों की नामचीन हस्तियों, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और छात्रों ने गुरुवार को यहां ऐतिहासिक अगस्त क्रांति मैदान में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

जानें क्या है CAA और NRC , क्या फर्क है दोनों में, क्यों है बवाल

CAB ( Citizenship Amendment Bill ) संसद में पास होने और राष्ट्रपति की महुर लगने के बाद नागरिक संशोधन कानून ( CAA – Citizenship Amendment Act ) बन गया है। CAA और एनआरसी (NRC) के बीच अंतर समझना जरूरी है क्योंकि इन दोनों को लेकर भ्रम का माहौल बना हुआ है कि यह भारतीय मुस्लिमों के खिलाफ है।

मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में CAA के खिलाफ प्रदर्शन, अहमदाबाद में हिरासत में लिए गए 20 लोग

1. दोनों के बीच का फर्क

– नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) जहां धर्म पर आधारित है वहां राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। नागरिक संशोधन कानून (CAA) में गैर मुस्लिम (छह प्रमुख धर्म) के लोगों को जगह दी गई है।

– सीएए के तहत मुस्लिम बहुल आबादी वाले देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में उत्पीड़न के कारण भाग कर भारत आए हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है। इसमें मुस्लिमों को शामिल नहीं किया गया।

– एनआरसी में अवैध अप्रवासियों की पहचान करने की बात कही गई है, चाहे वे किसी भी जाति, वर्ग या धर्म के लोग हों, उनकी पहचान कर उन्हें देश से बाहर किया जाएगा।

2. NRC अभी सिर्फ असम में लागू है जबकि CAA को पूरे देश में लागू किया गया है

एनआरसी बहरहाल सिर्फ असम में लागू है जबकि सीएए देशभर में लागू होगा। सच यह है कि एनआरसी अभी तक राज्य विशेष में लागू है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नस्ली विशिष्टता को बनाए रखने के लिए एनआरसी असम में लागू किया गया है जिसके तहत राज्य से अवैध अप्रवासियों को बाहर करने का जिक्र किया गया है। असम के अलावा यह किसी दूसरी जगह लागू नहीं है।

– जबकी CAA (नागरिकता संशोधन कानून) राष्ट्रव्यापी है और यह पूरे भारत में लागू होगा। हालांकि कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसका विरोध करते हुए उनके राज्य में इस कानून को लागू नहीं करने की बात कही है, लेकिन संविधान के जानकारों का मानना है कि इसके लागू किए जाने पर अंतिम फैसला केंद्र सरकार का होगा।

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3. सीएए भारतीय मुस्लिमों के खिलाफ नहीं:

सीएए को लेकर एक धारणा बन गई है कि इससे भारतीय मुस्लिम अपने अधिकारों से वंचित हो जाएंगे, लेकिन सच यह है कि ऐसा करना चाहें तो भी इस कानून के तहत ऐसा नहीं किया जा सकता है। दरअसल, सीएए को देशभर में प्रस्तावित एनआरसी से जोड़कर देखा जा रहा है, इसलिए ऐसी धारणा बनी है।

4 – ऐसे अवैध प्रवासियों को जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 की निर्णायक तारीख तक भारत में प्रवेश कर लिया है, वे भारतीय नागरिकता के लिए सरकार के पास आवेदन कर सकेंगे।

5. अभी तक भारतीय नागरिकता लेने के लिए 11 साल भारत में रहना अनिवार्य था। नए कानून CAA में प्रावधान है कि पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक अगर पांच साल भी भारत में रहे हों तो उन्हें नागरिकता दे दी जाएगी।

6. CAA में यह भी व्यवस्था की गयी है कि उनके विस्थापन या देश में अवैध निवास को लेकर उन पर पहले से चल रही कोई भी कानूनी कार्रवाई स्थायी नागरिकता के लिए उनकी पात्रता को प्रभावित नहीं करेगी।

7. ओसीआई कार्डधारक यदि शर्तों का उल्लंघन करते हैं तो उनका कार्ड रद्द करने का अधिकार केंद्र को मिलेगा। पर उन्हें सुना भी जाएगा।

8- नागरिकता संशोधन कानून के चलते जो विरोध की आवाज उठी उसकी वजह ये है कि इस बिल के प्रावधान के मुताबिक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले मुसलमानों को भारत की नागरिकता नहीं दी जाएगी। कांग्रेस समेत कई पार्टियां इसी आधार पर बिल का विरोध कर रही हैं।

9. क्यों हो रहा है बवाल

सीएए को लेकर देशभर में अभी जो विरोध हो रहा है वह दो तरह की आशंकाओं से प्रेरित है।

पूर्वोत्तर में क्यों हो रहा है विरोध

पूवोर्त्तर में इसका विरोध इसलिए हो रहा है कि अधिकांश लोगों को आशंका है इसके लागू होने पर उनके इलाके में अप्रवासियों की तादाद बढ़ जाएगी जिससे उनकी जनांकिकी और भाषाई विशिष्टता बरकरार नहीं रह जाएगी। यहां चिंता है कि पिछले कुछ दशकों में बांग्लादेश से बड़ी तादाद में आए हिन्दुओं को नागरिकता प्रदान की जा सकती है।

10. अन्य इलाकों में विरोध

वहीं, भारत के अन्य क्षेत्रों मसलन, केरल, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में सीएए का विरोध इसमें मुस्लिमों को शामिल नहीं किए जाने को लेकर हो रहा है। उनका मानना है कि यह संविधान के विरुद्ध है।

निर्भया केस में चारों दोषियों का डेथ वारंट जारी, 22 जनवरी को दी जाएगी फांसी

निर्भया केस में चारों दोषियों का डेथ वारंट जारी, 22 जनवरी को दी जाएगी फांसी……….

 

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में मंगलवार को निर्भया गैंगरेप केस में सुनवाई हुई. अदालत ने मामले के चारों दोषियों का डेथ वारंट जारी कर दिया है. चारों दोषियों को 22 जनवरी की सुबह सात बजे फांसी दी जाएगी. इससे पहले निर्भया की मां की याचिका पर कोर्ट में सुनवाई चली. उनकी मांग थी कि सभी दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी हो. इस मामले में कोर्ट ने कहा कि आप अपना वकालतनामा जमा करें. फिर दोषी मुकेश के वकील एमएल शर्मा ने कहा कि मैं आधे घंटे में जमा कर दूंगा. उनका कहना है कि मुकेश को जेल में प्रताड़ित किया जा रहा है. कोर्ट ने कहा कि एमएल शर्मा क्या आप दोषी मुकेश से मिले हैं? इस पर वकील एमएल शर्मा ने कहा कि मुझे उनके परिवार ने पैरवी करने के लिए कहा है.

एमिकस क्यूरी वृंदा ग्रोवर ने कहा कि सब कुछ स्पष्ट हो जाना चाहिए की किसकी क्या भूमिका है. सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि किसी भी दोषी की कोई याचिका पेंडिंग नहीं है, डेथ वारंट जारी किया जाए. निर्भया के वकील जितेन्द्र झा ने कोर्ट से कहा कि दोषी क्यूरेटिव पिटीशन तभी दाखिल कर सकते हैं जब उनकी पुनर्विचार याचिका सर्कुलर के जरिए खारिज़ की गई हो.

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सरकारी वकील के मुताबिक सभी दोषियों के रिव्यू पीटिशन पहले ही खारिज़ हो चुकी हैं. आज की डेट में कोई रिव्यू या मर्सी पिटीशन पेंडिंग नहीं है. वहीं, सरकारी वकील राजीव मोहन ने कहा, ”क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करने के लिए जरूरी है कि दोषियों की पुनर्विचार याचिका सर्कुलेशन में खारिज़ हुए हो, लेकिन यहां ओपन कोर्ट में सुनवाई होकर खारिज़ है, डेथ वारंट जारी होने के बाद मामला खत्म नहीं होता जो फांसी तक समय मिलता है, उसमें किया जा सकता है. डेथ वारंट जारी किया जा सकता है. डेथ वारंट जारी होते ही फांसी नहीं होती, समय दिया जाता है. दिए गए समय का उपयोग दया याचिका दाखिल कर सकते हैं. अगर पेंडिंग रहती है तो फांसी वैसे ही रूक जाएगी.”

सरकारी वकील ने कोर्ट में जेल प्रशासन की रिपोर्ट सौंपी. वकील जीतेन्द्र झा ने कोर्ट में जेल मैनुअल पढ़कर सुनाया. उन्होंने कहा, ”डेथ वारंट जारी करने पर कोई रुकावट नहीं है, मौजूद समय कोई याचिका या एप्लिकेशन पेंडिंग नहीं है.”

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शत्रुघ्न चौहान मामले के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि 14 दिन का समय देते हुए डेथ वारंट जारी करना चाहिए, उन दिनों का दोषी इस्तेमाल कर सकते हैं. दोषी के वकील सिर्फ समय खराब कर रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले को सुनकर ही पुनर्विचार याचिका खारिज की थी, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट भी इसमें देरी नहीं चाहता.

मुकेश के वकील एमएल शर्मा ने कहा कि कोर्ट ने कौन-सा आदेश दिया कि जल्दी फांसी होनी चाहिए. मुकेश के वकील एमएल शर्मा को डांटते हुए कहा कि आप क्या बात कर रहे हैं, आप आज आकर सिर्फ मेमो दे रहे हैं अभी तक वकालतनामा भी जमा नहीं किया है, आप क्या चाहते हैं कितना वक्त लगाए हम? फिर वकील शर्मा ने कहा कि मैं जल्दी वकालतनामा जमा कर दूंगा.

वृंदा ग्रोवर ने जेल मैनुअल पढ़कर बताया कि जेल प्रशासन ने किसको कब नोटिस जारी किया, जवाब क्या मिला. वृंदा ग्रोवर ने कहा, मेरे क्लाइंट को कानूनी सहायता मिलनी चाहिए, हमें सभी कागज उपलब्ध करवाए जाएं. किसी भी पक्ष के वकील व्यक्तिगत टिप्पणी ना करें.

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निर्भया के वकील जितेन्द्र झा ने कहा, ”21 दिसंबर के आदेश को पढ़कर सुना रहे हैं कि दोषी मुकेश के पास वकील नहीं था और उनके पुराने वकील एमएल शर्मा केस नहीं लड़ना चाहते, तभी वृन्दा ग्रोवर की कोर्ट मित्र की नियुक्ति की गई.”

सरकारी वकील राजीव मोहन ने कहा, ”इनको बताना होगा कि क्या इनके पास क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करने का अधिकार है? नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले और जेल मैनुअल का औसत यही रहा है कि 14 दिन का समय दिया जाता है, ये कोर्ट भी 14 दिन का समय देते हुए डेथ वारंट जारी कर दे, अगर कुछ पेंडिंग हुआ तो समय बढ़ता जाएगा.”

इसके बाद निर्भया केस में पटियाला हाउस कोर्ट ने फैसला सुरक्षित किया और मंगलवार को दोपहर 3:30 बजे सुनाने का फैसला लिया. दोषियों को आदेश देते समय वीडियो कॉन्फ्रेंस से पेश किया जाएगा. एमएल शर्मा की दोषी मुकेश की तरफ से पैरवी करने की अर्जी खारिज हुई.

अपनाइए बायोफ्लिक फिश फार्मिंग को, और बनाइए एक टैंक कि मदद से 80000 तक रुपए!

किसान को हमारे देश में अन्नदाता कहा जाता है, ऐसा इसलिए क्योंकि इन्हीं की वजह से हमें समय समय पे खाना मिल जाता है। मगर जब किसानों को खेती करने में समस्या आने लगेगी तो बाकी इंसानों को खाना मिलना मुश्किल होजाएगा। आए दिन खेती में आने वाले गड़बड़ी जैसे की समय पे बारिश ना होना, बाढ़ आजाना, फसल पर कीड़े पर जाना इत्यादि से किसान परेशान हो उठते हैं। ऐसे में वो अपना जीवन बिताने के लिए खेती छोर कोई दूसरे काम में लग जाते हैं।

मगर हम आज आपको ऐसी तकनीक से रूबरू करवाने जा रहे हैं, जिसकी मदद से आप अपने केवल एक टैंक से ही महीने के 80 हज़ार से भी ज्यादा रुपए कमा सकते हैं। आप में से कई सोच रहे होंगे आखिर ऐसे कैसे मुमकिन है? तो चलिए आज हम आपको बताते हैं फिश फार्मिंग के बारे में:

आपको बता दें कि बायॉफ्लिक फिश फार्मिंग भारत में सबसे पहली बार जुलाई 2018 में आया है। आपको बता दें कि इस टेक्नोलॉजी यानी कि बायोफ्लोक टेक्नोलॉजी के मदद से पानी की क्वालिटी और समुद्री जीवन का विकाश होता है, इस टेक्नोलॉजी के मदद से कार्बन नाइट्रोजन का मात्रा पानी में बैलेंस हो जाता है। आपको बता दे की इस तकनीक का इस्तेमाल कर के पानी को भी सुध बनाया जाता है, और साथ ही साथ पानी में रहने वाले जीवो को सुध खाने में भी मदद करता है। काफी लोगों को मालूम नहीं होगा मगर आपको बता दें कि बायोफ्लॉक एक बहुत ही अच्छा विटामिन और मिनरल का सोर्स है। अगर हम बात करें इनके टैंक में लगाए हुए लागत की तो वो काफी ज्यादा कम बनते हैं, जिससे किसी भी बरोज़ागार को खोलने में किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी। साथ ही साथ इसकी मदद से एक टैंक से ही काफी ज्यादा फायदा भी खुद को मिल सकता है।